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यार, मुझसे नहीं होगा! से ये तो कमाल है तक: जब दिल्ली की तान्या ने 30 दिन तक सुबह 5 बजे उठने का लिया चैलेंज

दिल्ली की रहने वाली तान्या ने बताया कि 30 दिन के रूटीन में क्या बदला, कैसे खुद के लिए मिला वक्त और बढ़ा फोकस.

यार, मुझसे नहीं होगा! से ये तो कमाल है तक: जब दिल्ली की तान्या ने 30 दिन तक सुबह 5 बजे उठने का लिया चैलेंज
दिल्ली की रहने वाली तान्या की कहानी. (Image iStock)

आज के समय में ज्यादातर युवा वर्ग रात देर से सोता है और सुबह देर से उठता है. कई लोग काम के चलते तो कई लोग आदत की वजह से लेट सोते हैं. दिल्ली की भागदौड़ भरी लाइफ और लेट नाइट तक नेटफ्लिक्स स्क्रॉल करने की आदत वाली तान्या का भी यही सोचना था. 

साउथ दिल्ली में रहने वाली 25 साल की तान्या एक डिजिटल मार्केटिंग कंपनी में काम करती हैं. उनकी लाइफ भी दिल्ली के आम युवाओं जैसी ही थी रात को 2 बजे तक जागना, सुबह ऑफिस के लिए लेट होना और पूरे दिन चाय-कॉफी के सहारे चलना. इस आदत के चलते तान्या को कई सेहत से जुड़ी समस्याएं भी परेशान करने लगीं, फिर तान्या ने तय किया कि ऐसे तो नहीं काम चलेगा वो 30 दिनों तक सुबह 5 बजे उठने का चैलेंज लेने का मन बना लीं. 

​शुरुआत में यह किसी सजा जैसा था, लेकिन 30 दिन खत्म होते-होते जो बदलाव आए, उन्होंने तान्या को हैरान कर दिया. आइए जानते हैं उनकी इस इंस्पायरिंग जर्नी की पूरी कहानी. 

सुबह 5 बजे उठने के फायदे. (Image Unsplash) 

​शुरुआती 5 दिन- 

​तान्या बताती हैं, पहले तीन दिन तो ऐसा लगा जैसे मैंने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली हो. सुबह 5 बजे जब अलार्म बजता था, तो मन करता था कि इसे बंद करके थोड़ी देर और सो लूं. शुरुआत में तान्या का सिर भारी रहता था और दोपहर में भयंकर नींद आती थी. इसका कारण यह था कि सुबह उठने के चक्कर में उनकी रात की नींद पूरी नहीं हो पा रही थी. 

चौथे-पांचवें दिन से उन्होंने रात को 10:30 बजे तक बिस्तर पर जाना शुरू कर दिया, जिससे उनके शरीर को ढलने में मदद मिली.

​खुद के लिए समय- 

​जैसे ही दूसरा हफ्ता शुरू हुआ, तान्या को एहसास होने लगा. उन्होंने देखा कि सुबह 5 से 8 बजे के बीच उनके पास पूरे 3 घंटे का एक्स्ट्रा समय था, जिसमें कोई उन्हें परेशान करने वाला नहीं था. न तो ऑफिस के ईमेल्स का प्रेशर था और न ही सोशल मीडिया पर दोस्तों के मैसेज की खटर-पटर.

​तान्या ने इस समय का इस्तेमाल दिल्ली की ताजी हवा में वॉक करने, थोड़ा वर्कआउट करने और शांति से बैठकर चाय पीने में किया. उन्होंने बताया, मुझे जिंदगी में पहली बार समझ आया कि मी-टाइम क्या होता है. वरना पहले तो आंख खुलते ही ऑफिस भागने की टेंशन शुरू हो जाती थी.

​तान्या ने इस समय का इस्तेमाल दिल्ली की ताजी हवा में वॉक करने, थोड़ा वर्कआउट करने और शांति से बैठकर चाय पीने में किया. उन्होंने बताया, मुझे जिंदगी में पहली बार समझ आया कि मी-टाइम क्या होता है. वरना पहले तो आंख खुलते ही ऑफिस भागने की टेंशन शुरू हो जाती थी.

​फोकस बढ़ा- 

​चैलेंज के आखिरी दिनों तक आते-आते तान्या का शरीर इस रूटीन का आदी हो चुका था. अब उन्हें उठने के लिए अलार्म की भी जरूरत नहीं पड़ती थी. सबसे बड़ा बदलाव उनके काम की क्वालिटी में आया. ऑफिस में जो काम वो पहले 4 घंटे में करती थीं, अब वो सिर्फ 2 घंटे में होने लगा था. दोपहर की सुस्ती गायब हो चुकी थी और मूड हमेशा फ्रेश रहने लगा था. 

​हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग (Harvard Health Publishing) की इस रिसर्च के मुताबिक, जो लोग अपने सोने और जागने के समय को आम लोगों से सिर्फ 1 घंटा पहले शिफ्ट कर लेते हैं, उनमें डिप्रेशन का खतरा 23% तक कम हो जाता है. सुबह की धूप मूड को बेहतर बनाने वाले हार्मोन्स को बूस्ट करती है.

​अगर आप भी अपनी सुस्त और भागती हुई जिंदगी से परेशान हैं, तो तान्या का यह 30 दिनों का फॉर्मूला आपके लिए लाइफ-चेंजिंग साबित हो सकता है.

यह लेख हमारे एक पाठक का नीज‍ि अनुभव है. इसमें व्‍यक्‍त व‍िचार उनके अपने हैं.

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लेखक के बारे में
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आराधना सिंह
सीनियर सब एडिटर
दिल से फूडी हूं! इटेलियन, चाइनीज और इंडियन फूड्स खाना ही नहीं उनके बारे में जानना और बात करना भी पसंद है. नए स्वाद और फूड की तलाश का जुनून हर समय रहता... और पढ़ें
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