मेट्रो सिटी में रहने वाले हर व्यक्ति को पता ही नहीं चलता कि कब उसका दिन शुरू होता है और कब खत्म... जीवनशैली ही इतनी व्यस्त और भागमभाग भरी हो गई है कि उसे खुद अपना ख्याल रखने का ही समय नहीं लगाता। पर ऐसा कब तक चल सकता है, अगर आप अपना और अपनी सेहत का ख्याल नहीं रखेंगे तो यकीनन इसका असर आपके काम पर भी पड़ेगा और शरीर पर भी।
जीवनशैली में बदलाव से हृदय संबंधी रोगों से बचा जा सकता है, क्योंकि एक नए शोध के मुताबिक, आहार में वसा की मात्रा कम करना और फलों, सब्जियों और अनाज की मात्रा बढ़ाना दिल के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। अध्ययन के मुताबिक, जीवनशैली में परिवर्तन से कॉलेस्ट्रॉल में कमी आई और यह कमी बुजुर्गो और ऐसे लोग, जिन्हें दिल के रोगों का खतरा ज्यादा होता है, उनमें ज्यादा देखी गई।
इसका प्रभाव कम उम्र के लोगों की जगह बुजुर्गो में ज्यादा देखा गया। हालांकि पुरुषों और महिलाओं में इस प्रभाव में कोई फर्क नहीं पाया गया।
यही नहीं, ऐसे व्यक्ति जिन्हें दिल की बीमारियों का खतरा ज्यादा था, उच्च रक्तचाप व मधुमेह का इलाज चल रहा था और एक बार दिल का दौरा पड़ चुका था, उनमें सबसे ज्यादा फायदा पाया गया।
शोधकर्ताओं ने कहा कि नजीते दिखाते हैं कि लोगों के बीमार पड़ने या दिल के दौरे से होनेवाली मौत से बचाव कॉलेस्ट्रॉल में कमी लाकर की जा सकती है।
स्वीडन के उमिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर मात्स एलियासन ने कहा, "कॉलेस्ट्रॉल में कमी का सबसे महत्पूर्ण कारण जीवनशैली में परिवर्तन है, खासकर फल, सब्जियों व अनाजों का अधिक से अधिक सेवन।"
यह अध्ययन पत्रिका 'यूरोपीयन हार्ट जर्नल' में प्रकाशित हुआ है।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)
जीवनशैली में बदलाव से हृदय संबंधी रोगों से बचा जा सकता है, क्योंकि एक नए शोध के मुताबिक, आहार में वसा की मात्रा कम करना और फलों, सब्जियों और अनाज की मात्रा बढ़ाना दिल के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। अध्ययन के मुताबिक, जीवनशैली में परिवर्तन से कॉलेस्ट्रॉल में कमी आई और यह कमी बुजुर्गो और ऐसे लोग, जिन्हें दिल के रोगों का खतरा ज्यादा होता है, उनमें ज्यादा देखी गई।
इसका प्रभाव कम उम्र के लोगों की जगह बुजुर्गो में ज्यादा देखा गया। हालांकि पुरुषों और महिलाओं में इस प्रभाव में कोई फर्क नहीं पाया गया।
यही नहीं, ऐसे व्यक्ति जिन्हें दिल की बीमारियों का खतरा ज्यादा था, उच्च रक्तचाप व मधुमेह का इलाज चल रहा था और एक बार दिल का दौरा पड़ चुका था, उनमें सबसे ज्यादा फायदा पाया गया।
शोधकर्ताओं ने कहा कि नजीते दिखाते हैं कि लोगों के बीमार पड़ने या दिल के दौरे से होनेवाली मौत से बचाव कॉलेस्ट्रॉल में कमी लाकर की जा सकती है।
स्वीडन के उमिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर मात्स एलियासन ने कहा, "कॉलेस्ट्रॉल में कमी का सबसे महत्पूर्ण कारण जीवनशैली में परिवर्तन है, खासकर फल, सब्जियों व अनाजों का अधिक से अधिक सेवन।"
यह अध्ययन पत्रिका 'यूरोपीयन हार्ट जर्नल' में प्रकाशित हुआ है।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)
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