घर में पौधे लगाना तो हर किसी को अच्छा लगता है, लेकिन कई बार खूब पानी और धूप देने के बाद भी पौधे ठीक से नहीं बढ़ते. इसकी एक वजह गमले की मिट्टी का सख्त हो जाना भी हो सकती है. जब मिट्टी जम जाती है तो पौधों की जड़ों को हवा और जरूरी खाना ठीक से नहीं मिल पाता. ऐसे में बाजार से महंगी खाद लाने के बजाय घर पर बना जीवामृत काम आ सकता है. इसे कुछ आसान चीजों से तैयार किया जाता है और गमलों की मिट्टी को बेहतर बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.
जीवामृत क्या होता है
जीवामृत एक तरह का देसी घोल है, जिसे पौधों की मिट्टी के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसे गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और थोड़ी सी मिट्टी से बनाया जाता है. माना जाता है कि इससे मिट्टी में पौधों के लिए फायदेमंद जीव बढ़ते हैं. इससे मिट्टी ढीली और भुरभुरी रहने में मदद मिल सकती है.
इसे बनाने के लिए चाहिए ये चीजें
10 लीटर जीवामृत बनाने के लिए 10 लीटर पानी, 500 ग्राम गाय का गोबर, 500 मिलीलीटर गोमूत्र, 100 ग्राम गुड़, 100 ग्राम बेसन और पेड़ के नीचे की थोड़ी सी मिट्टी लें. ये सभी चीजें एक बड़ी प्लास्टिक की बाल्टी में डालें.
ऐसे बनाएं घर का जीवामृत
सबसे पहले सभी चीजों को बाल्टी में अच्छी तरह मिला लें. फिर लकड़ी की छड़ी से इस घोल को 1 से 2 मिनट तक चलाएं. बाल्टी को कपड़े या ढक्कन से ढककर छायादार जगह पर रख दें. इसे रोज एक बार लकड़ी की छड़ी से हिलाते रहें. करीब 4 से 6 दिन में जीवामृत तैयार हो सकता है.

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गमलों में ऐसे करें इस्तेमाल
तैयार जीवामृत को सीधे गमले में न डालें. पहले इसे पानी में मिलाकर हल्का करें. 1 लीटर जीवामृत में 10 लीटर सादा पानी मिलाएं. अब इस घोल को गमले की मिट्टी में डाल सकते हैं या पौधों पर हल्का छिड़क सकते हैं. करीब 15 से 20 दिन में एक बार इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.
किन पौधों में डाल सकते हैं
इसे सब्जियों, फूलों, फल वाले पौधों और घर में लगे सजावटी पौधों में इस्तेमाल किया जा सकता है. तुलसी और एलोवेरा जैसे पौधों में भी इसे दिया जा सकता है. हालांकि कैक्टस और कम पानी वाले पौधों में इसकी मात्रा बहुत कम रखें.
पौधों को क्या फायदा मिल सकता है
जीवामृत के इस्तेमाल से गमले की सख्त मिट्टी ढीली होने में मदद मिल सकती है. इससे जड़ों तक हवा और पानी आसानी से पहुंच सकता है. पौधों में नई पत्तियां और कलियां आने में भी मदद मिल सकती है. हालांकि हर पौधे की जरूरत अलग होती है, इसलिए पहली बार इसे कम मात्रा में इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा.
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