Parenting Pressure: हर माता-पिता अपने बच्चे के लिए सबसे अच्छा चाहते हैं. अच्छी पढ़ाई, अच्छे संस्कार, सुरक्षित भविष्य और समाज में पहचान ये सब सपने हर पेरेंट के दिल में होते हैं. लेकिन, जब यही सबसे अच्छा करने की कोशिश परफेक्ट पेरेंटिंग में बदल जाती है, तब अनजाने में बच्चों पर भारी मानसिक दबाव बनने लगता है. आज के समय में यह एक बेहद जरूरी विषय बन गया है, क्योंकि प्यार और उम्मीद के बीच की बारीक रेखा अक्सर दिखाई नहीं देती.
अच्छे इरादे, गलत असर
आजकल सोशल मीडिया, पैरेंटिंग किताबें और कंपेरिजन कल्चर ने आदर्श माता-पिता की एक तस्वीर बना दी है. हर जगह यही दिखता है कि अच्छा पेरेंट वही है जिसका बच्चा टॉपर हो, मल्टी-टैलेंटेड हो, कॉन्फिडेंट हो और कभी गलती न करे. ऐसे में माता-पिता भी खुद को साबित करने की दौड़ में शामिल हो जाते हैं. नतीजा यह होता है कि बच्चे अपनी उम्र से ज्यादा उम्मीदों का बोझ ढोने लगते हैं.
परफेक्ट पेरेंटिंग बच्चों पर प्रेशर कैसे बनती है? | How Does Perfect Parenting Create Pressure on Children?
1. हर वक्त बेहतर करने की उम्मीद
जब बच्चे से हमेशा और अच्छा करने की उम्मीद की जाती है, तो वह अपनी उपलब्धियों से खुश होना भूल जाता है. उसे लगता है कि वह कभी पर्याप्त नहीं है.
2. गलती करने का डर
परफेक्ट पेरेंट अक्सर गलती को असफलता मान लेते हैं. इससे बच्चा एक्सपेरिमेंट करने और नई चीज़ें सीखने से डरने लगता है.
3. तुलना का जहर
देखो शर्मा जी का बच्चा क्या कर रहा है, यह एक लाइन बच्चों के आत्मविश्वास को गहरी चोट पहुंचा सकती है. तुलना बच्चे को खुद से नाखुश बना देती है.

4. भावनाओं को दबाने की आदत
जब माता-पिता सिर्फ रिजल्ट पर फोकस करते हैं, तो बच्चे की भावनाएं अनदेखी रह जाती हैं. धीरे-धीरे बच्चा अपनी परेशानी शेयर करना बंद कर देता है.
5. प्यार को परपॉर्मेंस से जोड़ देना
अगर बच्चे को लगता है कि उसे प्यार तभी मिलेगा जब वह अच्छा करेगा, तो वह हर समय खुद को साबित करने के दबाव में जीता है.
बच्चों पर इसके लंबे समय के असर
लगातार दबाव में रहने वाले बच्चों में:
- एंग्जायटी और स्ट्रेस बढ़ सकता है.
- आत्मविश्वास कम हो सकता है.
- निर्णय लेने में डर लग सकता है.
- रिश्तों में खुलापन कम हो सकता है.
परफेक्ट नहीं, प्रेजेंट पेरेंट बनें
बच्चों को परफेक्ट माता-पिता नहीं चाहिए, उन्हें समझने वाले और साथ देने वाले माता-पिता चाहिए. गलती को सीखने का मौका मानें, तुलना से बचें और बच्चे को यह एहसास दिलाएं कि आपका प्यार बिना शर्त है.
परफेक्ट पेरेंट बनने की कोशिश छोड़कर अगर माता-पिता इंसान बनकर बच्चों के साथ जुड़ें, तो बच्चे न सिर्फ बेहतर बनते हैं, बल्कि खुश और आत्मविश्वासी भी होते हैं. याद रखें, बच्चों को उड़ान देने के लिए दबाव नहीं, भरोसा चाहिए.
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