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आपकी ये आदतें बना रही हैं आपके बच्चे को जिद्दी, इस तरह बच्चों को दिखाएं सही दिशा

Parenting Tips: बच्चों को हर चीज के लिए मना करना, हर बात पर टोकना, यहां मत जाओ, ये मत करो, हर चीज पर अपने नियम थोपना बच्चों को जिद्दी बना सकता है. एक्सपर्ट से जानें बच्चों के जिद्दी बिहेवियर को कैसे ठीक करें.

आपकी ये आदतें बना रही हैं आपके बच्चे को जिद्दी, इस तरह बच्चों को दिखाएं सही दिशा
Stubborn Child: आपकी ये आदतें बना रही हैं आपके बच्चे को जिद्दी.

Parenting Tips: ज्यादातर लोग बच्चों की गलतियां पर उन्हें डांटते-फटकारते और कई बार मारपीट भी करते हैं. हर बात के लिए उन्हें रोकना, टोकना या मना करना बच्चों को जिद्दी बना देता है. बच्चों के जिद्दी और अड़ियल व्यवहार के लिए अक्सर माता-पिता उन पर ही दोष डालते हैं और उनके साथ सख्ती कर उन्हें सुधारने की कोशिश करते हैं. लेकिन एक्सपर्ट बताते हैं कि बच्चों के जिद्दी बिहेवियर के पीछे माता-पिता की ही गलतियां होती हैं. पेरेंट्स का गलत व्यवहार, बच्चों के बिहेवियर पर असर डालता है.

पेरेंट्स की कौन सी आदतें बच्चों को बनाती हैं जिद्दी- (Which habits of parents make children stubborn?)

1. बहुत ज्यादा कमांडिंग होना-

बच्चों को हर चीज के लिए मना करना, हर बात पर टोकना, यहां मत जाओ, ये मत करो, हर चीज पर अपने नियम थोपना बच्चों को जिद्दी बनाता है. छोटे बच्चों का ब्रेन हर बार कंट्रोल के लिए रेडी नहीं होता इसलिए वह अपोज करता है और अपनी बात मनवाना चाहता है.

2. अनुशासन में असंगति-

अगर आप अनुशासन और नियमों को लागू करने में कंसिस्टेंट नहीं रहते, तो यह बच्चों को भ्रमित कर सकता है. कभी किसी चीज के लिए अलाउ करना फिर अचानक उसी चीज के लिए मना करना बच्चों में कंफ्यूजन को बढ़ता है.

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3. इमोशन्स को इग्नोर करना-

जब बच्चा अपसेट होता है और हम सिर्फ उसे डांट कर उसके बिहेवियर को करेक्ट करने के लिए कहते हैं तो बच्चा फ्रस्टेट होता है.

4. एक्सेसिव स्क्रीन टाइम-

बहुत अधिक स्क्रीन टाइम बिताया यानी मोबाइल, टीवी या लैपटॉप पर बहुत अधिक समय बिताने से बच्चे एक काल्पनिक दुनिया में रहने लगते हैं. इसकी वजह से उन्हें अपनी असल जिंदगी बोरिंग और स्लो लगने लगती है.

अच्छी पैरेंटिंग के लिए टिप्स- (Tips for good parenting)

  • अपने बच्चे को समझना बहुत जरूरी है. डीप कन्वर्सेशन करें, उसकी दुनिया को समझें और उसके मुताबिक समाधान ढूंढें.
  • उनके इमोशन्स को समझने की कोशिश करें. अगर वह किसी चीज से अपसेट हैं तो उसे डांटने की बजाय उसे समझने की कोशिश करें और उसकी मदद करें.
  • माता-पिता का काम केवल बच्चों को हर दिन स्कूल भेजना और उनके डेली रूटीन के काम करना नहीं बल्कि उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ना भी है. उन्हें इमोशनल सपोर्ट दें और उनके इमोशन्स को समझें.
  • किसी भी चीज के लिए मना करने के लिए आपको उसकी वजह समझानी होगी कि आप किसी भी चीज को करने से उसे मना क्यों कर रहे हैं, और वो क्यों गलत है.

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