कई लोगों के दिन की शुरुआत चाय या कॉफी की एक गर्म चुस्की से होती है. चाय का स्वाद, उसकी खुशबू और आराम से कप पकड़कर पीने का मजा ही कुछ और है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में चाय या कॉफी कैसे पीते होंगे? धरती पर तो कप में चाय पीना बिल्कुल नॉर्मल बात है, लेकिन अंतरिक्ष में यही काम काफी दिलचस्प और मुश्किल हो सकता है.
अंतरिक्ष में क्या होती है परेशानी?
अंतरिक्ष में 'माइक्रोग्रेविटी' होती है, जिसका मतलब है कि वहां पानी, चाय या कॉफी जैसे तरल पदार्थ कप में टिके नहीं रहते. वे छोटी-छोटी गोल बूंदों में बदलकर हवा में तैरने लगते हैं.
ऐसे में अगर कोई अंतरिक्ष यात्री सामान्य कप में चाय डालने की कोशिश करे, तो चाय कप में रहने के बजाय इधर-उधर उड़ने लगेगी, जिससे न सिर्फ पीना मुश्किल हो सकता है, बल्कि अंतरिक्ष यान के उपकरणों को भी नुकसान पहुंच सकता है.
इस समस्या का क्या समाधान है?
इसी समस्या का समाधान ढूंढने के लिए NASA और वैज्ञानिकों ने एक खास कप तैयार किया, जिसे "कैपिलरी बेवरेज कप" या "स्पेस कप" कहा जाता है. यह दिखने में नॉर्मल कप जैसा लग सकता है, लेकिन इसका डिजाइन बिल्कुल अलग है. इस कप को इस तरह बनाया गया है कि माइक्रोग्रेविटी न होने पर भी चाय या कॉफी खुद-ब-खुद पीने वाले के मुंह तक पहुंच सके.
कैसे काम करता है यह स्पेस कप?
इस कप का आकार सामान्य कप से अलग होता है. इसके किनारों पर एक खास तरह का नुकीला चैनल बना होता है. जब कप में कोई तरल पदार्थ डाला जाता है, तो वह सतह तनाव और कैपिलरी एक्शन की मदद से धीरे-धीरे कप के किनारे की ओर बढ़ता रहता है.
जैसे ही अंतरिक्ष यात्री अपने होंठ कप के किनारे पर लगाते हैं, तरल पदार्थ आसानी से उनके मुंह तक पहुंच जाता है, जिससे उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे वे धरती पर किसी सामान्य कप से चाय या कॉफी पी रहे हों.
स्वाद के साथ खुशबू का भी मजा
स्पेस कप की सबसे खास बात यही है कि इससे खुले कप की तरह कॉफी पी जा सकती है, यानी अंतरिक्ष यात्री अब कॉफी के स्वाद के साथ उसकी महक का भी आनंद ले सकते हैं.
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