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This Article is From Mar 04, 2026

Holi 2026: हिमाचल प्रदेश में 800 साल से खेली जा रही है नाटी होली, एक बार खेल ली, तो भूल जाएंगे ब्रज, वृंदावन और मथुरा का रंगोत्सव

Holi 2026: भारत में जगह-जगह पर कई तरह से होली मनाई जाती है, लेकिन एक बार किन्नौर में होली का जश्न देख लिया तो जिदंगी भर नहीं भूलेंगे.

Holi 2026: हिमाचल प्रदेश में 800 साल से खेली जा रही है नाटी होली, एक बार खेल ली, तो भूल जाएंगे ब्रज, वृंदावन और मथुरा का रंगोत्सव

Holi 2026:  रंगों का त्योहार होली सबसे मनोरंजक त्योहार है. आगामी 4 मार्च को पूरे देश में होली का त्योहार मनाया जाएगा, लेकिन इसकी तैयारी बीते एक हफ्ते पहले ही शुरू हो चुकी है, जो होली के एक हफ्ते बाद तक चलने वाली है. देश के कई हिस्सों में जैसे ब्रज, वृंदावन, मथुरा की होली को सबसे शानदार बताया है, और यहां लड्डू मार, लठमार, छड़ी मार, फूलों की होली, विधवा की होली, रंगभरी होली और हरूंगा होली खेली जाती है. पश्चिम बंगाल में ढोल जथरा और ढोल पूर्णिमा होली खेली जाती है.

मणिपुर में याओसंग, केरल में मंजल कुली,पंजाब में होला मौहल्ला, उत्तराखंड में बैतंकी होली, राजस्थान में रॉयल फैमिली की रॉयल होली और बनारस में मसान होली खेली जाती है. इन सबके अलावा हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में इतना शानदार होली सेलिब्रेशन होता है कि अब सब जगह की होली भूल जाएंगे.

कन्नौर में कैसे मनाते हैं होली?

किन्नौर में संगला वैली का जश्न पहले ही शुरू हो चुका है, जो सोशल मीडिया ट्रेंड कर रहा है. एक सोलो ट्रेवलर ने संगला होली के बारे में बताया है. उन्होंने लिखा है, 'इस साल सांगला में होली मनाने जा रहा हूं, जहां सिर्फ रंगों से लोगों के गाल नहीं बल्कि पहाड़, पर्वत, नदियां और आसमान सब होली के रंग में रंगें नजर आते हैं. कोई शोर शराबा नहीं, कोई डीजे का शोर नहीं. बस स्थानीय परंपरा, चेहरे पर स्माइल, फॉक म्यूजिक से होली को मनाया जाता है'. बता दें, शिमला जिला और लाहौल-स्पीति तक होली का जश्न होता है.

 जश्न बेरी नाग मंदिर से शुरू होता है, जिसमें लोग शिव और विष्णु की पूजा करते हैं. महिलाओं के हाथ में हंसिया और दूसरे में शीशा लेकर चलती हैं, जो कि शक्ति और आत्म जागरूकता का प्रतीक है. उन्होंने आगे बताया, 'मंदिर से पूरा गांव बर्फ से ढकी चोटियों से घिरे सेंटर की ओर बढ़ता है. यहां, फेमस किन्नौरी नाटी डांस (Naati) का आयोजन होता है'.

800 साल पुरानी परंपरा

गौरतलब है कि नाटी हिमाचल प्रदेश का एक पारंपरिक लोक नृत्य है, जो मंडी, कुल्लू, किन्नौर, चंबा और शिमला में काफी फेमस है. यहां लोग अपने घुटनों को मोड़कर ढोल-दमाऊ इंस्ट्रूमेंट की थाप पर धीरे-धीरे कदम रखते हैं. इसके बाद यह जश्न बेरी नाग मंदिर में होलिका दहन के साथ खत्म होता है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है. स्थानीय लोग इसे फागली या फागुली कहते हैं.

माना जाता है कि यह त्योहार 800 साल पुराना है, जो हिमालयी क्षेत्र में आज भी मनाई जाने वाली सबसे पुरानी परंपराओं में से एक है. सांगला क्षेत्र में होली का त्योहार हिंदू और बौद्ध का मिश्रण माना जाता है, जो सर्दियों के अंत और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है.

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