गणेश चतुर्थी का त्योहार भगवान गणेश को समर्पित सबसे खास पर्वों में से एक है. इस दिन भक्त पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ अपने घरों और पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना करते हैं. मान्यता है कि भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं और उनकी पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं. इस साल गणेश चतुर्थी की शुरुआत 14 सितंबर से हो रही है और इस पावन अवसर पर भारत के कई शहरों में भव्य पंडाल सजाए जाते हैं. यहां जानिए भारत के 5 सबसे मशहूर गणपति पंडाल के बारे में, जहां आपको जरूर जाना चाहिए.
लालबागचा राजा, मुंबई
लालबागचा राजा भारत के सबसे प्रसिद्ध गणेश पंडालों में से एक है. इसे 'मन्नतों का राजा' भी कहा जाता है. हर साल यहां लाखों भक्त बप्पा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इसकी शुरुआत वर्ष 1934 में लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल द्वारा की गई थी. यह पंडाल अपनी भव्यता, लंबे इतिहास और भक्तों की अटूट आस्था के लिए जाना जाता है. गणेश उत्सव के दौरान यह मुंबई के सबसे बड़े आकर्षणों में शामिल रहता है.
श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति, पुणे
श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति भारत के सबसे पुराने और लोकप्रिय गणेश पंडालों में से एक है. हर साल यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु बप्पा के दर्शन के लिए आते हैं. इस पंडाल में भक्ति, संस्कृति और शानदार सजावट का सुंदर मेल देखने को मिलेगा.
दिल्ली का महाराजा, दिल्ली
दिल्ली में भी गणेश चतुर्थी का उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है और यहां कई प्रसिद्ध गणेश पंडाल सजाए जाते हैं. दिल्ली के लक्ष्मी नगर में स्थित दिल्ली का महाराजा गणेश पंडाल भी काफी मशहूर है. हर साल यहां हजारों भक्त बप्पा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
चेन्नई में इंदु मुनानी का गणेश चतुर्थी पंडाल
यह चेन्नई में आयोजित किया जाने वाला गणेश चतुर्थी पंडाल अपनी अनूठी और रचनात्मक थीम के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है. अक्सर लोग इसे बोलचाल में "इंदु मुन्नी" कह देते हैं, जो कि वास्तव में तमिलनाडु का प्रमुख संगठन 'हिंदू मुन्नानी' ही है. पिछले साल यहां भक्ति और नई सोच का एक अनोखा संगम देखने को मिला था. यहां 5,000 किताबों से बनी गणेश जी की मूर्ति थी, जिनमें से 2,000 किताबें तमिल भाषा में थी. त्योहार खत्म होने के बाद, ये किताबें स्थानीय लोगों में बांट दी गई थी.
खैरताबाद गणेश उत्सव, हैदराबाद
हैदराबाद के खैरताबाद का गणेश उत्सव अपनी विशाल और भव्य प्रतिमाओं के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. इस परंपरा की शुरुआत साल 1954 में स्वतंत्रता सेनानी एस. शंकरैया ने एक छोटे से एक-फुट की प्रतिमा के साथ की थी. यहां हर साल भगवान गणेश की बेहद ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाती है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लाखों भक्त आते हैं.
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