प्लास्टिक की खाली बोतलें आमतौर पर कचरे में चली जाती हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन्हीं बोतलों से घर की दीवारें बनाई जा सकती हैं. जर्मन बिल्डर एंड्रियास फ्रोइस ने प्लास्टिक की बोतलों को निर्माण सामग्री की तरह इस्तेमाल करने की तकनीक विकसित की है. इस तरीके में बोतलों को सूखी रेत से भरकर इतना मजबूत किया जाता है कि वे ईंट की तरह इस्तेमाल हो सकें. इस तकनीक को लेकर दावा है कि इससे निर्माण लागत और प्लास्टिक कचरे, दोनों को कम करने में मदद मिल सकती है.
ऐसे आया प्लास्टिक की बोतलों से घर बनाने का आइडिया
एंड्रियास फ्रोइस के अनुसार, कार्यक्रमों के बाद बड़ी संख्या में फेंकी जाने वाली प्लास्टिक की बोतलों को देखा. उन्हें लगा कि अगर इस कचरे को निर्माण के काम में लगाया जाए तो पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकता है. इसके बाद उन्होंने बोतलों को दोबारा इस्तेमाल करने की तकनीक पर काम शुरू किया.

Photo Credit: https://www.eco-tecnologia.com/projects
रेत भरकर बोतल को बनाया मजबूत
इस तकनीक में प्लास्टिक की बोतलों को सूखी रेत से पूरी तरह भरकर दबाया जाता है. रेत भरने के बाद बोतल का लचीलापन काफी कम हो जाता है और वह एक मजबूत निर्माण इकाई की तरह इस्तेमाल की जा सकती है. इसके बााद ऐसी बोतलों को तय क्रम में रखकर नायलॉन की रस्सियों से बांधा जाता है.
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सीमेंट के गारे से तैयार होती है दीवार
बोतलों की इस संरचना को मजबूती देने के लिए सीमेंट और रेत के गारे का इस्तेमाल किया जाता है. यानी बोतलें अकेले घर नहीं बनातीं, बल्कि उन्हें दूसरे निर्माण सामग्रियों के साथ मिलाकर इस्तेमाल कियाा जाता है. इस तरीके से दीवार और दूसरी संरचनाएं तैयाार की जाती हैं.

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घर के अलावा टैंक और टॉयलेट में भी इस्तेमाल
जानकारी के अनुसार, इस तकनीक का इस्तेमाल केवल घर बनाने तक सीमित नहीं है. इससे पानी के टैंक, कैंपिंग इग्लू और कंपोस्टिंग टॉयलेट जैसी चीजें भी तैयाार की गई हैं. पानी के टैंक की क्षमता 3,500 लीटर तक बताई गई है.
कितनी बच सकती है निर्माण लागत

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इस तकनीक को लेकर दावा किया जाता है कि पारंपरिक ईंट और सीमेंट से बने निर्माण की तुलना में लागत करीब 50 प्रतिशत तक कम हो सकती है. वास्तविक खर्च स्थानीय सामग्री, डिजाइन, मजदूरी और निर्माण मानकों पर निर्भर करेगा. इसी तरह किसी संरचना की मजबूती और उम्र भी उसके डिजाइन और निर्माण गुणवत्ता पर निर्भर करती है. इसलिए ऐसी तकनीक अपनााने से पहले स्थानीय इंजीनियर और भवन विशेषज्ञ की सलााह लेना जरूरी है.
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