विज्ञापन

Sex Worker ki Diary: मैं 13 साल की उम्र से सेक्स वर्कर, बेटी को इस बारे में नहीं पता, उसे अपने जैसा बनाऊंगी!

Sex Worker's Diary : इन सालों में मैंने खूब पैसे जोड़े. अपने घर गई, उनका पक्का मकान बनवाया, उन्हें पैसे दिए. लेकिन उनकी बेटी होने के बावजूद वहां मुझे कभी सम्मान नहीं मिला. मैं सिर्फ एक पैसे देने वाली लड़की थी उनके लिए.

Sex Worker ki Diary: मैं 13 साल की उम्र से सेक्स वर्कर, बेटी को इस बारे में नहीं पता, उसे अपने जैसा बनाऊंगी!
बचपन में सेक्स वर्क में धकेली गई लड़की की सच्ची कहानी.

Sex Worker's Diary : मेरा नाम रीना (बदला हुआ नाम) है. उम्र आपके घर की बालकनी में लगे मनी प्लांट जितनी. मतलब रोज मरती हूं, टूट कर सड़क पर गिर जाती हूं, लेकिन रोज कोई राहगीर मुझे उठाकर कुछ देर के लिए पानी के गिलास में रख देता है और मैं खिल उठती हूं जरा सी धूप और पानी पाकर.

मैं मध्य प्रदेश के एक ऐसे समुदाय से हूं जहां अपनी बेटियों को धंधे के लिए बेच दिया जाता है. पर ध्यान रहे उनकी मर्जी से. यानी पहले मुझसे पूछा गया था कि क्या मैं धंधा करना चाहती हूं या फिर नहीं.

असल में मेरे सामने बस दो ही ऑप्शन थे. पहला धंधा और दूसरा शादी. मुझे याद है मेरी एक गुड़िया थी जिसकी मैं शादी कराना चाहती थी, लेकिन मेरे पास पैसे नहीं थे. मैं बाबा के पास गई थी और मैंने पूछा था कि बाबा लड़का ढूंढो मुझे इसकी शादी करनी है. पीछे से मां ने कहा था - ''क्यों इस बेचारी से भी टब्बर जनवाएगी, बच्चों की टट्टी और कपड़े धुलवाएगी. अरी बावली क्यों इसकी भी जिंदगी तबाह करने को लगी है."

बाबा हंस दिए और बोले - "अब ब्याह के बाद बच्चे न जनेगी, घर का झाड़ू टटका न करेगी तो और क्या बाहर जाकर धंधा करेगी, पैसे कमाएगी, रोज नए खिलौने, कपड़े लेगी और हमेशा मजे करेगी."

Latest and Breaking News on NDTV

मां और बाबा तिरछी नजर से मुझे देख रहे थे और दबे-दबे से हंस रहे थे. खैर, उस समय मुझे समझ नहीं आया कि वो क्यों हंस रहे थे. उनके हंसी के पीछे के नीच इरादों को समझने में मुझे 3 साल लगे. जो समझ आया वो ये कि शादी में काम करना पड़ता है और अगर धंधा करो तो नए कपड़े, पैसे, बाजार की सैर और मनमर्जी करने को मिलती है.

Also Read: एक रात और 70 मर्द! मैं एक सेक्स वर्कर हूं और ये मेरी कहानी है... दिल्ली के मशहूर रेड लाइट एरिया से रूह कंपा देने वाली एक आपबीती

ये बात थी जब मैं यही कोई 12 साल की थी. मेरे अगले ही जन्मदिन पर बाबा ने मेरी जिंदगी की दिशा तय करने वाला सवाल मुझसे पूछ लिया. बोले - "अरे मेरा राजा बेटा, बता क्या करेगा जीवन में. तेरे लिए कोई राजा दूल्हा ढूंढ लाऊं क्या. क्या तू तो मेरा शेर है और तू धंधा करेगा."

मैंने देखा था, वो तिरछी नजर और तिरछी मुस्कान से मां की ओर देख रहे थे. मुझे पता था कि मुझे क्या चाहिए. मैंने तपाक से बोल दिया -

''धंधा''

अगली ही सुबह विदेश (मुंबई, हमारे गांव में आज भी इसे व‍िदेश ही बोला जाता है.) में काम करने वाली एक मुंहबोली बुआ के साथ मुंबई भेज दिया गया. बुआ के साथ दो-तीन दिन तक उनके कमरे में रही, रोज नए कपड़े पहने, बाहर का खाना भी खाया और कोई घर का काम भी नहीं किया और सच कहूं बड़ा मजा आया. कुछ दिनों में बुआ ने मुझे यह भी बता दिया कि काम क्या है. पहली बार धंधा किया, सब बड़े खुश थे वहां, मुझे शगुन के पैसे भी मिले, पहले क्लाइंट को डील किया, दूसरे को किया, तीसरे को किया, और ऐसे ही 6 क्लाइंट मैंने पहले दिन में लिए.

पहले तो समझ नहीं आया, बहुत दर्द भी हुआ, कई दिन तक पेट खराब रहा. लेकिन एक महीने के अंदर समझ आ गया कि क्या करना है. फिर क्या, जैसा बाबा ने कहा था, मजे ही मजे. रोज पैसे कमा रही थी मैं, मेरे पास इतने पैसे इससे पहले नहीं थे. लेकिन दिक्कत तब हुई जब मैं पकड़ी गई.

Latest and Breaking News on NDTV

मुझे नहीं पता था कि जो काम मैं करती हूं वो बुरा है. बुआ ने जैसा बताया मैंने वैसा किया और पैसा कमाया. बुआ ने ये भी बताया कि किसी को भी यह नहीं बताना कि मैं क्या करती हूं. पर जानें कैसे एक पुलिस वाले ने मुझे पकड़ लिया.

पूरी रात जेल में थी मैं. फिर बुआ ने मुझे दिल्ली के जीबी रोड भेज दिया. क्योंकि वहां मेरा काम कर पाना मुश्किल था. यहां आकर मेरा सच से सामना हुआ. भेड़ियों जैसे मांस नोंचने वाले लोग, सारे पैसे अपने अंटे में डालने वाली कोठे की मालकिन और सिर से टकराती छत, बांस मारते सीलन से भरे कमरे.

यहां रहने का तरीका ही अलग था. जो पैसा मिलता वो मेरे कोठे की मालकिन को मिलता था. उसमें से वह कमरे का किराया काटती, रोटी बट्टा का काटकर मेरे हाथ में हर महीने कुछ पैसे दे देती. इसी को जोड़ रही थी. यहां जिंदगी के वो मजे नहीं थे जो मुंबई में थे.

Latest and Breaking News on NDTV

जैसे तैसे मैं यहां समय काट रही थी कि एक दिन पता चला कि मैं पेट से हूं और मेरे पेट में 5 महीने का बच्चा है. इसकी सफाई नहीं हो सकती थी. मैं यही कोई 16 साल की रही होऊंगी. मालकिन ने गालियां दीं और कहा कि मैं धंधा करूं या न करूं कमरे का किराया तो देना होगा. मुझे लगा जब 5 महीने पता नहीं चला तो ऐसे ही करती हूं और धंधा करती रहती हूं.

मुझे अंदाजा भी नहीं था. निकले हुए पेट के साथ कुछ तो क्लाइंट और खुशी-खुशी आए. वो मेरे बारे में पूछते हुए आते थे. और अगर बीच में मैं चिल्ला देती तो बेहद खुश होते थे. मैं भी बहुत शाणी हूं. मैं भांप गई कि मुझे कैसे क्या करना है. आप यकीन नहीं करेंगे मैंने पूरे 9वें महीने तक धंधा किया. मेरी बेटी कोठे पर ही हो गई. दो महीने बाद मैं फिर धंधे पर थी.

Latest and Breaking News on NDTV

एक बार मुझसे कोठे की मालकिन ने पूछा था बेटी को कैसा बनाओगी. मैंने कहा था ठीक अपने जैसा. वो लौट गई ये सोचकर कि एक और लड़की उसे मिलेगी कुछ ही सालों में.

जब तक मेरी बेटी छोटी थी, मैंने खूब पैसे छापे. मैं मानती हूं कि मेरा धंधा ही मेरा पेट भर रहा है और मैं उसे गंदा नहीं कहूंगी. लेकिन जब यह 3 साल की हुई तो दिक्कत होने लगी. कोठे पर आने वाले लोग इस पर नजर रखने लगे. मैं उसे बाहर के कमरे में चेन से बांध देती थी ताकि वह उधर न आ सके जहां ग्राहक आते हैं.

इन सालों में मैंने खूब पैसे जोड़े. अपने घर गई, उनका पक्का मकान बनवाया, उन्हें पैसे दिए. लेकिन उनकी बेटी होने के बावजूद वहां मुझे कभी सम्मान नहीं मिला. मैं सिर्फ एक पैसे देने वाली लड़की थी उनके लिए.

अपने पैसों से मैंने बेटी को हॉस्टल में पढ़ाया और कोठे से दूर रखा. आज मेरी बेटी सरकारी पेपर की तैयारी कर रही है. वह बहुत कुछ जानती है, अंग्रेजी में बात करती है. मैंने उसे कभी नहीं बताया कि मैं क्या काम करती हूं. आज मैं एक एनजीओ से जुड़ी हूं और महिलाओं के हित में काम कर रही हूं. यहां भी कमाई है, लेकिन उतनी नहीं.

हां, मैं अपनी बेटी को अपने जैसा बनाना चाहती हूं. लेकिन धंधे वाली नहीं, एक ऐसी महिला, जिसने हर हालात में हार नहीं मानी, अपने लिए और अपने परिवार के लिए हमेशा निस्वार्थ खड़ी रही. मानती हूं कि मेरे अपनों ने पैसे के लालच में मुझे बचपन में गलत धंधे में धकेला, लेकिन मेरे पास वही एक रास्ता था. उसी रास्ते पर चलते हुए मैंने जीवन की कठिनाइयों को मजे-मजे में काटा. मैं चाहती हूं मेरी बेटी भी ऐसी बने. बात-बात पर घबराकर रोने के बजाय, जिन हालात में वह है उन्हें पूरी तरह जीते हुए सही रास्ते को चुने, कभी मुश्किल समय से घबराए नहीं और सभ्य समाज का हिस्सा बने.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com