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तनाव और अकेलेपन से परेशान? दिनभर रहता है तनाव, गुरुदेव के बताए 5 आसान तरीकों से मिलेगा सुकून

तनाव, एंग्जायटी, अकेलापन और रिश्तों की उलझनों से कैसे बाहर निकला जाए? गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने बताया कि मन को शांत रखने, भरोसे को मजबूत बनाने और ध्यान की आदत अपनाने से जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है.

तनाव और अकेलेपन से परेशान? दिनभर रहता है तनाव, गुरुदेव  के बताए 5 आसान तरीकों से मिलेगा सुकून

Life Lessons by Sri Sri Ravi Shankar: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शायद ही कोई ऐसा हो जो किसी न किसी तरह के तनाव से दूर हो. कोई एंग्जायटी से परेशान है, कोई अकेलेपन से जूझ रहा है, तो किसी के रिश्ते मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. ऐसे समय में ज्यादातर लोग अपनी समस्याओं का हल बाहर ढूंढते हैं. लेकिन गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का मानना है कि असली बदलाव की शुरुआत अपने मन को समझने से होती है.

एक खास बातचीत में उन्होंने एंग्जायटी, रिश्तों, गुस्से, अकेलेपन और ध्यान जैसी बातों पर अपने विचार साझा किए और बताया कि छोटी-छोटी आदतें भी जीवन को बेहतर बना सकती हैं.

क्यों बढ़ रही है एंग्जायटी

गुरुदेव के मुताबिक आज लोगों के पास पहले से ज्यादा सुविधाएं हैं, लेकिन मन पहले से ज्यादा बेचैन है. उनका कहना है कि सिर्फ हालात बदलने से तनाव खत्म नहीं होता. योग, प्राणायाम और ध्यान जैसी आदतें मन को शांत रखने में मदद कर सकती हैं.

जब मन शांत रहता है, तब मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना भी आसान हो जाता है.

अकेलेपन से बाहर निकलने का तरीका

उन्होंने कहा कि अच्छी नौकरी, पैसा और परिवार होने के बाद भी कई लोग भीतर से खालीपन महसूस करते हैं. उनके मुताबिक इसकी एक वजह सिर्फ अपनी परेशानियों में उलझे रहना है.

अगर इंसान दूसरों की मदद करने और समाज के लिए कुछ करने की सोच रखे, तो अकेलापन और बेचैनी काफी कम हो सकती है.

रिश्ते क्यों कमजोर पड़ने लगते हैं

गुरुदेव ने रिश्तों में भरोसे, ईमानदारी और बराबरी को सबसे जरूरी बताया. उनका कहना है कि अगर कोई अपने लिए ज्यादा आजादी चाहता है, लेकिन अपने साथी के लिए वही बात स्वीकार नहीं कर सकता, तो यही दोहरा रवैया रिश्तों में दरार पैदा करता है.

मजबूत रिश्ता जिम्मेदारी और भरोसे की नींव पर ही टिकता है.

गुस्से और ब्रेकअप पर क्या बोले गुरुदेव

गुरुदेव के मुताबिक गुस्सा अक्सर जरूरत से ज्यादा उम्मीदें रखने की वजह से आता है. जब चीजें मन के मुताबिक नहीं होतीं, तो नाराजगी बढ़ने लगती है. वहीं रिश्तों में भरोसा और जिम्मेदारी कमजोर पड़ने पर ब्रेकअप जैसी स्थिति बन सकती है.

उनका मानना है कि लोगों की कमियों को स्वीकार करना भी रिश्तों को मजबूत बनाता है.

ध्यान क्यों है जरूरी

उन्होंने कहा कि ध्यान सिर्फ आंखें बंद करके बैठने का नाम नहीं है, बल्कि इसे सही तरीके से सीखना जरूरी है. नियमित ध्यान करने से मन शांत रहता है और सोचने-समझने की क्षमता बेहतर होती है.

गुरुदेव का मानना है कि जिंदगी के कई जवाब बाहर नहीं, बल्कि अपने भीतर मिलते हैं.

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