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आयुर्वेद में बच्चों की मालिश को क्यों माना जाता है जरूरी? जानें, जन्म के कितने दिनों बाद शुरू करें बच्चे की मालिश

Benefits of Oil Massaging To Baby: जन्म के बाद बच्चे की देखभाल में कई चीज़ें जरूरी मानी जाती हैं. इन्हीं में से एक है रोज़ाना बच्चे की तेल से मालिश करना. भारतीय परंपरा और आयुर्वेद दोनों में इसे बेहद फायदेमंद माना गया है.

आयुर्वेद में बच्चों की मालिश को क्यों माना जाता है जरूरी? जानें, जन्म के कितने दिनों बाद शुरू करें बच्चे की मालिश
Benefits of Oil Massaging To Baby
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Benefits of Oil Massaging To Baby: जन्म के बाद बच्चे की देखभाल में कई चीज़ें जरूरी मानी जाती हैं. इन्हीं में से एक है रोज़ाना बच्चे की तेल से मालिश करना.भारतीय परंपरा और आयुर्वेद (Ayurveda) दोनों में इसे बेहद फायदेमंद माना गया है. माना जाता है कि सही तरीके से की गई मालिश (Maalish) बच्चे के शरीर को मजबूती देती है, उसकी त्वचा (Skin) को पोषण पहुंचाती है और उसे आराम भी देती है. साथ ही यह बच्चे और माता-पिता के बीच भावनात्मक जुड़ाव (Emotional Connection) को भी मजबूत बनाती है.

शरीर के विकास में मिलती है मदद

आयुर्वेद में अभ्यंग यानी तेल मालिश को शरीर के संतुलन के लिए जरूरी बताया गया है. छोटे बच्चों में यह उनके शारीरिक विकास (Physical Development) को सपोर्ट करता है. हल्के हाथों से की गई मालिश से शरीर लचीला बनता है और मांसपेशियों (Muscles) को ताकत (strength) मिलती है.

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हड्डियां और मसल्स बनते हैं मजबूत

नियमित मालिश से ब्लड सर्कुलेशन (Blood Circulation) बेहतर होता है. इससे शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पोषण (Nutrition) सही तरीके से पहुंचता है. यही वजह है कि मालिश बच्चों की हड्डियों (Bones) और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करती है. तिल का तेल (Sesame Seeds Oil), नारियल तेल (Coconut Oil) और सरसों का तेल (Mustard Oil) आमतौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं.

बेहतर नींद में मिलती है मदद

मालिश का एक बड़ा फायदा यह है कि इससे बच्चे को अच्छी नींद (Good Sleep) आती है. मालिश के बाद शरीर रिलैक्स (Relax) होता है और बच्चा जल्दी सो जाता है. अच्छी नींद दिमाग (Brain) के विकास के लिए बहुत जरूरी मानी जाती है. इससे बच्चा ज्यादा एक्टिव (Active) और खुश रहता है.

पाचन को मिल सकता है फायदा

छोटे बच्चों का पाचन तंत्र (Digestive System) पूरी तरह विकसित नहीं होता है. ऐसे में हल्की मालिश पेट को आराम देती है. इससे गैस (Gas), पेट दर्द (Stomach Pain) और कब्ज (Indigestion) जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है. नियमित मालिश से बच्चे की इम्युनिटी (immunity) भी बेहतर हो सकती है.

कब से शुरू करें मालिश?

अक्सर नए माता-पिता यह जानना चाहते हैं कि मालिश कब से शुरू करें. विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के तुरंत बाद मालिश करने से बचना चाहिए. लगभग 2 से 3 हफ्ते बाद या जब बच्चा 1 महीने का हो जाए, तब धीरे-धीरे मालिश शुरू की जा सकती है.

मालिश करते समय इन बातों का रखें ध्यान

मालिश हमेशा हल्के हाथों से करनी चाहिए. बच्चे की त्वचा बहुत नाजुक होती है, इसलिए ज्यादा दबाव नुकसान पहुंचा सकता है. मौसम के अनुसार तेल का चुनाव करें. सर्दियों में तिल या सरसों का तेल और गर्मियों में नारियल तेल बेहतर रहता है. मालिश के बाद गुनगुने पानी से नहलाना अच्छा माना जाता है. अगर बच्चे को किसी तरह की एलर्जी या दिक्कत दिखे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.

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