गांव-देहात में जंगली जानवरों को कई बार स्थानीय नामों से पुकारा जाता है. कुछ इलाकों में लोग लकड़बग्घे को भी बघेरा कह देते हैं, जबकि अलग-अलग क्षेत्रों में इन नामों का इस्तेमाल अलग अर्थों में होता है. यही वजह है कि किसी जंगली जानवर के घर, खेत या गांव के पास दिखाई देने पर उसकी पहचान करने या उसे खुद भगाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. अगर बघेरा या लकड़बग्घा गांव के आसपास नजर आए तो सबसे पहले बच्चों और पालतू जानवरों को सुरक्षित जगह पर रखें और खुद भी घर के अंदर रहें. जानवर के पास जाने, शोर मचाने या भीड़ लगाने के बजाय वन विभाग को सूचना देना सबसे सुरक्षित तरीका है.
घर के पास दिखे तो बाहर निकलने की गलती न करें
एक्सपर्ट के अनुसार, अगर कोई लकड़बग्घा या दूसरा जंगली जानवर गांव में आ जाए तो बच्चों और पालतू जानवरों को तुरंत घर के अंदर सुरक्षित कर लें. दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें और जानवर के पास जाकर फोटो या वीडियो बनाने की कोशिश न करें. वन्यजीव विभाग की सलाह भी यही है कि जंगली जानवर से सीधा संपर्क न किया जाए और जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम से मदद ली जाए. जानवर को घेरना, पत्थर मारना, डंडे से दौड़ाना या उसके रास्ते में जाना खतरनाक हो सकता है. घर से खुद उसे भगााने के लिए कोई घरेलू नुस्खा आजमाने के बजाय उसे निकलने का रास्ता देना और सुरक्षित दूरी बनाए रखना बेहतर है. रेस्क्यू और वन्यजीव प्रबंधन का काम प्रशिक्षित टीमों को ही करना चाहिए.


अचानक आमना-सामना हो जाए तो क्या करें?
अगर खेत या रास्ते में अचानक सामना हो जाए तो घबराकर दौड़ने या जानवर के करीब जाने से बचें. शांत रहें, दूरी बनाए रखें और धीरे-धीरे सुरक्षित दिशा में हटें. जानवर को घेरने या उसका रास्ताा रोकने की कोशिश बिल्कुल न करें.

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घर में बघेरा घुस आए तो क्या करें?
अगर बघेरा या लकड़बग्घा घर के अंदर घुस आए तो सबसे पहले घबराएं नहीं. बच्चों और बुजुर्गों को अपने पास लेकर किसी मजबूत कमरे में चले जाएं और दरवाजा अंदर से बंद कर लें. जानवर के पास जाकर उसे भगाने, घेरने या शोर मचाने की कोशिश बिल्कुल न करें. अचानक भागने या उसके रास्ते में आने से स्थिति बिगड़ सकती है. अगरर जानवर बेहद करीब आकर हमला करने की कोशिश करे और बचने का कोई दूसरा रास्ता न हो, तो लाल मिर्च पाउडर जैसी चीज को केवल अंतिम बचाव के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि कुछ पल के लिए जानवर का ध्यान भटके और आपको सुरक्षित जगह तक पहुंचने का मौका मिले. सबसे जरूरी है कि तुरंत स्थानीय वन विभाग या पुलिस को सूचनाा दें. जब तक रेस्क्यू टीम न पहुंचे, घर के लोगों को सुरक्षित कमरे में रखें और जानवर को बाहर निकालने की कोशिश खुद न करें.
दोबारा घर के पास आने से कैसे रोकें?
घर और खेत के आसपास खुले में मांस, पशुओं का चारा या खाने का कचरा न छोड़ें. पालतू जानवरों को रात में खुले में न बांधें और पशुओं के बाड़े को सुरक्षित रखें. अगर किसी इलाके में बार-बार जंगली जानवर दिखाई दे रहा है तो स्थानीय वन विभाग को सूचना दें. भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर रैपिड रिस्पॉन्स और समन्वित कार्रवाई की व्यवस्थाा पर जोर दिया गया है.
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