चिलचिलाती गर्मी और बढ़ते पारे ने सभी का जीना मुश्किल कर दिया है. देश के कई राज्यों में हल्की बारिश ने पारा घटाया है, तो कई जगह पर सूरज देवता आग बरसा रहे हैं. गर्मी और लू से बचने के लिए हम सभी घर से बाहर निकलना बंद कर देते हैं और कमरे में एसी चलाकर गर्मी से बचने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन कई बार इस भीषण गर्मी के चलते एसी भी कूलिंग करना बंद कर देती है और बिल को बढ़ा देती है. अगर आप भी बिल को आधा और कूलिंग को डबल करना चाहते हैं, तो इस एक बाल्टी वाले हैक को जरूर अपनाएं.
कई बार ऐसा होता है कि एसी लगातार चल रहा होता है, बिजली का बिल भी तेजी से बढ़ रहा होता है, लेकिन कमरे में वो ठंडी-ठंडी कूलिंग नहीं मिलती जिसकी हमें उम्मीद होती है. ऐसे में हम सोचने लगते हैं कि शायद एसी में कोई खराबी आ गई है या उसकी गैस कम हो गई है. लेकिन हर बार खराबी एसी के अंदर नहीं होती.
असली समस्या
असली समस्या आपके घर के बाहर धूप में तप रहे एसी के आउटडोर यूनिट (कंप्रेशर) में छिपी होती है. जी हां आपने बिल्कुल सही सुना. चिलचिलाती गर्मी में आपका आउटडोर यूनिट बाहर की गर्म हवा से जूझ रहा होता है. ऐसे में सिर्फ एक बाल्टी पानी आपके एसी की कूलिंग को एकदम से बढ़ा सकता है और आपके बिजली के बिल को भी कम कर सकता है.
भीषण गर्मी में क्यों जवाब दे जाता है एसी?
आपके घर के अंदर लगा एसी कमरे की गर्मी को सोखकर उसे बाहर लगे आउटडोर यूनिट (कंप्रेशर) के जरिए बाहर फेंकता है. अब सोचिए, जब बाहर का तापमान पहले से ही 44 डिग्री या उससे ज्यादा हो, तो आउटडोर यूनिट के लिए अंदर की गर्मी को बाहर फेंकना बहुत मुश्किल हो जाता है. सरल भाषा में कहें तो, कंडेंसर कॉइल्स बाहर की हवा के बीच का तापमान का अंतर बहुत कम हो जाता है. इस वजह से एसी को बहुत ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है. एसी खराब नहीं होता, वह बस मौसम की मार झेल रहा होता है.

कैसे एक बाल्टी पानी एसी को ठंडा रखने में मदद करता है? (Image ScienceDirect)
एक बाल्टी पानी कैसे करता है कमाल?
जब आप आउटडोर यूनिट की कंडेंसर कॉइल्स (जाली) पर पानी डालते हैं, तो वहां इवापोरेशन यानी वाष्पीकरण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. पानी जैसे ही गर्म कॉइल्स से छूता है, वह भाप बनकर उड़ने लगता है. ठीक वैसे ही जैसे जब हमें पसीना आता है और हवा लगने पर हमारा शरीर एकदम ठंडा हो जाता है.
पानी के उड़ने से कॉइल्स का तापमान बहुत तेजी से नीचे गिरता है. जैसे ही कॉइल्स ठंडी होती हैं, कंप्रेसर के अंदर मौजूद गैस (रेफ्रिजरेंट) अपनी गर्मी को आसानी से बाहर छोड़ पाती है. इससे कंप्रेसर पर लोड कम हो जाता है, वह आसानी से काम करने लगता है और आपके कमरे में ठंडी हवा आने लगती है.
किन बातों का रखें ध्यान-
यह तरीका दिल्ली, जयपुर, नागपुर और अहमदाबाद जैसे सूखे और गर्म इलाकों (Dry Heat) में सबसे बेहतरीन काम करता है.
मुंबई या चेन्नई जैसे समुद्री इलाकों में, जहां हवा में पहले से ही बहुत नमी (Humidity) होती है, वहां पानी उतनी जल्दी नहीं सूखता, इसलिए इसका फायदा थोड़ा कम मिलता है.
पानी डालते समय न करें ये गलतियां-
- पावर बंद करें- पानी डालने से पहले एसी को सिर्फ रिमोट से बंद न करें, बल्कि मेन स्विच या एमसीबी (MCB) से पूरी तरह बंद कर दें.
- हल्के हाथ से डालें पानी- पानी डालने के लिए बाल्टी या फिर गार्डन पाइप के शावर मोड का इस्तेमाल करें.
- प्रेशर वॉशर का इस्तेमाल न करें- कभी भी तेज प्रेशर वाले पाइप या जेट स्प्रे से पानी न मारें.
बिजली बिल कैसे बचेगा?
- जब एसी को कमरे को ठंडा करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, तो कंप्रेसर लगातार बिना रुके चलता रहता है.
- एक 1.5 टन का एसी अगर मई-जून की गर्मी में रोज 7 से 8 घंटे लगातार फुल लोड पर चलेगा, तो बिजली का बिल आसमान छूना तय है.
- जैसे ही आप पानी डालकर कंडेंसर कॉइल्स को ठंडा करते हैं, कंप्रेसर अपना कूलिंग टारगेट जल्दी पूरा कर लेता है.
- जब कमरा जल्दी ठंडा हो जाएगा, तो कंप्रेसर बार-बार कट-ऑफ (बंद) होगा.
- कंप्रेसर जितनी कम देर चलेगा, बिजली की खपत उतनी ही कम होगी.
- अगर आप गर्मियों में हर कुछ हफ्तों में एक बार अपने आउटडोर यूनिट की इस तरह सफाई कर देते हैं, तो कंप्रेसर का रनिंग टाइम 10 से 15 परसेंट तक कम हो सकता है.
Science Direct में छपी रिसर्च के मुताबिक, जब एसी के कंडेंसर पर पानी का छिड़काव (Evaporative Cooling) किया जाता है, तो इससे एसी की कूलिंग क्षमता काफी बढ़ जाती है और बिजली की खपत में भारी कमी आती है.
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