Wrinkles on Face: आप चाहे जितनी महंगी क्रीम लगा लें, चाहे रोजाना स्किन केयर रूटीन फॉलो करें, लेकिन सच यही है कि समय के साथ शरीर में कुछ बदलाव आना तय हैं. इन्हीं बदलावों का सबसे साफ और पहला संकेत हमारी त्वचा पर दिखने वाली झुर्रियां हैं. चेहरे की बारीक रेखाएं, आंखों के पास उभरती लकीरें या हंसते समय बनने वाली सिलवटें ये सब न सिर्फ बढ़ती उम्र की पहचान हैं, बल्कि हमारे जीवन के अनुभवों की छाप भी हैं. हर मुस्कान, हर चिंता और हर भाव चेहरे पर अपनी कहानी लिख जाता है.
आज के दौर में झुर्रियों को लेकर लोग चिंतित रहते हैं, लेकिन यह समझना जरूरी है कि झुर्रियां कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया हैं. जैसे बालों का सफेद होना या शरीर की ताकत में बदलाव आना, वैसे ही झुर्रियों का आना भी उम्र के साथ जुड़ा हुआ है.
आखिर झुर्रियां होती क्या हैं? | What Exactly Are Wrinkles?
जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, त्वचा पर पड़ने वाली सिलवटों या रेखाओं को झुर्रियां कहा जाता है. ये देखने में हमारी हथेलियों की लकीरों जैसी लग सकती हैं. सुनने में भले अच्छा न लगे, लेकिन झुर्रियां होना उम्र बढ़ने की एक बिल्कुल सामान्य और प्राकृतिक निशानी है.

झुर्रियों को कम करने के उपाय
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क्या झुर्रियां अलग-अलग तरह की होती हैं?
हां, झुर्रियां कई तरह की होती हैं. किसी के चेहरे पर हल्की बारीक रेखाएं दिखती हैं, तो किसी के आंखों या होंठों के आसपास गहरी लकीरें. ये आमतौर पर चेहरे, गर्दन और हाथों पर ज्यादा दिखाई देती हैं, लेकिन शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकती हैं.
चेहरे पर होने वाली 7 प्रकार की झुर्रियां | 7 Main Types of Wrinkles That Appear on the Face
माथे की रेखाएं (Forehead lines): माथे पर पड़ने वाली आड़ी लकीरें, जो भौंहें ऊपर उठाने पर साफ दिखती हैं.
फ्राउन लाइन्स (Frown lines): भौंहों के बीच बनने वाली 11 जैसी रेखाएं, जो बार-बार तनाव या गुस्से से गहरी होती जाती हैं.
बनी लाइन्स (Bunny lines): हंसते समय नाक के ऊपरी हिस्से पर बनने वाली बारीक रेखाएं.
क्रोज फीट (Crow's Feet): आंखों के बाहरी कोनों पर कौवे के पंजे जैसी रेखाएं, जिन्हें स्माइल लाइन्स भी कहते हैं.
लाफ्टर लाइन्स (Laughter lines): नाक से मुंह के कोनों तक जाने वाली रेखाएं, जो उम्र और धूप से गहरी होती हैं.
लिप लाइन्स (Lip lines): होंठों पर और ऊपर बनने वाली खड़ी महीन रेखाएं.
मैरियोनेट लाइन्स (Marionette lines): मुंह के कोनों से ठुड्डी तक जाने वाली रेखाएं, जो चेहरे को ढीला दिखाती हैं.
झुर्रियां होने का कारण क्या है?
उम्र बढ़ने के साथ त्वचा पतली, रूखी और कम लचीली हो जाती है. इसके पीछे दो अहम प्रोटीन होते हैं कोलेजन (Collagen) और इलास्टिन (Elastin). ये त्वचा को कसाव और लचीलापन देते हैं, लेकिन समय के साथ इनका निर्माण कम होने लगता है.
इसके अलावा चेहरे के हाव-भाव, हंसना, मुस्कुराना, आंखें सिकोड़ना या गुस्सा करना भी झुर्रियों को बढ़ाते हैं. कम उम्र में त्वचा वापस अपनी जगह आ जाती है, लेकिन उम्र बढ़ने पर उसका लचीलापन कम हो जाता है और ये रेखाएं स्थायी बन जाती हैं.
झुर्रियां डरने की नहीं, समझने की चीज हैं. ये हमारी उम्र, अनुभव और जीवन की सच्ची कहानी कहती हैं. सही देखभाल से इन्हें देर से ज़रूर लाया जा सकता है. लेकिन, इन्हें पूरी तरह रोकना मुमकिन नहीं और शायद जरूरी भी नहीं.
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