हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा बड़ा होकर एक अच्छा और कामयाब इंसान बने. लेकिन हम सभी उन्हें अच्छे से अच्छे स्कूल में भेजना, महंगे कपड़े दिलाना, और उनकी हर जिद पूरी तो कर देते हैं, मगर कई बार जानें- अनजाने में उन छोटी-छोटी बातों को सिखाना भूल जाते हैं, जिन्हें समाज में अच्छे मैनर्स या तमीज कहा जाता है.
दरअसल अगर बच्चे में ये बुनियादी आदतें न हों, तो लोग पीठ पीछे या सामने भी कह देते हैं कि माता-पिता ने कुछ सिखाया ही नहीं, कितना जिद्दी बच्चा है. ऐसी बातें किसी भी पेरेंट्स का दिल दुखा सकती हैं. इसलिए, बचपन से ही बच्चों को कुछ जरूरी बातें सिखाना बहुत जरूरी है.
वो 4 बातें, जो आपके बच्चे को एक संस्कारी और प्यारा इंसान बनाती हैं-
1. 'प्लीज' और 'थैंक यू' कहना सिखाएं-
जब भी बच्चा किसी से कोई चीज मांगे, तो उसे 'प्लीज' कहना सिखाएं. और जब उसे वो चीज मिल जाए, तो 'थैंक यू' बोलना उसकी आदत में शामिल करें. ये दो छोटे शब्द सामने वाले के दिल में बच्चे के लिए इज्जत बढ़ा देते हैं.

बच्चों को जरूर सिखाएं ये 4 बातें. Photo Credit: pexels
2. बड़ों का आदर करना-
बच्चों को छोटे से ही ये बात सिखाएं कि घर में जब भी कोई मेहमान आए या बाहर कोई बुजुर्ग मिले, तो वो मुस्कुराकर नमस्ते, प्रणाम या हैलो कहें. इससे बड़ों के दिल में बच्चों के लिए प्यार और सम्मान बढ़ेगा.
3. अपनी गलती पर 'सॉरी' बोलना-
गलती किसी से भी हो सकती है, लेकिन उसे मान लेना सबसे बड़ी तमीज है. अगर बच्चे से कोई गलती हो जाए, किसी का नुकसान हो जाए या किसी को चोट लग जाए, तो उसे बिना किसी हिचकिचाहट के 'सॉरी' मांगना सिखाएं. इससे बच्चे में झूठ बोलने की आदत भी कम होगी.
4. चीखकर या चिल्लाकर बात न करना-
अक्सर आपने देखा होगा कि कुछ बच्चों की आदत होती है कि वो अपनी हर बात चिल्लाकर या रोकर मनवाते हैं. उन्हें समझाएं कि शांति से अपनी बात कैसे रखनी है. चीखने-चिल्लाने वाले बच्चों से लोग अक्सर दूरी बना लेते हैं. इसलिए शांत रहकर तमीज के साथ बात रखना सिखाएं.
क्या कहती है रिसर्च?
अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) की रिसर्च के मुताबिक, बच्चे वही सीखते हैं जो वो अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं. अगर पैरेंट्स खुद शांत रहकर बात करते हैं, तो बच्चे भी भावनाओं को संभालना और तमीज से रहना जल्दी सीख जाते हैं.
प्रिवेंट चाइल्ड अब्यूज अमेरिका की गाइडलाइन की रिसर्च में बताया गया है कि बच्चों को डांटने या सजा देने के बजाय खुद उनके सामने एक अच्छा उदाहरण पेश करना (जैसे दूसरों की इज्जत करना) उन्हें ज्यादा संस्कारी और तमीजदार बनाता है.
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