UPSC Success Story : यूपीएससी (UPSC) देश की कठिन परीक्षाओं में से एक है. हर साल इस परीक्षा में लाखों उम्मीदवार अपनी किस्मत अजमाते हैं, जिसमें से आधे से कम ही सफल हो पाते हैं. यह परीक्षा वही पास कर पाता है, जिसके अंदर धैर्य और दृढ़ता होती है. आज के इस लेख में हम आपको एक ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने 3 बार असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी और मेहनत और जज्बे को साथ लिए आइएफएस (IFS) अफसर बनीं. हम आज बात करने जा रहे हैं पूज्य प्रियदर्शिनी की जिन्होंने साल 2018 में ऑल इंडिया में 11वीं रैंक हासिल की.
पहले अटैंम्प्ट में हुई फेल
पूज्य प्रियदर्शिनी ने साल 2013 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पहली बार यूपीएससी का एग्जाम दिया. पहले अटैंम्प्ट में उनकी तैयारी पुख्ता नहीं थी इसलिए सफल नहीं हुईं. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और फिर से तैयारी में जुट गईं.
दिल्ली से न्यूयार्क और फिर UPSC का सपना
आपको बता दें कि दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी.कॉम पूरा करने के बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए न्यूयार्क स्थिक कोलंबिया यूनिवर्सिटी से लोक प्रशासन में पोस्ट ग्रैजुएशन किया. इस दौरान उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी और यूपीएससी की तैयारी तीनों मैनेज किया. प्रियदर्शिनी दिन में नौकरी करतीं और रात में पढ़ाई और यूपीएससी की तैयारी के लिए नोट्स तैयार करती थीं.
अक्सर देखा जाता है कि लोग सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए नौकरी छोड़ देते हैं, लेकिन पूज्य ने इससे इतर अलग रास्ता चुना. उन्होंने सीमित समय में पढ़ाई पूरी करके अनुशासन, टाइममैनेजमेंट और आत्मनियंत्रण का परिचय दिया, जो कि इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत जरूरी है.
माता-पिता ने दिया सहारा, बदली रणनीति
पूज्य प्रियदर्शिनी ने 2016 में सफलता के बेहद करीब पहुंची लेकिन 2017 में प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर पाईं, जिसके बाद उनकी हिम्मत टूट गईं. उन्होंने तैयारी को छोड़ने के फैसला ले लिया. लेकिन इस दौरान परिवार ने हौसला बढ़ाया, क्योंकि प्रियदर्शिनी के माता-पिता भी सिविल सेवा से जुड़े हुए थे तो उन्हें पता था कि यूपीएससी का नेचर क्या है.
इसके बाद पूज्य ने दोबारा से अपने आपको मजबूत किया और अपनी तैयारी की रणनीति पर गहन विचार किया और उसमें बदलाव भी किया. उन्होंने अपने कमजोर विषयों पर फोकस किया, उसकी तैयारी में बदलाव किया. उनकी बदली हुई रणनीति उनके सफर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई.
2018 में हुईं सफल: क्यों चुना IFS?
प्रियदर्शिनी की मेहनत 2018 में रंग लाई वो परीक्षा में पास हुईं और AIR में 11 वीं रैंक हासिल की. आपको बता दें कि पूज्य की रैंक बहुत अच्छी थी, उनके पास प्रशासनिक सेवा चुनने का ऑप्शन था, लेकिन उन्होंने भारतीय विदेश सेवा को चुना क्योंकि उनकी रुचि अंतरराष्ट्रीय संबंधों और नीति निर्माण की तरफ था, इसलिए वो इस दिशा में बढ़ीं.
युवाओं के लिए सबक
पूज्य प्रियदर्शिनी की सफलता की कहानी हमें ये सिखाती है कि सही योजना, अनुशासन से काम करके आप बड़ी से बड़ी सफलता को हासिल कर सकते हैं. यह कहानी उनके लिए प्रेरणा है जो असफलता से निराश होकर तैयारी को बीच में ही छोड़ देते हैं. पूज्य की कहानी में सबसे बड़ी बात ये है कि उन्होंने नौकरी करते हुए तैयारी को जारी राखी जो काबिले तारीफ है.
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