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कोचिंग बनाम UPSC, बदले पैटर्न ने उड़ाए होश, क्या कोचिंग के भरोसे नहीं निकलेगा अब एग्जाम?

UPSC प्रीलिम्स के बदले पैटर्न ने छात्रों और कोचिंग संस्थानों के होश उड़ा दिए हैं. जानिए क्यों इस बार का पेपर बेहद कठिन था और क्या अब बिना कोचिंग के ही सिविल सर्विसेज परीक्षा पास की जा सकती है?

कोचिंग बनाम UPSC, बदले पैटर्न ने उड़ाए होश, क्या कोचिंग के भरोसे नहीं निकलेगा अब एग्जाम?
​बिहार से आए उम्मीदवार अभिषेक कुमार ने अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा कि जीएस और सीसैट (CSAT) दोनों ही पेपर बेहद जटिल थे.

UPSC Prelims 2026 : UPSC प्रीलिम्स की परीक्षा खत्म होते ही सोशल मीडिया से लेकर दिल्ली के कोचिंग हब राजिंदर नगर की सड़कों तक एक ही चर्चा गर्म है . क्या यूपीएससी ने कोचिंग संस्थानों को मात देने के लिए चक्रव्यूह रचा था ? इस बार का पेपर देकर जब छात्र परीक्षा केंद्रों से बाहर निकले, तो उनके चेहरों पर पसीने और परेशानी साफ देखी जा सकती थी. पिछले 10 सालों की तुलना में इस बार का पेपर बेहद कठिन, अप्रत्याशित और थका देने वाला था. 51 पन्नों के इस सवालनामे ने छात्रों के साथ साथ बड़े बड़े एक्सपर्ट को भी हैरत में डाल दिया है.

​कोचिंग के सिलेबस को मात देने की मंशा

​दिल्ली के एक नामी स्मार्ट वर्क लैब IAS एकादमी के शिक्षक अंकित का मानना है कि UPSC समय समय पर अपने पेपर का स्वरूप बदलता रहता है. उन्होंने कहा "इस बार जिस तरह का पेपर आया है, वह कोचिंग सेंटर्स के सिलेबस को मात देने के लिए बनाया गया था. यह सीधे तौर पर कोचिंग सेंटर्स पर छात्रों के अटूट भरोसे को तोड़ने की मंशा है."

​छात्रों का दर्द, भविष्य दांव पर

​बिहार से आए उम्मीदवार अभिषेक कुमार ने अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा कि जीएस और सीसैट (CSAT) दोनों ही पेपर बेहद जटिल थे. पालिटी के 123 सवाल स्टेटिक्स और करेंट अफेयर्स को मिलाकर इतने घुमावदार बनाए गए थे कि कोई भी सीधा उत्तर नहीं ढूंढ पा रहा था.

​अभिषेक ने कहा "सवाल इतने लंबे थे कि उन्हें पढ़ने और समझने में ही समय खत्म हो रहा था. स्टेटमेंट के बाद ऑप्शंस का जो जाल बुना गया, उसने अंत तक कन्फ्यूज रखा. इस पैटर्न से हिंदी मीडियम के अच्छे छात्रों के लिए भी क्वालीफाई करना बेहद मुश्किल हो गया है. जब 12वीं और सीबीएसई तक के लिए मॉडल पेपर जारी होते हैं, तो देश की सबसे बड़ी परीक्षा के लिए यूपीएससी कोई क्लू या मॉडल पेपर क्यों नहीं देता? जिनका यह आखिरी चांस था, उनका करियर दांव पर लग गया है."

​वहीं, दूसरी उम्मीदवार प्रीति ने बताया कि जो छात्र मुख्यधारा  के मैगजीन और रटे रटाए सोर्सेज पर निर्भर थे, उन्हें बड़ा झटका लगा है. करेंट अफेयर्स हाल फिलहाल के न होकर काफी पुराने और अज्ञात स्रोतों से थे, जिसने छात्रों का आत्मविश्वास पूरी तरह तोड़ दिया है. अब केवल अखबार और खुद की गहरी समझ ही सहारा है.

​सिलेक्टेड कैंडिडेट्स के भी छूटे पसीने

​परीक्षा के बाद से ही छात्र डिप्रेशन में हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि जो छात्र पहले ही इंटरव्यू दे चुके हैं या सिलेक्टेड हैं, वे भी इस पेपर में 70 से ज्यादा सवाल सही नहीं कर पा रहे हैं.

विशेषज्ञों का आरोप है कि सीसैट में रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन को घटाकर मैथ्स के सवाल इतने कठिन कर दिए गए कि केवल चुनिंदा इंजीनियर्स या डॉक्टर्स ही इसे हल कर पाएं. यह आम पृष्ठभूमि के बच्चों के साथ नाइंसाफी है.

अब रटने से नहीं, सोचने से बनेगी बात

​छात्रों ने मन बना लिया है कि इस परीक्षा ने यह साफ कर दिया है कि किसी भी कोचिंग संस्थान के रेडीमेड नोट्स या करेंट अफेयर्स की मगजमारी रटने से अब यूपीएससी क्रैक नहीं होने वाला. खुद कोचिंग संस्थान भी अब बैकफुट पर हैं और अपनी रणनीति की दोबारा समीक्षा करने की बात कह रहे हैं.
​सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस का भी यही निचोड़ है अब रटने से काम नहीं चलेगा, अब गहराई से सोचना होगा. देखना दिलचस्प होगा कि बदले हुए इस दौर में छात्र और कोचिंग खुद को कैसे ढालते हैं.

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Harikishan Sharma
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