- राजस्थान कैडर में IAS मुद्रा रहेजा और IPS सिद्धार्थ श्रीवास्तव का स्थानांतरण विवाह के आधार पर हुआ है
- सिद्धार्थ श्रीवास्तव को UPSC के छठे प्रयास में सफलता हासिल हुई
- मुद्रा रहेजा दो बार यूपीएससी परीक्षा में सफल रहीं और अब राजस्थान में सहायक कलेक्टर के पद पर तैनात हैं
राजस्थान को नया पावर कपल मिल गया है. आईएएस पत्नी ने दो बार यूपीएससी निकाला तो वहीं आईपीएस पति ने यूपीएससी के लिए दो-दो सरकारी छोड़ दी और उसके बाद यूपीएससी में पांच बार फेल हुए, मगर हिम्मत नहीं हारी. अब पत्नी के तबादले पर पति की कामयाबी की पूरी कहानी चर्चा में आ गई है.
दरअसल, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी मुद्रा रहेजा, अपने पति और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी सिद्धार्थ श्रीवास्तव के साथ विवाह के आधार पर त्रिपुरा कैडर से राजस्थान कैडर में स्थानांतरित हुई हैं. IPS सिद्धार्थ श्रीवास्तव की सफलता की कहानी बेहद शानदार और प्रेरणादायक है. सिद्धार्थ ने IPS बनने के लिए न केवल मारुति सुजुकी जैसी प्रतिष्ठित कंपनी की नौकरी ठुकरा दी, बल्कि आबकारी निरीक्षक और नायब तहसीलदार जैसे पदों को भी छोड़ दिया. उन्होंने UPSC परीक्षा पास करने के लिए अपने छठे और अंतिम प्रयास तक अपनी कोशिश जारी रखी.
IPS सिद्धार्थ श्रीवास्तव का जीवन परिचय
वाराणसी के चितईपुर क्षेत्र के निवासी IPS सिद्धार्थ श्रीवास्तव का बचपन एक ऐसे माहौल में बीता, जहां शिक्षा और समाज सेवा को सर्वाधिक महत्व दिया जाता था. उनके भीतर संस्कारों और सीखने की ललक को जगाने में उनकी दादी का बहुत बड़ा योगदान रहा. पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहने वाले सिद्धार्थ ने वर्ष 2017 में देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT BHU से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक पूरा किया.
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सिविल सेवा का सपना और शुरुआती कदम
B.Tech पूरा करने के बाद सिद्धार्थ को प्रसिद्ध ऑटोमोबाइल कंपनी मारुति सुजुकी में काम करने का बेहतरीन अवसर मिला. हालांकि, उनके मन में सिविल सेवा के माध्यम से समाज के लिए कुछ बड़ा करने का सपना था. इसीलिए उन्होंने इस कॉर्पोरेट नौकरी को ठुकरा दिया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में पूरी तरह से जुट गए.

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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में सफलता
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान शुरुआत में उन्हें कुछ असफलताओं का सामना भी करना पड़ा, लेकिन सिद्धार्थ ने हार नहीं मानी. अपनी कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की और आबकारी निरीक्षक बने. इसके बाद भी उनकी लगन कम नहीं हुई और वर्ष 2020 में वे नायब तहसीलदार के पद पर चयनित हुए.
नायब तहसीलदार के रूप में कार्य करने के दौरान एक ऐसी घटना घटी, जिसने उनके जीवन को एक नया मोड़ दिया. एक पुलिस निरीक्षक द्वारा की गई उपेक्षा ने उन्हें यह अहसास कराया कि यदि समाज में बड़ा और सार्थक बदलाव लाना है, तो शीर्ष प्रशासनिक पद पर पहुँचना बेहद ज़रूरी है.

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छठे प्रयास में हासिल की AIR 118
इसी संकल्प के साथ वे दोबारा UPSC की तैयारी में जी-जान से जुट गए. यह उनका छठा और अंतिम प्रयास था. अपनी अटूट लगन और मेहनत के दम पर उन्होंने इस अंतिम प्रयास में पूरे भारत में 118वीं रैंक हासिल की और IPS अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा किया.
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