भारत में वर्क कल्चर और इसे लेकर जरूरी बदलावों को लेकर अक्सर बहस होती रही है. इसी बीच जापान में पिछले 10 सालों से नौकरी करने वाले एक भारतीय युवा ने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा शेयर किया है, जिससे नई बहस शुरू हो गई है. भारतीय प्रोफेशनल ने जापान के कॉर्पोरेट कल्चर की एक झलक पेश की है. इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में अंकित पुरोहित नाम के इस यूजर ने बताया कि जापान में नौकरी पाना तो मुमकिन है, लेकिन वहां के वर्क माइंडसेट को अपनाना सबसे ज्यादा जरूरी है.
अंकित ने अपने 10 साल के अनुभव के आधार पर जापान के वर्क कल्चर को लेकर कई दिलचस्प बातें बताईं. इनमें समय की पाबंदी, आपसी सम्मान, अनुशासन और प्रोफेशनल बाउंड्रीज शामिल हैं.
समय के पाबंद हैं जापान के लोग
अंकित ने बताया कि जापान में वक्त की काफी कीमत समझी जाती है. यहां के लोग समय को लेकर बेहद संजीदा हैं. अगर आपका ऑफिस सुबह 9:00 बजे का है, तो आपको हर हाल में 9:00 बजे से पहले ऑफिस पहुंचना होगा. सबसे दिलचस्प बात ये है कि यहां पद के हिसाब से लोग अलग-अलग चीजों से सफर नहीं करते हैं, यहां कंपनी के सीईओ भी ऑफिस आने के लिए ट्रेन का ही इस्तेमाल करते हैं. इसलिए वहां इस बात की कोई तुलना नहीं होती कि कौन कार से आ रहा है, कौन बाइक से और कौन ट्रेन से.
लंच ब्रेक और ओवरटाइम का पैसा
अंकित ने सोशल मीडिया पर जापान के वर्क-लाइफ बैलेंस और ऑफिस मैनर्स को लेकर कुछ बातें शेयर की हैं. जिसमें उन्होंने बताया है कि यहां 12 बजे से लेकर 1 बजे तक लंच टाइम दिया जाता है, इस दौरान किसी भी तरह के काम का प्रेशर नहीं होता है. अगर आप ऑफिस में सिर्फ 15 मिनट का भी एक्स्ट्रा काम करते हैं, तो कंपनी आपको उसका भी पैसा अलग से देती है. इसके अलावा काम खत्म होने के बाद आपका मैनेजर आपको एक्स्ट्रा काम के लिए फोन नहीं करेगा और न ही छुट्टियों के दिन काम करने को कहेगा.
जापान में काम करने आने वालों को सलाह
अंकित ने जापान में आकर नौकरी करने वालों को सलाह देते हुए कहा कि जो लोग जापान में अपना करियर बनाने की सोच रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि यहां का वर्क कल्चर सिर्फ ऑफिस की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं है. ये एक ऐसे कल्चर का हिस्सा बनने जैसा है जो अनुशासन, सम्मान, जिम्मेदारी और टीमवर्क को बहुत महत्व देती है. जापान में टीमवर्क को सराहा जाता है और काम की स्पीड से ज्यादा काम की क्वालिटी को प्राथमिकता दी जाती है.
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