आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से दुनिया भर की कंपनियों में लोगों की नौकरियां जा रही हैं. कई टेक जॉब्स, ऑटोमेशन और AI की वजह से प्रभावित हैं. ऐसे में ये कहा जा रहा है कि एआई डेस्क जॉब्स को प्रभावित कर सकता है, लेकिन फील्ड वर्क करने वाले इससे प्रभावित नहीं हो रहे हैं. स्किल्स वर्कर्स की डिमांड आज भी है और आगे भी बनी रहेगी. Industrial Training Institutes (ITI) में इलेक्ट्रिशियन, फिटर, वेल्डर, मशीनिस्ट, प्लंबर और ऑटोमोबाइल टेक्नीशियन जैसे प्रोफेशनल कोर्स करने वालों को AI या रोबोट्स से बदलना फिलहाल आसान नहीं है.
ITI और IIT में क्या है अंतर
ITI का मुख्य उद्देश्य छात्रों को किसी विशेष स्किल में व्यावहारिक (Practical) प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार के लिए तैयार करना है. यहां इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, वेल्डिंग, रेफ्रिजरेशन, ऑटोमोबाइल, CNC मशीनिंग और अन्य तकनीकी स्किल्स सिखाए जाते हैं.
दूसरी ओर, IIT इंजीनियरिंग, रिसर्च, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर केंद्रित उच्च शिक्षा संस्थान हैं, जहां छात्रों को गहन तकनीकी और वैज्ञानिक शिक्षा दी जाती है.
AI किन नौकरियों को ज्यादा प्रभावित कर रहा है
AI और ऑटोमेशन मुख्य रूप से उन नौकरियों को प्रभावित कर रहे हैं, जो डेस्क जॉब है या जिनमें डिजिटल कार्य शामिल हैं. जैसे बेसिक कोडिंग, डेटा एंट्री, रूटीन सॉफ्टवेयर टेस्टिंग, कंटेंट तैयार करना, Customer Support का काम आदि.
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हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि टेक सेक्टर में नौकरियां खत्म हो रही हैं. AI ने नई भूमिकाएं भी पैदा की हैं, जैसे AI इंजीनियर, मशीन लर्निंग विशेषज्ञ, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और डेटा इंजीनियर आदि.
ITI स्किल वर्कर्स की मांग क्यों बढ़ रही है
स्किल्ड वर्कर्स मशीनों, उपकरणों और साइट पर समस्याओं का समाधान करते हैं. ऐसे कार्यों में मानवीय कौशल, अनुभव और निर्णय लेने की क्षमता की जरूरत होती है. जैसे इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, वेल्डर, फिटर, HVAC तकनीशियन, ऑटोमोबाइल सर्विस इंजीनियर, CNC मशीन ऑपरेटर, इंडस्ट्रियल मेंटेनेंस टेक्नीशियन आदि.
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नौकरियों को पूरी तरह AI से बदलना निकट भविष्य में आसान नहीं होगा.
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