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रिश्वत लेते हुए पकड़े गए IAS या IPS अधिकारी का क्या होता है? जानें कब जाती है नौकरी

भारत में अगर कोई IAS या IPS अधिकारी रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाता है. सबसे पहले जांच होती है और अधिकारी को सस्पेंड कर दिया जाता है. अगर कोर्ट में दोष साबित होता है, तो अधिकारी को जेल की सजा दी जा सकती है.

रिश्वत लेते हुए पकड़े गए IAS या IPS अधिकारी का क्या होता है? जानें कब जाती है नौकरी
IAS और IPS अधिकारियों के लिए प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 मुख्य कानून है.

Government Officer Bribery Case: IAS-IPS ऑफिसर बनने के लिए हर साल बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स UPSC की परीक्षा में शामिल होते हैं. ये दोनों ही पद बेहद पावरफुल होते हैं. आए दिन कई ईमानदार और अच्छे अधिकारियों की कहानियां सुनने को मिलती है, लेकिन कई बार कुछ रिश्वतखोरी की भी खबरें आती हैं. खासकर अगर वह IAS या IPS अधिकारी है और उसका नाम करप्शन में आया, तो सुर्खियां बन जाती हैं. ऐसे मामलों में न सिर्फ उनका करियर दांव पर लगता है, बल्कि उन्हें कानूनी सजा और जेल का भी सामना करना पड़ सकता है. आइए जानते हैं कि रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने पर अधिकारी के साथ क्या होता है और कब उनकी नौकरी चली जाती है.

रिश्वत मामले में पहली कार्रवाई क्या होती है

जब किसी IAS या IPS अधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप लगता है, सबसे पहले ACB या राज्य सतर्कता विभाग शिकायत की जांच करता है. इसके लिए अक्सर प्लान बनाकर अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ना पड़ता है. जांच शुरू होते ही अधिकारी को सस्पेंड कर दिया जाता है, यानी वह अपने पद पर काम नहीं कर सकता. इस दौरान FIR दर्ज की जाती है और अधिकारी को जरूरी होने पर अरेस्ट भी किया जा सकता है.

रिश्वत के मामले में IAS-IPS को कितनी सजा मिलती है

जांच पूरी होने के बाद मामला प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (Prevention of Corruption Act, 1988) के तहत कोर्ट में पेश किया जाता है. अगर ऑफिसर दोषी पाया जाता है, तो उसे जेल की सजा मिल सकती है, जो आमतौर पर 3 से 7 साल तक होती है. इसके अलावा कोर्ट जुर्माना भी लगा सकती है. दोषी पाए जाने पर अधिकारी को नौकरी से हमेशा के लिए बर्खास्त कर दिया जाता है, जिससे उसका सरकारी करियर हमेशा के लिए खत्म हो जाता है. अगस्त 2013 में त्रिपुरा की IPS अधिकारी शम्भिका पॉल को रिश्वत मामले में कोर्ट ने दोषी पाया और तीन साल की जेल की सजा सुनाई.

अगर रिश्वत की शिकायत सही नहीं पाई गई तो क्या होता है

अगर अधिकारी को अदालत में साबित नहीं किया जाता, तो उसे फिर से नौकरी पर बहाल किया जाता है. इसके साथ ही निलंबन के दौरान मिली सैलरी और प्रमोशन भी अधिकारी को वापस दी जाती है. देश में IAS और IPS अधिकारियों के लिए प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 मुख्य कानून है. यह कानून रिश्वत लेने वाले किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ सख्त एक्शन लेती है.

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