विज्ञापन

Success Story : उंगलियों से पहाड़ा, शरीर से हिंदी की मात्रा..पढ़ाने के अनोखे तरीके को मिला राष्ट्रपति सम्मान

बिहार के बांका की प्रधान शिक्षिका खुशबू कुमारी ने बच्चों को पढ़ाने का ऐसा तरीका अपनाया, जिसमें उंगलियों से पहाड़ा, शरीर की गतिविधियों से हिंदी की मात्राएं और खेल-गीतों के जरिए सीखने पर जोर दिया गया.

Success Story : उंगलियों से पहाड़ा, शरीर से हिंदी की मात्रा..पढ़ाने के अनोखे तरीके को मिला राष्ट्रपति सम्मान
खुशबू की कक्षा में शिक्षण सामग्री हमेशा कोई चार्ट या मॉडल नहीं होती.

Success Story : कक्षा में बच्चे बैठे हैं. सामने शिक्षिका खुशबू कुमारी खड़ी हैं. बच्चों के हाथ में ना किताब है, ना कॉपी. खुशबू बच्चों को हिंदी की मात्रा समझाने के लिए अपने हाथ और उंगलियों का इस्तेमाल कर रही हैं. वह एक गतिविधि करती हैं और बच्चे उसे देखकर दोहराते हैं. कुछ बच्चे तुरंत साथ देने लगते हैं, कुछ को दोबारा समझाना पड़ता है.

खुशबू का पढ़ाने का यही तरीका है. वह हर पाठ को किताब के सहारे समझाने के बजाय कोशिश करती हैं कि बच्चे उसे देखकर, करके या खेल के जरिए समझें. कभी उंगलियां पहाड़ा सिखाने का माध्यम बन जाती हैं तो कभी शरीर के अंग ही TLM यानी शिक्षण सामग्री का काम करने लगता है.

Latest and Breaking News on NDTV

बिहार के बांका के उर्दू प्राथमिक विद्यालय बिदायडीह की प्रधान शिक्षिका खुशबू कुमारी के लिए यह कोई प्रदर्शन नहीं, रोज की कक्षा का हिस्सा है. इसी तरीके से पढ़ाते-पढ़ाते उन्होंने बच्चों के साथ भरोसे का रिश्ता बनाई. इससे अपने स्कूल की उपस्थिति में भी बदलाव देखी. उनके काम को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित हुई हैं. बिहार पहुंचने पर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी सम्मानित किया.

पाठ्यक्रम नहीं, पढ़ाई का तरीका बदली

दरअसल, खुशबू 2013 में बांका जिले के कटोरिया प्रखंड के प्रोन्नत मध्य विद्यालय कठौन में शिक्षक के रूप में अपना सफर शुरू की. तब उन्होंने महसूस किया कि कक्षा में बैठे सभी बच्चे एक ही तरीके से नहीं सीख सकते. लिहाजा, खुशबू नई शैली में पढ़ाना शुरू की. उन्होंने सिलेबस नहीं बदला, लेकिन  पढ़ाने का तरीका जरूर बदला. पहाड़ा याद कराने के लिए उंगलियों का इस्तेमाल किया. हिंदी की मात्राओं के लिए शरीर की गतिविधियों को जोड़ा. खेल और गीतों को भी कक्षा का हिस्सा बनाया. शुरुआत छोटे-छोटे प्रयोगों से हुई. जैसे जैसे सफलता मिलती गई, उसे और भी विस्तार करते गई.

Latest and Breaking News on NDTV
जब शरीर ही बन गया TLM

खुशबू की कक्षा में शिक्षण सामग्री हमेशा कोई चार्ट या मॉडल नहीं होती. कई बार उनके पास मौजूद सबसे आसान चीज ही काम आ जाती है- बच्चों का हाथ, उंगली या फिर शरीर की कोई गतिविधि. मसलन, उंगलियों से पहाड़ा समझाना इसका एक उदाहरण है. हिंदी की मात्रा सिखाने के लिए भी वह गतिविधियों का सहारा लेती हैं. 

यही नहीं, खेल और गीतों के जरिए भी बच्चों को कक्षा में शामिल किया जाता है. इस पूरी प्रोसेस में शिक्षक और बच्चे के बीच संवाद बढ़ता है और पठन पाठन मजेदार हो जाता है.

Latest and Breaking News on NDTV
‘चहक' से कैमरे तक पहुंची कक्षा

2022 में ‘चहक' कार्यक्रम से जुड़ने के बाद खुशबू ने अपनी कक्षा की गतिविधियों का वीडियो बनाना शुरू की. शुरुआत में ये वीडियो सिर्फ उनके अपने प्रयोगों को रिकॉर्ड करने का जरिया था. यह परिजनों, शिक्षकों और अधिकारियों के ग्रुप का हिस्सा था. बाद में धीरे-धीरे सोशल मीडिया ने उन्हें बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचा दिया.

धीरे-धीरे उनके वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रिया आने लगी. सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई और उनके शिक्षण प्रयोग स्कूल की कक्षा से बाहर फैली.

गुड टच-बैड टच' ने बढ़ाई पहुंच

खुशबू के बनाए वीडियो में बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा ‘गुड टच-बैड टच' काफी पॉपुलर हुआ. इसमें बच्चों को सरल भाषा में शरीर की निजता और असहज स्थिति में किसी भरोसेमंद बड़े से बात करने जैसी जरूरी बातें समझाने की कोशिश की. यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैला. इसके बाद बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता से जुड़े उनके काम को व्यापक स्तर पर लोगों ने देखा. खुशबू के शिक्षण प्रयोगों में यह वीडियो इसलिए ज्यादा पॉपुलर हुआ कि यह समाज की बड़ी समस्या रही है, जिसके बारे में लोग खुलकर बात करना नहीं चाहते. जबकि ऐसी सुरक्षा की चिंता हर किसी को होती है. 

Latest and Breaking News on NDTV
बिदायडीह में भरोसा जीतना था चुनौती

21 जुलाई 2025 को खुशबू की पोस्टिंग बांका के उर्दू प्राथमिक विद्यालय बिदायडीह में प्रधान शिक्षिका के रूप में हुई. स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चे मुस्लिम परिवारों से आते हैं. लेकिन इस नए स्कूल में उनके सामने चुनौती सिर्फ पढ़ाई को बेहतर बनाने की नहीं थी. बच्चों और उनके परिवारों के साथ सहज संवाद और भरोसे का रिश्ता बनाना भी जरूरी था.

लेकिन खुशबू ने इसे किसी समुदाय की समस्या के रूप में नहीं देखी. उनके लिए चुनौती अपने स्कूल के बच्चों और उनके परिवारों से जुड़ने की थी. उन्होंने अभिभावकों से बातचीत की, बच्चों के साथ समय बिताया और फिर धीरे-धीरे स्कूल और परिवार के बीच संवाद कायम की. समय के साथ बच्चों और अभिभावकों का स्कूल से जुड़ाव मजबूत हुआ. लिहाजा, स्कूल की उपस्थिति में भी बदलाव देखने को मिला.

40 फीसदी से 90 फीसदी से ज्यादा पहुंची उपस्थिति

खुशबू ने NDTV को बताया कि स्कूल में बच्चों की उपस्थिति शुरुआती दौर में करीब 40 फीसदी थी. लेकिन पढ़ाई के तरीके में बदलाव के कारण 90 फीसदी से ज्यादा उपस्थिति हो गई. स्कूल में बच्चों की बढ़ती संख्या से उनके प्रयोग को बल मिलता गया. उन्होंने कक्षा में खेल, शारीरिक गतिविधियां और शिक्षण सामग्री का इस्तेमाल उनकी नियमित कार्यशैली का हिस्सा बन गया. जिससे बच्चे की पढ़ाई रुचिकर होती गई. 

Latest and Breaking News on NDTV
स्कूल में पढ़ाने से पहले घर पर करती थी प्रयोग

खुशबू के इस कार्य में परिवार का भी सहयोग रहा है. खुशबू बताती हैं कि उनके पति मनीष कुमार आनंद भी शिक्षक हैं. दोनों के बीच बच्चों और उसे पढ़ाने के तरीकों को लेकर चर्चा होती है. उसे घर पर प्रयोग करती हैं. 

खुशबू बांका के कटोरिया प्रखंड के राधानगर की रहने वाली हैं. उनके पिता राजेंद्र प्रसाद साह व्यवसाय करते थे. मां राम प्यारी देवी गृहिणी हैं. खुशबू तीन बहनें है. गीता, संतोषी और खुशबू. एक भाई है विकास, जो लोको पायलट है .

 खुशबू की शादी 2019 में बांका जिले के धोरैया प्रखंड के मानकपुर गांव के मनीष कुमार आनंद के साथ हुई थी. मनीष आनंद एनपीएस कोला में प्रधान शिक्षक हैं. ससुर मनोहर प्रसाद शाह व्यवसाई हैं. सास शीला देवी गृहिणी हैं. खूशबू दंपति के दो बच्चे बेटी माइरा माही और बेटा किआन मानस है.

Latest and Breaking News on NDTV
राज्य से राष्ट्रीय मंच तक पहुंची पहचान

खुशबू के शिक्षण कार्य को सबसे पहले जिला स्तर पर सराहा गया. इसके बाद 2024 में राज्यस्तरीय शिक्षक सम्मान मिला. 2026 में उनका चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए हुआ. विगत 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशभर के 48 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान की, जिसमें बिहार के बांका जिले के उर्दू प्राईमरी स्कूल विदायडीह की प्रधान शिक्षक खुशबू कुमारी भी एक थी.  

राष्ट्रपति के हाथों मिला सम्मान खुशबू के काम की राष्ट्रीय पहचान मिली है. बहरहाल, खुशबू की कहानी का सबसे अहम हिस्सा अब भी उसी कक्षा में है जहां बच्चे नियमित रूप से पहुंचते हैं, गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं और पढ़ाई को सिर्फ किताब के पन्नों तक सीमित नहीं रखते.

यह भी पढ़ें- Success Story : 5 साल में मेजर, फिर राष्ट्रपति की ADC, कौन हैं मेजर नव्या शेखावत?

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com