Agniveer 4 Year Rule: अग्निपथ योजना को लेकर इन दिनों एक बार फिर चर्चाएं बेहद तेज हैं. साल 2022 में जब इस योजना की शुरुआत हुई थी, तब नियम बनाया गया था कि 4 साल की सर्विस के बाद सिर्फ 25% अग्निवीरों को ही परमानेंट किया जाएगा, बाकी 75% को सेवामुक्त कर घर भेज दिया जाएगा. अब साल 2023 की शुरुआत में ट्रेनिंग शुरू करने वाले पहले बैच का 4 साल का कार्यकाल साल 2026 में पूरा होने जा रहा है. ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल है कि आखिर 4 साल बाद किन जवानों को सेना में आगे मौका मिलेगा और किन्हें घर लौटना होगा. उन्हें बाहर निकाले जाने का क्राइटेरिया क्या होता है. आइए जानते हैं क्या है नियम...
अग्निवीरों को 4 साल बाद बाहर करने का नियम क्या कहता है
अभी जो नियम चल रहा है उसके मुताबिक, हर 100 अग्निवीरों में से सिर्फ 25 को ही आगे परमानेंट सर्विस में रखा जाता है, बाकी 75 की सर्विस खत्म हो जाती है. खबरों के मुताबिक, अब सेना खुद चाहती है कि ये संख्या बढ़ाई जाए. नेवी तो 75 प्रतिशत तक अग्निवीरों को रोकने की मांग कर रही है, जबकि आर्मी और एयरफोर्स करीब 50 प्रतिशत तक चाहती हैं. हालांकि, अभी तक सरकार ने इस पर मुहर नहीं लगाई है, तो फिलहाल पुराना 25 प्रतिशत वाला नियम ही लागू है.
कौन अग्निवीर जाएगा और कौन रहेगा, कैसे तय होता है
- नियम के अनुसार, जो अग्निवीर 4 साल में सबसे अच्छा परफॉर्म करते हैं, उन्हीं को मौका मिलता है. बाकियों को घर भेज दिया जाता है. इसमें कई चीजें देखी जाती हैं.
- रोजाना का काम कैसा रहा. अनुशासन, ड्यूटी में मेहनत, बर्ताव सब कुछ मायने रखता है.
- फिजिकल फिटनेस टेस्ट में परफॉर्मेंस का क्राइटेरिया भई सेट है.
- मेडिकल रिपोर्ट एकदम सही होनी चाहिए. इससे जुड़े जो स्टैंडर्ड सेना ने सेट किए हैं, उन पर खरा उतरना जरूरी है.
- हथियार चलाने से लेकर नई तकनीक तक, हर चीज में स्किल्स और काम चेक होती है.
- टीम में कैसा काम किया, ये भी देखा जाता है.
अग्निवीरों के निकाले जाने का क्राइटेरिया क्या होता है
4 साल पूरे होने के बाद सेना सिर्फ उन्हीं जवानों को रखती है, जो तय मानकों पर सबसे बेहतर साबित होते हैं. जो अग्निवीर मेरिट सूची में पीछे रह जाते हैं या चयन के लिए जरूरी मानकों को पूरा नहीं कर पाते, उन्हें रिटायर कर दिया जाता है. सेना अपने तय मानकों के आधार पर एक मेरिट लिस्ट बनती है और उसी लिस्ट के टॉप पर मौजूद अग्निवीरों को आगे का मौका मिलता है. जबकि बाकियों को घर भेज दिया जाता है.
जो नहीं चुने जाते, उनका क्या होता है
- सेवा खत्म होने पर 11.71 लाख रुपए एकमुश्त दी जाती है, जो पूरी तरह टैक्स फ्री होती है.
- स्किल सर्टिफिकेट और अनुभव प्रमाणपत्र मिलता है, जो आगे नौकरी ढूंढने में मदद करता है.
- CAPF और असम राइफल्स जैसी फोर्सेज में 10 प्रतिशत सीटें रिजर्व रहती हैं.
- कई राज्य सरकारों ने पुलिस भर्ती में भी प्राथमिकता देने का ऐलान किया है.
- उम्र सीमा में भी छूट दी जाती है ताकि दूसरी सरकारी नौकरियों के लिए अप्लाई करना आसान हो.
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