हिंदू धर्म में कान छिदवाने का खास महत्व माना जाता है. इसे कर्णवेध संस्कार कहा जाता है. पहले के समय में बच्चों के कान छिदवाना एक जरूरी संस्कार होता था. आज भी कई परिवार इस परंपरा को निभाते हैं. वहीं, कुछ लोग फैशन के लिए भी कान छिदवाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज्योतिष में कान के अलग-अलग हिस्सों में पियर्सिंग करवाने का संबंध ग्रहों से भी बताया गया है? एस्ट्रोलॉजर नीलम भार्गव ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में इसी बारे में जानकारी दी है. आइए जानते हैं कि हिंदू धर्म में कान छिदवाने का क्या महत्व है और पुरुषों को किस कान में पियर्सिंग करवानी चाहिए.
क्या है कर्णवेध संस्कार?
एस्ट्रोलॉजर बताती हैं, हिंदू धर्म में 16 संस्कारों का खास महत्व है. इन्हीं में से 10वां संस्कार है कर्णवेध संस्कार. कर्णवेध का मतलब है कान छिदवाना. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, कान के ऊपरी हिस्से यानी हेलिक्स पर पियर्सिंग करवाने से शुक्र ग्रह एक्टिवेट होता है. ऐसे में महिलाएं अपने कान के ऊपर के हिस्से में पियर्सिंग करवा सकती हैं.
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नीलम भार्गव के अनुसार, पुरुष अगर अपने दाएं कान में पियर्सिंग करवाते हैं, तो इसका संबंध भी शुक्र ग्रह से बताया जाता है. शुक्र को प्रेम, सुंदरता और सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है. वहीं, बाएं कान में पियर्सिंग करवाने को बुध ग्रह से जोड़कर देखा जाता है. ज्योतिष में बुध को बुद्धि, बोलने की कला, समझ और सही फैसले लेने की क्षमता का कारक माना गया है.
कान छिदवाने के लिए कौन सा दिन होता है शुभ?एस्ट्रोलॉजर कहती हैं, वैसे तो आप किसी भी दिन कान छिदवा सकते हैं, लेकिन कर्णवेध संस्कार के लिए सोमवार, गुरुवार और शुक्रवार को सबसे शुभ माना गया है. इन दिनों में यह संस्कार करने से इसका सकारात्मक प्रभाव अधिक मिलता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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