'रामायण' के मेकर्स अपनी मेगा बजट की फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज होने से पहले पायरेसी से बचाने के लिए कदम उठा रहे हैं. बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें अंतरिम सुरक्षा देते हुए अज्ञात लोगों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को बिना अनुमति के फिल्म को रिकॉर्ड करने, अपलोड करने या स्ट्रीम करने से रोक दिया है. कोर्ट ने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी निर्देश दिया है कि अगर मेकर्स उनके (कोर्ट के) ध्यान में कोई पायरेटेड कंटेंट लाते हैं, तो उसे तुरंत हटा दिया जाए.
यह आदेश सोमवार (2 नवंबर) को आया, जब जस्टिस माधव जामदार ने 'गॉडपावर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा दायर कॉपीराइट उल्लंघन के मामले की सुनवाई की. इस कंपनी के पास भारत और विदेशों में फिल्म के कॉपीराइट और इसके इस्तेमाल से जुड़े अधिकार हैं.
कड़े नियमों के बावजूद 'रामायण' के ट्रेलर हुए लीक
'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट को बताया गया कि 'रामायण' के पहले पार्ट को 2000 करोड़ रुपये के बजट में बनाया गया है, और दोनों फिल्मों का कुल बजट 4000 करोड़ रुपये है. 'गॉडपावर मीडिया' ने पहले हुए एक उल्लंघन का जिक्र करते हुए कोर्ट को बताया कि दोनों ट्रेलरों के फुटेज को चुपके से रिकॉर्ड करके ऑनलाइन वायरल कर दिया गया था. यह तब हुआ, जब मेकर्स ने प्रीव्यू स्क्रीनिंग को केवल इन्वाइटेड लोगों तक ही सीमित रखा था और आने वालों से 'नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट' पर साइन भी करवाए थे.
'रामायण' 5 नवंबर को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. ऐसे में, कंपनी ने फिल्म के कंटेंट को लीक होने या बिना इजाजत के शेयर किए जाने से रोकने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उनकी याचिका में न केवल फिल्म, बल्कि इसकी स्क्रिप्ट, किरदारों, फुटेज, गानों के बोल और साउंड रिकॉर्डिंग के लिए भी सुरक्षा मांगी गई है.

कोर्ट ने ऑनलाइन पायरेसी के खतरे को माना
जस्टिस माधव जामदार ने 'गॉडपावर मीडिया' की चिंताओं को स्वीकार किया. उन्होंने माना कि फिल्म या इसके कुछ हिस्सों को बिना इजाजत के रिकॉर्ड करके ऑनलाइन शेयर किए जाने का खतरा असल है. रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस जामदार ने कहा, "प्रथम दृष्टया, वादी (गॉडपावर) को यह जायज डर है कि फिल्म या इसके कुछ हिस्सों को रिकॉर्ड करके अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड किया जा सकता है, स्ट्रीम किया जा सकता है या लोगों के बीच फैलाया जा सकता है."
कोर्ट का यह आदेश न केवल उन लोगों पर लागू होता है जिनकी पहचान हो चुकी है, बल्कि उन अज्ञात लोगों पर भी लागू होता है जो फिल्म को अवैध रूप से इंटरनेट पर अपलोड करने की कोशिश कर सकते हैं. अज्ञात लोगों के खिलाफ यह 'डायनेमिक इंजंक्शन'बहुत अहम है, क्योंकि इससे पायरेसी करने वालों के खिलाफ तब भी कार्रवाई की जा सकती है, जब उनकी पहचान पता न हो.
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अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिया है कि ओरिजिनल लिंक हटा दिए जाने के बाद भी, मिरर वेबसाइटों के जरिए पाइरेटेड कंटेंट फिर से सामने आ जाता है. ISP और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया गया है कि 'गॉडपावर मीडिया' की ओर से लिखित नोटिस मिलने पर वे ऐसे लिंक को ब्लॉक कर दें या हटा दें.
गूगल पाइरेटेड लिंक के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सहमत
गूगल LLC और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की ओर से पेश वकीलों ने कंपनी के अनुरोध का विरोध नहीं किया और अदालत को बताया कि वे पाइरेसी की शिकायतों पर कार्रवाई करेंगे. 'गॉडपावर मीडिया' को उन URL की जानकारी संबंधित प्लेटफॉर्म और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) के साथ शेयर करनी होगी, जिन पर फिल्म की अनधिकृत कॉपी या क्लिप मौजूद हैं. इसके बाद, उन्हें उस कंटेंट को ब्लॉक करना होगा या हटाना होगा.
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