World Weirdest Exams: जब हमारे देश में बोर्ड एग्जाम्स या सरकारी नौकरियों की परीक्षाएं होती हैं, तो गजब की तैयारियां देखने को मिली है. बच्चों पर पढ़ाई का प्रेशर बढ़ जाता है, घर में सन्नाटा छा जाता है और एग्जाम सेंटर पर कड़ाई का हाल तो मत ही पूछिए. हाल ही में 21 जून को हुए नीट री-एग्जाम 2026 को ही देख लीजिए, नकल और गड़बड़ी रोकने के लिए सुरक्षा इतनी कड़ी थी कि एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से क्वेश्चन पेपर्स मंगवाने पड़े और सेंटर्स पर छात्रों की ऐसी चेकिंग हुई मानों इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स पर उतरे हों. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में परीक्षाओं को लेकर ऐसे-ऐसे अजीबोगरीब नियम हैं कि सुनकर ही पसीने छूट जाएं. कहीं पेपर के दिन आसमान में उड़ते जहाजों को रोक दिया जाता है, तो कहीं नकल करने पर सीधे 7 साल के लिए जेल में डाल दिया जाता है. आइए जानते हैं दुनिया के 6 अजीब और कड़क इम्तिहानों के बारे में.
गाओकाओ: जब एग्जाम के लिए थम जाता है पूरा देश
चीन की इस नेशनल कॉलेज एंट्रेंस परीक्षा (Gaokao) को दुनिया का सबसे कठिन और थका देने वाला एग्जाम माना जाता है. हर साल करीब 1.3 करोड़ छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं. इस दो-दिन के एग्जाम के दौरान पूरे चीन में जैसे लॉकडाउन लग जाता है. बच्चों की एकाग्रता न बिगड़े और वो ध्यान से पेपर दे सकें, इसलिए एग्जाम सेंटर्स के ऊपर से फ्लाइट्स के उड़ने पर रोक (No-Fly Zone) लगा दी जाती है. आस-पास की सड़कों पर गाड़ियों का आना-जाना बंद कर दिया जाता है. यहां सुरक्षा का जिम्मा स्वाट (SWAT) कमांडो संभालते हैं. क्वेश्चन पेर्स को GPS ट्रैकर लगे बक्सों में सेना की निगरानी में भेजा जाता है. अगर कोई छात्र नकल करते या पेपर लीक करते पकड़ा गया, तो उसे सीधे 7 साल की जेल की सजा होती है.
ऑल सोल्स प्राइज फेलोशिप एग्जाम, यूके
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की यह परीक्षा दुनिया की सबसे अनोखी और लीक से हटकर मानी जाती है. इसमें पास होने वाले को ऑक्सफोर्ड में फेलोशिप मिलती है. इस परीक्षा का फॉर्मेट और सवाल बेहद अजीब होते हैं. उम्मीदवारों को 12 घंटे में 12 अजीबोगरीब सवालों के जवाब देने होते हैं. सवाल कुछ ऐसे होते हैं, 'क्या रोबोट का कोई जेंडर (लिंग) हो सकता है.', 'क्या हमें मंगल ग्रह पर अपनी बस्ती बसानी चाहिए?' या फिर सिर्फ एक शब्द दे दिया जाता है,'प्यार क्या है.' इन सवालों का कोई तय जवाब नहीं होता है. परीक्षक बस यह देखते हैं कि छात्र की सोच कितनी क्रिएटिव और ओरिजनल है.
द कॉमन टेस्ट, जापान
जापान में हर साल जनवरी के दूसरे हफ्ते में 'द कॉमन टेस्ट फॉर यूनिवर्सिटी एडमिशन्स' (Common Test) आयोजित की जाती है, जिसे पहले 'सेंटर टेस्ट' (National Center Test) कहा जाता था. पुराने टेस्ट में सिर्फ टिक-मार्क (MCQ) वाले सवाल होते थे, लेकिन इस नए टेस्ट को बिल्कुल अनोखे तरीके से डिजाइन किया गया है. यहां सिर्फ चीजें याद रखने से काम नहीं चलता, बल्कि यह परीक्षा छात्र की गंभीर सोच, तर्क क्षमता और मुश्किल हालातों में फैसले लेने के हुनर को परखती है. यह एग्जाम शनिवार और रविवार को पूरे जापान में एक साथ होती है और इसे पास किए बिना जापान की टॉप यूनिवर्सिटीज में एंट्री का सपना देखना भी नामुमकिन है. इसमें सुरक्षा के भी कड़क इंतजाम होते हैं.
नाइजीरिया के एग्जाम में बॉर्डर जैसी सुरक्षा
नाइजीरिया में परीक्षा के दौरान चीटिंग को रोकने के लिए जो सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं, उन्हें देखकर लगता है जैसे किसी संवेदनशील जेल या बॉर्डर की सुरक्षा की जा रही हो. यहां एग्जाम सेंटर्स पर 'फ्लाइंग स्क्वॉड' के नाम से हथियारबंद गार्ड्स लगातार गश्त करते हैं. कई बार तो हालात काबू में रखने के लिए सेना तक की मदद ली जाती है. परीक्षा हॉल में मोबाइल फोन ले जाना पूरी तरह बैन होता है और हर छात्र को बायोमेट्रिक स्कैनर से गुजरने के बाद ही एंट्री मिलती है.
द ग्रैंड ओरल बैकालॉरिएट, फ्रांस
फ्रांस में स्कूली पढ़ाई खत्म होने के बाद बैकालॉरिएट (Baccalaureat) नाम का एक कड़ा इम्तिहान होता है. इस परीक्षा का सबसे टफ पार्ट इसका ओरल टेस्ट होता है, जिसे 'ग्रैंड ओरल' कहते हैं. इसमें छात्रों को कोई रिटेन एग्जाम नहीं, बल्कि एग्जामिनर्स के एक पैनल के सामने बैठकर पूरा दिन बिताना होता है. छात्रों को किसी दार्शनिक या खास टॉपिक पर अपनी बात रखनी होती है और सामने बैठे एक्सपर्ट्स के तीखे सवालों के जवाब देकर अपनी बात को सही साबित करना होता है. यह रटने की क्षमता को नहीं, बल्कि छात्र के लॉजिक और सोचने की स्पीड को परखता है.
साउथ कोरिया का 'शुनेंग', जब एग्जाम के लिए थम जाता है पूरा देश
साउथ कोरिया में हर साल नवंबर में होने वाला 'शुनेंग' (Suneung) यानी CSAT सिर्फ एक एग्जाम नहीं है, बल्कि एक ऐसा दिन है जब पूरा देश अपनी रफ्तार रोक देता है. यह 8 घंटे लंबा एग्जाम छात्रों की पूरी जिंदगी और करियर का रुख तय करता है, इसलिए सरकार से लेकर आम जनता तक सब कुछ दांव पर लगा देती है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जब छात्र इंग्लिश का 'लिसनिंग टेस्ट' दे रहे होते हैं, तब देश में 35 मिनट के लिए फ्लाइट्स पर पूरी तरह रोक लगा दी जाती है. यहां तक कि सेना के सैन्य अभ्यास और टैंकों की आवाजाही भी रोक दी जाती है ताकि आसमान से लेकर जमीन तक कोई शोर न हो.
सुबह के वक्त ट्रैफिक जाम न हो, इसके लिए शेयर बाजार और सरकारी दफ्तर एक घंटा देरी से खुलते हैं. अगर कोई स्टूडेंट सेंटर पहुंचने में लेट हो रहा हो, तो वह '112' पर कॉल कर सकता है और पुलिस की गाड़ियां या मोटरसाइकिलें उसे तुरंत फ्री में एग्जाम सेंटर छोड़ती हैं. यह दिन दिखाता है कि एक देश अपने बच्चों के भविष्य के लिए किस हद तक जा सकता है.
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