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मसूरी के वुडस्टॉक स्कूल में कैसे मिलता है एडमिशन? लाखों रुपये में है सालाना फीस

वुडस्टॉक में एडमिशन पाना आसान नहीं है. क्योंकि यहां केवल लाखों रुपये फीस देने से बात नहीं बनती. वुडस्टॉक में एडमिशन के दौरान बच्चों को लिखित टेस्ट और इंटरव्यू जैसी प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ सकता है.

मसूरी के वुडस्टॉक स्कूल में कैसे मिलता है एडमिशन? लाखों रुपये में है सालाना फीस
वुडस्टॉक स्कूल के पूर्व छात्रों की लिस्ट भी काफी दिलचस्प है.

आज हम बात कर रहे हैं मसूरी की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच फैले 250 एकड़ में फैले एक ऐसे स्कूल की जिसे देश के सबसे महंगे और रेप्युटेटेड स्कूलों में गिना जाता है. वुडस्टॉक स्कूल के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर इस स्कूल का इतिहास 170 साल से भी ज्यादा पुराना है. कुदरती खूबसूरती के बीच बने इस स्कूल की पहचान केवल इसकी फीस और शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर से ही नहीं है, बल्कि ये दुनिया के अलग-अलग देशों से आने वाले स्टूडेंट्स के कारण इंटरनेशनल कम्युनिटी कैंपस के तौर पर भी पहचाना जाता है. यहां अलग-अलग बैकग्राउंड के बच्चे साथ में पढ़ते हैं और एकदूसरे के कल्चर करीब से समझते हैं. 

वुडस्टॉक में एडमिशन पाना उतना आसान नहीं है. सिर्फ लाखों रुपये की फीस भर देने से यहां सीट नहीं मिल जाती. यहां एडमिशन के दौरान बच्चों को लिखित टेस्ट और इंटरव्यू जैसी प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस स्कूल में ऐसा क्या खास है कि यहा एडमिशन पाने के लिए लोग लाखों रुपए भरने को तैयार रहते हैं. फिर भी एडमिश पाना आसान नहीं होता. आइए जानते हैं वुडस्टॉक स्कूल की फीस, एडमिशन और उससे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें.

170 साल से भी ज्यादा पुराना है स्कूल

वुडस्टॉक स्कूल की शुरुआत साल 1854 में हुई थी. मसूरी के लैंडौर इलाके में स्थित यह स्कूल खुद को एशिया के सबसे पुराने इंटरनेशनल रेजिडेंशियल स्कूलों में गिनता है. करीब 250 एकड़ में फैला इसका कैंपस जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसा है. भारत के अलावा कई देशों के बच्चे यहां पढ़ते हैं, जिसकी वजह से स्कूल का माहौल दूसरे सामान्य बोर्डिंग स्कूलों से काफी अलग माना जाता है. 

एडमिशन कैसे होता है?

बच्चे को यहां एडमिशन दिलाने के लिए सबसे पहले ऑनलाइन फॉर्म भरना होता है. इसके साथ बच्चे और परिवार से जुड़ी जरूरी जानकारी देनी होती है. स्कूल की टीम इसके बाद पूरी जानकारी देखती है और आगे की प्रोसेस पूरी करती है. यहां सीटें सीमित होती हैं, इसलिए हर साल बड़ी संख्या में पूछताछ होने के बावजूद सभी बच्चों को एडमिशन नहीं मिल पाता.

कितनी है फीस?

वुडस्टॉक स्कूल की फीस बच्चे की क्लास के हिसाब से तय होती है. छोटी क्लासों के छात्रों के लिए फीस कम रहती है, जबकि ऊंची क्लासों में पहुंचने पर यह बढ़ जाती है. स्कूल के 2026-27 के आंकड़ों के मुताबिक, एक बच्चे पर सालभर में करीब 24 लाख रुपये से लेकर 26 लाख रुपये से ज्यादा तक खर्च आ सकता है. इसमें पढ़ाई के साथ बोर्डिंग और कई दूसरी सुविधाओं का खर्च भी शामिल है. यही वजह है कि वुडस्टॉक का नाम देश के सबसे महंगे स्कूलों में लिया जाता है.

सिर्फ फीस भरने से काम नहीं चलेगा

अगर बच्चा पहली बार स्कूल में एडमिशन ले रहा है तो फीस के अलावा कुछ और रकम भी जमा करनी पड़ती है. स्कूल 13 हजार रुपये एप्लिकेशन फीस लेता है. इसके अलावा 4.75 लाख रुपये एस्टैब्लिशमेंट फीस देनी होती है, जो वापस नहीं मिलती. साथ ही 4.75 लाख रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट भी जमा करना पड़ता है. इस हिसाब से अगर किसी बच्चे का नया एडमिशन ग्रेड 11 या 12 में होता है तो पहले साल परिवार का कुल खर्च करीब 35 लाख रुपये तक पहुंच सकता है.

सिर्फ पढ़ाई नहीं, खेल और पहाड़ भी हैं पहचान

वुडस्टॉक स्कूल की पहचान सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है. यहां बच्चों को क्रिकेट, फुटबॉल, बास्केटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन, तैराकी और स्क्वैश जैसे खेलों में हिस्सा लेने का मौका मिलता है. इसके अलावा ट्रेकिंग, रॉक क्लाइम्बिंग और दूसरी आउटडोर एक्टिविटीज भी स्कूल जीवन का हिस्सा हैं. पहाड़ों के बीच बसे कैंपस की वजह से प्रकृति से जुड़ी एक्टिविटीज यहां की खास पहचान मानी जाती हैं.

टॉम ऑल्टर से लेकर नयनतारा सहगल भी पढ़ चुके हैं इस स्कूल में

वुडस्टॉक स्कूल के पूर्व छात्रों की लिस्ट भी काफी दिलचस्प है. हिंदी फिल्मों और टीवी की दुनिया में पहचान बनाने वाले टॉम ऑल्टर, चर्चित लेखक स्टीफन ऑल्टर, लेखिका नयनतारा सहगल और दुनिया के सबसे लोकप्रिय आइडिया प्लेटफॉर्म TED से जुड़े क्रिस एंडरसन इसी स्कूल में पढ़ चुके हैं. इन नामों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्कूल का असर सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं रहा है.

एक तरफ 170 साल से ज्यादा पुराना इतिहास, दूसरी तरफ पहाड़ों के बीच फैला विशाल कैंपस और दुनिया भर से आने वाले छात्र. यही वजह है कि वुडस्टॉक स्कूल का नाम अक्सर देश के सबसे चर्चित बोर्डिंग स्कूलों में लिया जाता है. फीस भले ही आम परिवारों की पहुंच से काफी दूर हो, लेकिन इसके बावजूद हर साल बड़ी संख्या में परिवार यहां एडमिशन के लिए कोशिश करते हैं.

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