यूपी में 10 जून यानी कल 33 पीसीएस अधिकारी IAS बनने वाले हैं. आमतौर पर लोग जानते हैं कि यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा पास करके सीधे आईएएस (IAS) अफसर बना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि राज्यों में तैनात PCS (Provincial Civil Service) अधिकारी भी प्रमोट होकर आईएएस बन सकते हैं? अगर आपका जवाब न है तो आज के इस आर्टिकल में आपको पता चल जाएगा आखिर पीसीएस से आईएएस कैसे बनते हैं, DPC क्या है, इसकी प्रोसेस क्या है और इसके नियम कितने कड़े होते हैं.
क्या है DPC?DPC का फुल फॉर्म होता है डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (Departmental Promotion Committee). इसे हिंदी में विभागीय पदोन्नति समिति कहा जाता है. यह केंद्र और राज्य सरकार के बड़े अधिकारियों की एक हाई-लेवल मीटिंग होती है. इसी कमिटी की हरी झंडी मिलने के बाद किसी राज्य के सीनियर पीसीएस अधिकारी को प्रमोट करके आईएएस कैडर दिया जाता है. यह किसी भी राज्य लोक सेवा आयोग के अफसर के पूरे करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट होता है.
ये तो हो गई डीपीसी की फुल फॉर्म और इसके रोल की बात अब आते हैं इसकी कमेटी में कौन-कौम शामिल होते हैं-
इस कमिटी में कौन-कौन बैठता है?
आईएएस पद पर प्रमोशन का फैसला कोई एक व्यक्ति या सिर्फ राज्य सरकार अकेले नहीं कर सकती. इसके लिए जो कमिटी बैठती है, उसकी अध्यक्षता हमेशा UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) के चेयरमैन या उनके द्वारा तय किए गए कोई सदस्य करते हैं.
UPSC के चेयरमैन या सदस्यकमिटी के अध्यक्ष के रूप में.
राज्य के चीफ सेक्रेटरी (Chief Secretary)राज्य सरकार की तरफ से सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी.
नियुक्ति विभाग के सचिवराज्य के कार्मिक या नियुक्ति विभाग के सीनियर अफसर.
केंद्र सरकार के प्रतिनिधिभारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की तरफ से भेजे गए सीनियर आईएएस अधिकारी.
अब आते हैं सिलेक्शन प्रोसेस पर-
चयन के कड़े नियम और योग्यताDPC की बैठक में किसी भी अफसर के नाम पर मुहर लगाना इतना आसान नहीं होता. इसके लिए बहुत कड़े नियमों और रिकॉर्ड्स को देखा जाता है:
नौकरी का समयनियमों के मुताबिक, एक पीसीएस अधिकारी को डिप्टी कलेक्टर या उसके बराबर के पद पर कम से कम 8 साल की परमानेंट नौकरी पूरी करनी जरूरी है.
हालांकि, जमीन पर पदों की कमी के चलते इसमें 12 से 15 साल या उससे ज्यादा का समय भी लग जाता है.
सालाना रिपोर्ट (ACR/APAR)कमिटी अफसरों के पिछले 5 से 10 सालों के काम का रिकॉर्ड (एनुअल परफॉर्मेंस असेसमेंट रिपोर्ट) देखती है. इसमें अफसर की रेटिंग वेरी गुड (Very Good) या आउटस्टैंडिंग (Outstanding) होनी चाहिए.
विजिलेंस क्लीयरेंससबसे जरूरी बात यह है कि अफसर के खिलाफ कोई विभागीय जांच, भ्रष्टाचार का मामला या कोर्ट केस नहीं चल रहा होना चाहिए. विजिलेंस की रिपोर्ट पूरी तरह साफ होनी चाहिए.
आयु सीमाजिस साल की वैकेंसी के लिए प्रमोशन हो रहा है, उस साल की 1 जनवरी को अफसर की उम्र 56 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
कैसे चुने जाते हैं अधिकारी? स्टेप 1: खाली पदों को गिननाहर राज्य में आईएएस अफसरों का एक कोटा तय होता है. कुल पदों में से करीब 33% पद राज्य के पीसीएस अफसरों को प्रमोट करके भरे जाते हैं. DoPT और राज्य सरकार मिलकर हर साल खाली पदों की संख्या तय करते हैं.
स्टेप 2: जोन ऑफ कंसीडरेशनअगर राज्य में 10 पद खाली हैं, तो राज्य सरकार सीनियरिटी के हिसाब से तीन गुना यानी शुरुआती 30 अफसरों के नामों की लिस्ट तैयार करेगी. इसे जोन ऑफ कंसीडरेशन कहते हैं.
स्टेप 3: फाइनल लिस्ट तैयार होनाUPSC चेयरमैन की अगुवाई में DPC की मीटिंग होती है. इन 30 अफसरों के सारे रिकॉर्ड देखने के बाद सबसे बेहतरीन अफसरों की एक 'Select List' फाइनल की जाती है.
स्टेप 4: दिल्ली से नोटिफिकेशनDPC की फाइनल लिस्ट राज्य सरकार की मंजूरी के बाद दिल्ली (DoPT) भेजी जाती है. वहां से मुहर लगने के बाद भारत के राष्ट्रपति के दस्तखत से नोटिफिकेशन जारी होता है. इसके बाद पीसीएस अफसर आधिकारिक तौर पर आईएएस बन जाते हैं.
प्रमोट होने के बाद इन अफसरों को शुरुआत में विशेष सचिव, एडीएम (ADM) या किसी विभाग में डायरेक्टर का पद मिलता है. आगे चलकर इन्हें जिला मजिस्ट्रेट (DM) या कलेक्टर के रूप में भी तैनात किया जाता है.
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