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जब UPSC का पेपर होने लगा था फोटो कॉपी, संसद तक पहुंचा था पेपर लीक का बवाल

1992 में UPSC परीक्षा के दौरान इलाहाबाद केंद्र पर पेपर की फोटोकॉपी का मामला सामने आया. जिसने देशभर में हंगामा मचा दिया. यह घटना संसद तक पहुंची और परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठे. हालांकि जांच में पेपर लीक की पुष्टि नहीं हुई.

जब UPSC का पेपर होने लगा था फोटो कॉपी, संसद तक पहुंचा था पेपर लीक का बवाल
UPSC Paper Leak Case: सिविल सर्विस एग्जाम में मचा था पेपर लीक को लेकर बवाल

UPSC Paper Leak: किसी भी बड़ी परीक्षा के बाद पेपर लीक का केस होने का डर सताने लगता है. खासतौर से नीट परीक्षा को लेकर ये डर थोड़ा आम सा हो गया है. लेकिन जब बात UPSC जैसी सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा की हो. तो मामला और भी ज्यादा गंभीर हो जाता है. साल 1992 में ऐसा ही एक वाकया सामने आया था. जब यूपीएससी की सिविल सेवा की प्रिलिमिनरी एग्जाम के दौरान एक परीक्षा केंद्र पर पेपर की फोटोकॉपी का मामला पकड़ में आया. ये खबर देखते ही देखते चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गई और इसकी गूंज संसद तक पहुंच गई. सवाल उठने लगे कि क्या वाकई UPSC जैसी परीक्षा भी पूरे एहतियात से करवाना मुश्किल हो रहा है?

इलाहाबाद सेंटर पर पकड़ा गया मामला

17 जून 1992 को देशभर में UPSC की प्रिलिमिनरी परीक्षा हो रही थी. दोपहर के समय जब जनरल स्टडीज का पेपर शुरू हुआ. उसी दौरान तब के इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के एक परीक्षा केंद्र पर बड़ा खुलासा हुआ. वहां एक इनविजिलेटर को पेपर की फोटोकॉपी करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया. बताया गया कि वो सेट C और सेट D के पेपर्स की कॉपी बना रहा था. जैसे ही ये बात सामने आई परीक्षा केंद्र पर हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई. कुछ ही देर में मूल पेपर और फोटोकॉपी की गई प्रतियां जब्त कर ली गईं.

कौन था इसके पीछे और क्या था मकसद?

जांच में सामने आया कि ये काम अकेले व्यक्ति का नहीं था. पकड़े गए अधिकारी ने दावा किया कि उसे ये निर्देश तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक की तरफ से मिला था. बताया गया कि इसका मकसद पेपर लीक कराना नहीं बल्कि सवालों का एक ‘क्वेश्चन बैंक' तैयार करना था. जिसे आगे इस्तेमाल किया जा सके. हालांकि इस दावे ने पूरे मामले को और विवादित बना दिया. यूपीएससी ने तुरंत जांच कराई और पाया कि पेपर बाहर के छात्रों तक नहीं पहुंचा था. इसलिए परीक्षा रद्द नहीं की गई.

संसद तक पहुंचा विवाद और उठे सवाल

ये मामला धीरे-धीरे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया. संसद में भी इसकी गूंज सुनाई दी और कई सांसदों ने परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाए. सरकार की तरफ से जवाब देते हुए कहा गया कि कई बार ऐसी शिकायतें मिलती हैं. लेकिन हर घटना को पेपर लीक नहीं माना जा सकता. इस केस में भी चूंकि पेपर परीक्षा के दौरान ही पकड़ा गया था और किसी उम्मीदवार को फायदा नहीं मिला. इसलिए इसे पूरी तरह से पेपर लीक नहीं माना गया.

UPSC की सख्त सुरक्षा व्यवस्था

इस घटना के बाद UPSC ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था और पुख्ता कर दी. आज परीक्षा के पेपर सख्त निगरानी में परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले केंद्रों पर पहुंचाए जाते हैं. हर पैकेट सील रहता है और उसे उम्मीदवारों के सामने ही खोला जाता है. किसी भी गड़बड़ी की तुरंत रिपोर्टिंग अनिवार्य होती है. इसी सख्त सिस्टम की वजह से अब UPSC को देश की सबसे सुरक्षित परीक्षाओं में गिना जाता है.

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