UPSC CSE 2026 Prelims Exam: भारत में बड़ी संख्या में युवाओं का सपना IAS या IPS अफसर बनना होता है. लेकिन इस सपने को पूरा करने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है और रास्ता कितना कड़ा है, इसका अंदाजा आप हर साल परीक्षा में शामिल होने वाले कैंडिडेट्स और सीटों की संख्या से लगा सकते हैं. UPSC की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है. इस बार (UPSC CSE 2026) प्रीलिम्स परीक्षा 24 मई 2026 को और मेन्स परीक्षा 21 अगस्त 2026 से आयोजित होने जा रही है. आइए जानते हैं इस परीक्षा का कंपटीशन कितना तगड़ा है, इसे हर साल कितने लोग देते हैं, प्रीलिम्स में कितने पास होते हैं.
UPSC प्रीलिम्स हर साल कितने लोग देते हैं
यूपीएससी प्रीलम्स 2026 की ही बात करें, तो एक अनुमान के मुताबिक, इस बार लगभग 13 से 15 लाख आवेदन किए गए हैं मतलब फॉर्म भरा है. इनमें से करीब 8 से 10 लाख उम्मीदवार ही एग्जाम हॉल तक पहुंचते हैं. इनमें से महज कुछ ही कैंडिडेट्स मेंस तक पहुंचते हैं और इंटरव्यू तक पहुंचते-पहुंचते संख्या बेहद कम हो जाती है.
UPSC CSE प्रीलिम्स में कितने लोग पास होते हैं
UPSC का सबसे मुश्किल हिस्सा प्रीलिम्स ही होता है. यहीं से असली छंटनी शुरू हो जाती है. प्रीलिम्स के बाद सिर्फ 14,000 से 16,000 कैंडिडेट्स ही मेंस के लिए चुने जाते हैं. यानी एग्जाम देने वाले कैंडिडेट्स में से महज 1.5% से 2% लोग ही आगे बढ़ पाते हैं. यह संख्या उपलब्ध सीटों से करीब 12 से 15 गुना ज्यादा होती है.
क्या हर साल प्रीलिम्स में इतने लोग ही पास होते हैं
एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह पूरी तरह वैकेंसी पर निर्भर करता है. जैसे UPSC CSE 2026 के लिए करीब 933 पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया है. इससे पहले 2025 में 979 और 2024 में 1056 पद निकाले गए थे. इसका मतलब अगर वैकेंसी ज्यादा होती है तो कैंडिडेट्स संख्या भी बढ़ जाती है और अगर कम, तो प्रीलिम्स पास करने वालों की संख्या कम रहती है. कटऑफ के बाद करीब 12 से 15 हजार उम्मीदवारों को ही मेन्स परीक्षा में बैठने का मौका मिलता है. परीक्षा में पासिंग रेट 1% से 2.5% तक रहता है.
UPSC में सेलेक्शन प्रोसेस क्या है
1. सबसे पहले प्रीलिम्स एग्जाम देना पड़ता है, जो ऑब्जेक्टिव टेस्ट होता है. इसे पास करना जरूरी है, लेकिन इसके नंबर फाइनल मेरिट में नहीं जुड़ते हैं.
2. इसे पास करने के बाद मेंस एग्जाम होता है. यह पूरी तरह लिखने वाला यानी डिस्क्रिप्टिव एग्जाम होता है. इसमें कुल 9 पेपर होते हैं. आपकी असली नॉलेज और लिखने की स्पीड यहीं जांची जाती है. फाइनल सेलेक्शन में इसके नंबर बहुत मायने रखते हैं.
3. तीसरा और आखिरी स्टेप इंटरव्यू होता है. जब आप मेन्स पास कर लेते हैं, तो आपको दिल्ली यूपीएससी ऑफिस पर्सनालिटी टेस्ट के लिए बुलाया जाता है. यहां आपके नॉलेज से ज्यादा आपके बात करने के तरीके, फैसले लेने की क्षमता और कॉन्फिडेंस को देखा जाता है. फिर फाइनल मेरिट तैयार की जाती है, जिसमें पास कैंडिडेट्स IAS, IPS और IFS जैसे पदों पर सेलेक्ट होते हैं.
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