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Black Cat Commando और SPG में क्या है अंतर? किसकी ट्रेनिंग है ज्यादा कठिन, कैसे होती है भर्ती, जानें फुल डिटेल

Difference Between SPG And NSG : कई लोग समझते हैं कि SPG और NSG एक ही तरह की फोर्स हैं, लेकिन हकीकत इससे अलग है. दोनों की जिम्मेदारियां, ट्रेनिंग, सिलेक्शन प्रोसेस और काम करने का तरीका काफी अलग होता है.

Black Cat Commando और SPG में क्या है अंतर? किसकी ट्रेनिंग है ज्यादा कठिन, कैसे होती है भर्ती, जानें फुल डिटेल
SPG और NSG दोनों की ट्रेनिंग देश की सबसे कठिन सिक्योरिटी ट्रेनिंग्स में गिनी जाती है.

Difference Between SPG And NSG : प्रधानमंत्री के आसपास आपने अक्सर काले चश्मे, ईयरपीस और फॉर्मल सूट पहने सुरक्षा अधिकारियों को देखा होगा. दूसरी तरफ जब कहीं आतंकी हमला होता है या बंधकों को छुड़ाने का ऑपरेशन चलाया जाता है, तो हेलमेट, बुलेटप्रूफ जैकेट और काले टैक्टिकल गियर में कमांडो नजर आते हैं. प्राइम मिनिस्टर की सिक्योरिटी SPG यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप का हिस्सा होते हैं. जबकि किसी बड़े आतंकी हमले या हाई-रिस्क ऑपरेशन में NSG कमांडो अपना जौहर दिखाते हैं. इन्हें ‘ब्लैक कैट कमांडो' भी कहा जाता है.

दोनों की वर्दी अलग है, काम अलग है और सिलेक्शन प्रोसेस भी अलग है. यही वजह है कि SPG और NSG भारत की दो सबसे पॉपुलर और खास सिक्योरिटी फोर्स होने के बावजूद बिल्कुल अलग भूमिकाएं निभाती हैं. आखिर इनमें भर्ती कैसे होती है, ट्रेनिंग कितनी कठिन होती है और कौन किसकी सुरक्षा करता है? आइए पूरी कहानी जानते हैं.

क्या होती है SPG?

SPG यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप भारत की सबसे खास सिक्योरिटी एजेंसियों में से एक है. इसका गठन प्रधानमंत्री की नजदीकी सुरक्षा के लिए किया गया था. SPG कैबिनेट सचिवालय के अधीन काम करती है और इसका SPG का मुख्य फोकस प्रधानमंत्री की क्लोज सिक्योरिटी पर होता है. SPG की स्थापना 1988 में संसद द्वारा पारित SPG एक्ट के तहत हुई थी.

क्या है NSG?

NSG यानी नेशनल सिक्योरिटी गार्ड को आमतौर पर "ब्लैक कैट कमांडो" के नाम से जाना जाता है. यह गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाली देश की प्रमुख काउंटर-टेरर फोर्स है. इसका गठन 1984 के बाद बढ़ती आतंकी चुनौतियों से निपटने के लिए किया गया था. NSG का इस्तेमाल केवल विशेष परिस्थितियों में किया जाता है, जैसे बंधक संकट, आतंकवादी हमले और हाई-रिस्क ऑपरेशन. 

SPG और NSG में भर्ती कैसे होती है? 

SPG और NSG दोनों में आमतौर पर सीधी भर्ती नहीं होती. इन फोर्स में पहुंचने के लिए पहले भारतीय सेना, CRPF, BSF, ITBP, CISF, SSB या दूसरी केंद्रीय सुरक्षा बलों का हिस्सा बनना पड़ता है. इसके बाद डेपुटेशन और सिलेक्शन प्रोसेस के जरिए जवानों का चयन किया जाता है. सिलेक्शन के दौरान फिजिकल फिटनेस, मेडिकल टेस्ट, शूटिंग स्किल, मानसिक मजबूती, प्रतिक्रिया क्षमता और बैकग्राउंड की गहन जांच की जाती है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक शुरुआती स्क्रीनिंग में ही बड़ी संख्या में लोग बाहर हो जाते हैं. सिलेक्ट होने वाले जवानों को खास ट्रेनिंग दी जाती है, जिसके बाद ही उन्हें SPG या NSG जैसी हाई-प्रोफाइल यूनिट्स में तैनाती मिलती है.

कितनी कठिन होती है ट्रेनिंग?

SPG और NSG दोनों की ट्रेनिंग देश की सबसे कठिन सिक्योरिटी ट्रेनिंग्स में गिनी जाती है. कमांडो को क्लोज प्रोटेक्शन, एडवांस वेपन हैंडलिंग, हाई-स्पीड रिस्पॉन्स, सर्विलांस, एंटी-सबोटाज तकनीक और इमरजेंसी से निपटने की ट्रेनिंग दी जाती है. NSG कमांडो को शहरी युद्ध, आतंकवाद-रोधी ऑपरेशन और बंधक बचाव मिशन जैसी विशेष ट्रेनिंग भी दी जाती है.

कौन ज्यादा ताकतवर है?

इन दोनों में तुलना करना ही सही नहीं, क्योंकि दोनों की भूमिका अलग-अलग है. SPG का एक्सपर्टाइज एरिया प्रधानमंत्री की सुरक्षा है, जबकि NSG आतंकवाद-रोधी ऑपरेशन्स में एक्सपर्ट मानी जाती है. दोनों फोर्स को अलग-अलग मकसद के लिए तैयार किया गया है और दोनों अपने-अपने क्षेत्र में खास महत्व रखती हैं.

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