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दो बार असफलता के बाद भी नहीं मानी हार, BPSC परीक्षा पास कर नवादा के विकलेश बने प्रोबेशन ऑफिसर

विकलेश ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही प्रशासनिक सेवा की तैयारी शुरू कर ली थी. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, परिवार और शुभचिंतकों को दिया है. विकलेश बीपीएससी 71वीं परीक्षा में भी शामिल हो चुके हैं.

दो बार असफलता के बाद भी नहीं मानी हार,  BPSC परीक्षा पास कर नवादा के विकलेश बने प्रोबेशन ऑफिसर
विकलेश की प्रारंभिक शिक्षा नवादा में ही हुई.

कहते हैं कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जो रास्ते की मुश्किलों से हार नहीं मानते. नवादा के विकलेश कुमार उर्फ छोटू ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है. बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में उन्होंने ऑल ओवर मेरिट सूची में 582वीं रैंक और प्रोबेशन ऑफिसर मेरिट में 16वां स्थान हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे नवादा जिले का नाम रोशन किया है. विकलेश की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि यह उन्हें पहले ही प्रयास में नहीं मिली. उन्होंने बताया कि शुरुआती दो प्रयासों में वह प्रारंभिक परीक्षा तक पास नहीं कर सके थे. लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया. उन्होंने अपनी कमजोरियों को पहचाना, पढ़ाई की रणनीति में बदलाव किया और पूरे समर्पण के साथ तैयारी जारी रखी. आखिरकार तीसरे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने यह उल्लेखनीय सफलता हासिल की.

दिन रात की मेहनत

नवादा नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष राजेश कुमार मुरारी के छोटे भाई विकलेश की प्रारंभिक शिक्षा नवादा में ही हुई. उन्होंने गांधी इंटर स्कूल से मैट्रिक और गंगा रानी सिन्हा कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने एनआईटी राउरकेला से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री प्राप्त की. इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखा और उसी दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए.

संघर्ष को बनाया सफलता का आधार

उनके पिता विरेंद्र कुमार शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हैं, जबकि माता शकुंतला देवी गृहिणी हैं. परिवार में शिक्षा, अनुशासन और सेवा की मजबूत परंपरा रही है. बड़े भाई संतोष कुमार उर्फ मुकेश शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं, पंकज कुमार वर्मा सीनियर इंजीनियर हैं, जबकि उपेंद्र नाथ वर्मा भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी हैं. परिवार का यह प्रेरणादायी माहौल भी विकलेश के संघर्ष और सफलता का आधार बना.

विकलेश बीपीएससी 71वीं परीक्षा और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की मुख्य परीक्षा में भी शामिल हो चुके हैं. उनका लक्ष्य अभी और ऊंचाइयों को छूना है. अपनी सफलता का श्रेय वह अपने माता-पिता, गुरुजनों, परिवार और शुभचिंतकों को देते हैं. विकलेश की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए एक संदेश है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की ओर बढ़ने का एक पड़ाव होती है. यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और आत्मविश्वास अडिग हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती.

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Ashok Priyadarshi
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