इस साल संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में लगभग 5.49 लाख उम्मीदवार शामिल हुए हैं. 24 मई को इस परीक्षा का आयोजन देशभर के 83 शहरों में स्थित 2072 परीक्षा केंद्रों पर किया था. इस साल सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा काफी कठिन आई है. परीक्षा कठिन आने पर कई उम्मीदवारों ने निराशा भी जाहिर की है. वहीं अब इस परीक्षा को लेकर यूपीएससी अध्यक्ष अजय कुमार का बयान सामने आया है. जिसमें उन्होंने खुद माना है कि इस साल सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा थोड़ी कठिन थी. यूपीएससी चेयरमैन अजय कुमार ने लिंक्डिन पर एक पोस्ट शेयर कर CSE प्रीलिम्स पर रिएक्शन देते हुए लिखा, "मैं समझता हूं कि इस साल का प्रीलिम्स कई एस्पिरेंट्स के लिए काफी टफ और चैलेंजिंग लगा. ऐसी सिचुएशन में, ऑफिशियल प्रोविजनल की बहुत जरूरी क्लैरिटी देती है".

यूपीएससी अध्यक्ष अजय कुमार ने आगे लिखा, "ज्यादातर जवाब स्टैंडर्ड टेक्स्टबुक्स, गवर्नमेंट वेबसाइट्स, गवर्नमेंट प्रेस रिलीज और जाने-माने अखबारों पर आधारित होते हैं. ये वो मुख्य सोर्स हैं जिन पर सीरियस एस्पिरेंट्स भरोसा करते हैं".

"AI की मदद से बनाया गया पेपर"
यूपीएससी अध्यक्ष अजय कुमार के इस पोस्ट पर कई तरह के रिएक्शन उम्मीदवारों की तरफ से आ रहा हैं. एक ने अजय कुमार के इस पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, "एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर जो पहले भी इंटरव्यू दे चुका है, यह पेपर कठिन नहीं था; बल्कि यह बेतुका और बेहद खराब ढंग से तैयार किया गया था." ऐसा प्रतीत होता है कि समय की कमी के कारण, इंसानों के बजाय सवालों को तैयार करने के लिए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल किया गया था".

एक अन्य उम्मीदवार ने लिथा, आपने पेपर को इतना बेतुका और अन्यायपूर्ण बनाकर लाखों छात्रों के सपनों को मार डाला है. आपको अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. अब क्या आप यह उम्मीद करते हैं कि हम वेदों और रागों का गहन अध्ययन करना शुरू कर दें? क्या आपने नोबेल पुरस्कार के प्रश्न देखे हैं? आपने CSAT को इतना कठिन क्यों बना दिया? क्या यह उन छात्रों के साथ न्याय है जिनका बैकग्राउंड इंजीनियरिंग का नहीं है?

"उम्मीदवारों के सपनों को चकनाचूर किया"
एक अन्य पोस्ट में लिखा गया, इस सिस्टम ने उम्मीदवारों के सपनों को चकनाचूर कर दिया है. जो बात कभी यह कहकर कही जाती थी कि "आसमान के नीचे की कोई भी चीज़ परीक्षा में पूछी जा सकती है," अब ऐसा लगता है मानो कमीशन ने इसे सचमुच ही मान लिया हो और धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाकर "पूरे ब्रह्मांड की हर चीज़" तक पहुंचा रहा हो.
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