State Literecy rate 2026 : सरकारी स्कूलों का नाम सुनते ही आज भी कई लोगों के मन में कम टीचर, खराब बिल्डिंग और कमजोर पढ़ाई की तस्वीर बन जाती है. लेकिन अब हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं. हाल ही में सामने आई शिक्षा से जुड़ी रिपोर्ट बताती है कि सरकारी स्कूलों में पहले के मुकाबले काफी सुधार हुआ है. दूसरी ओर, देश की साक्षरता दर के नए आंकड़ों ने भी ये साफ कर दिया है कि पढ़ाई के मामले में कौन से राज्य सबसे आगे हैं और किन राज्यों को अभी ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है. ये रिपोर्ट सिर्फ आंकड़े नहीं बताती, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलावों की भी तस्वीर दिखाती है.
साक्षरता में कौन सा राज्य सबसे आगे
भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) रिपोर्ट के मुताबिक, साक्षरता के मामले में मिजोरम पूरे देश में पहले नंबर पर है. यहां की साक्षरता दर 98.2 प्रतिशत दर्ज की गई है. इसके बाद लक्षद्वीप 97.3 प्रतिशत, नागालैंड 95.7 प्रतिशत और केरल 95.3 प्रतिशत के साथ टॉप राज्यों में शामिल हैं. मेघालय, त्रिपुरा, चंडीगढ़, गोवा, पुडुचेरी और मणिपुर भी 92 प्रतिशत से ज्यादा साक्षरता दर के साथ टॉप-10 में अपनी जगह बनाए हुए हैं.
इन राज्यों की सफलता की क्या है वजह
रिपोर्ट से पता चलता है कि जिन राज्यों ने शिक्षा पर लगातार ध्यान दिया, वहां अच्छे नतीजे देखने को मिले हैं. स्कूलों तक आसान पहुंच, बेहतर सुविधाएं और पढ़ाई को लेकर बढ़ती जागरूकता का असर अब साफ दिखाई दे रहा है. खास बात ये है कि पूर्वोत्तर के कई राज्यों ने शानदार प्रदर्शन करके सभी का ध्यान खींचा है.
किन राज्यों को अभी और मेहनत करनी होगी
रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश 72.6 प्रतिशत साक्षरता दर के साथ सबसे नीचे है. इसके बाद बिहार 74.3 प्रतिशत, मध्य प्रदेश 75.2 प्रतिशत, राजस्थान 75.8 प्रतिशत, झारखंड 76.7 प्रतिशत, तेलंगाना 76.9 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश 78.2 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ 78.5 प्रतिशत, ओडिशा 79 प्रतिशत और लद्दाख 81 प्रतिशत के साथ सूची में नीचे हैं. इन राज्यों में शिक्षा को और मजबूत बनाने की जरूरत है.
सरकारी स्कूलों से आई अच्छी खबर
सरकारी स्कूलों को लेकर आई नई रिपोर्ट उम्मीद बढ़ाने वाली है. रिपोर्ट के मुताबिक अब पहले के मुकाबले कम बच्चे बीच में पढ़ाई छोड़ रहे हैं. स्कूलों में टीचरों की संख्या बढ़ी है. इंटरनेट और कंप्यूटर जैसी सुविधाएं भी बेहतर हुई हैं. साथ ही लड़कियों का दाखिला भी पहले से बढ़ा है. अगर इसी तरह सुधार जारी रहा, तो आने वाले सालों में देश की साक्षरता दर और बेहतर हो सकती है.
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