तमिलनाडु सरकार ने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक अनोखी और काम की पहल शुरू की है. राज्य के 300 ग्रीन स्कूलों में अब क्लाइमेट एजुकेशन के साथ कूल रूफ सिस्टम भी लागू किया जा रहा है. 19 जनवरी 2026 को शुरू हुई ये योजना पढ़ाई को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखती, बल्कि बच्चों को नेचर और ग्लोबल वार्मिंग से सीधे जोड़ती है. इसका मकसद ये है कि स्कूल गर्मी से राहत देने वाली सुरक्षित जगह बनें और बच्चे समझदार और जिम्मेदार नागरिक बनें.
स्कूल बनेंगे क्लाइमेट सीखने की लैब
इस पहल के जरिए स्कूलों को लिविंग लैब की तरह तैयार किया गया है. यहां बच्चे क्लाइमेट चेंज, पानी और बिजली की बचत, पर्यावरण सुरक्षा जैसे विषयों को एक्टिविटीज के जरिए समझेंगे. स्टूडेंट नेचर कैंप, टीचर्स ट्रेनिंग और सूझल अरिवोम क्लाइमेट क्विज जैसी गतिविधियां बच्चों की रुचि बढ़ा रही हैं. पढ़ाई अब सिर्फ क्लासरूम तक नहीं रहेगी, बल्कि बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ेगी.
टीचर्स निभाएंगे बड़ी भूमिका
सरकार इस मिशन में 38 जिलों से 4000 टीचर्स को क्लाइमेट एंबेसडर बना रही है. इनमें से आधे टीचर्स सरकारी स्कूलों से होंगे. इन्हें खास ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि ये बच्चों को आसान भाषा में पर्यावरण की अहमियत समझा सकें. सलेम में शुरू हो रही रेजिडेंशियल ट्रेनिंग से टीचर्स को नए तरीके से पढ़ाने का अनुभव मिलेगा.
कूल रूफ से कम होगी गर्मी
तमिलनाडु में गर्मी बच्चों की पढ़ाई पर असर डालती है. कई स्कूलों में तापमान 38 से 40 डिग्री तक पहुंच जाता है. कूल रूफ तकनीक में छत पर खास सफेद कोटिंग की जाती है, जिससे गर्मी वापस लौट जाती है. इससे क्लासरूम का तापमान 3 से 4 डिग्री तक कम हो जाता है. बच्चे ज्यादा आराम से पढ़ पाते हैं और पंखों और एसी पर खर्च भी घटता है.
ग्रीन स्कूल दिखा रहे हैं रास्ता
पायलट स्कूलों में सोलर पैनल से बिजली की अच्छी बचत देखी गई है. हर स्कूल में करीब 46 फीसदी बिजली कम खर्च हो रही है. अगर ये मॉडल पूरे राज्य में अपनाया गया, तो स्कूल और अस्पतालों की ज्यादातर बिजली सोलर से पूरी हो सकती है. ग्रीन डिजाइन, ठंडे क्लासरूम और क्लाइमेट एजुकेशन मिलकर बच्चों के लिए बेहतर माहौल बना रहे हैं. ये पहल दिखाती है कि सही सोच से शिक्षा और पर्यावरण दोनों को मजबूत किया जा सकता है.
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