CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) मूल्यांकन प्रणाली को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार से मामले में अपना जवाब और संबंधित रिकॉर्ड पेश करने को कहा है. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि करीब 1.68 लाख छात्रों ने CBSE की कंप्लेन विंडो के माध्यम से आवेदन किया था और उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन किया गया.
मेहता ने कहा कि इस संबंध में उन्होंने एक नोट तैयार किया है और सरकार से चर्चा के बाद सोमवार को हलफनामे के माध्यम से अदालत के समक्ष जवाब रखना चाहते हैं. उन्होंने अदालत से सोमवार तक का समय मांगा है. इस मामले की एक सदस्यीय समिति ने जांच भी की थी.
सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि मूल्यांकन से जुड़ी शिकायतों के लिए एक सदस्यीय समिति गठित की गई थी और छात्रों को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए एक सप्ताह की विंडो दी गई थी. वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि कई छात्रों की शिकायतें अभी भी बनी हुई है. उन्होंने कहा कि कुछ छात्रों ने प्रवेश परीक्षाएं तो पास कर लीं, लेकिन CBSE के परिणाम में न्यूनतम आवश्यक अंक नहीं आने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा.
याचिकाकर्ता ने इसी आधार पर कंप्लेन विंडो दोबारा खोलने की मांग की. ताकि ऐसे छात्रों को भी अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर शिकायत दर्ज कराने का अवसर मिल सके, जो पहले इसका लाभ नहीं उठा पाए.
JEE समेत प्रवेश परीक्षाओं का भी मुद्दा उठा
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि CBSE के अंकों का संबंध अन्य प्रवेश परीक्षाओं और दाखिलों से है तथा उन परीक्षाओं को अनिश्चित समय तक टाला नहीं जा सकता है. उन्होंने JEE Main जैसी परीक्षाओं का उदाहरण दिया. अब केंद्र सरकार सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष और संबंधित दस्तावेज पेश करेगी.
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