आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने NDTV को दिए एक खास इंटरव्यू में भारत के एजुकेशन सिस्टम पर खुलकर बात की. इंटरव्यू के दौरान सद्गुरु ने एजुकेशन सिस्टम पर बात करते हुए कहा कि हमारे देश का एजुकेशन मॉडल पुराना हो गया है. सद्गुरु ने कहा, "भारत की शिक्षा व्यवस्था में पूरी तरह बदलाव की जरूरत है". उन्होंने तर्क दिया कि पुराने पड़ चुके मॉडल को जारी रखने से युवा भविष्य के लिए तैयार नहीं हो पाएंगे. उन्होंने कहा कि "अगर देश आज अपनी युवा आबादी का सही इस्तेमाल करने में नाकाम रहता है, तो अगले 30 सालों में भारत में दुनिया की सबसे बड़ी अनुत्पादक बुजुर्ग आबादी हो सकती है. उन्होंने कहा कि शिक्षा को आधुनिक भारत की जरूरतों के हिसाब से होना चाहिए, न कि अलग-अलग हालात में बहुत पहले बनाए गए सिस्टम को फॉलो करना चाहिए.
अपनी Phd का कहां इस्तेमाल करते हैं?
सद्गुरु ने कहा, नए एजुकेशन रिफॉर्म के साथ आने की जरूरत है न कि पुराने जिसके बारे में आपको बताया गया है. हम सोचते हैं कि स्कूल जाओ, हाई स्कूल जाओ, कॉलेज जाओ, मास्टर करो, Phd करो. उसके बाद आपको नहीं पता क्या करना है. स्टूडेंट इतने साल तक पढ़ते हैं, एमए करते हैं. Phd करते हैं. Phd करके वे क्या करते हैं? अपनी Phd का कहां इस्तेमाल करते हैं? उन्होंने पेपर दिया, अपनी डिग्री हासिल की और कहीं चले गए. कहां गए हमें पता नहीं, ज्यादातर दूसरे देश चले गए होंगे. ये जरूरी है कि हम अपने एजुकेशन स्ट्रक्चर को बदले क्योंकि हमारे देश को इसकी जरूरत है.
" आज हर किसी के पास डिग्री है"
सद्गुरु ने आगे कहा, "हर किसी के पास डिग्री है. पढ़कर पेपर लिखते हैं, फिर बैठकर नौकरी की तलाश करते हैं, एक अच्छे लाइफस्टाइल के लिए... ये काम नहीं करेगा. क्योंकि लोग एक्टिविटी नहीं कर रहे हैं".
सद्गुरु ने उदाहरण देते हुए कहा कि, पटना का मुझे नहीं पता लेकिन मुंबई में आपको न्यूक्लियर साइंटिस्ट मिल जाएगा. लेकिन कारपेंटर नहीं. कारपेंटर बनना डॉक्टर से क्यों कम माना जाता है, क्यों हर किसी को डॉक्टर बनना है. हर किसी को डॉक्टर बनने की जरूरत नहीं है. हमें इंजीनियर की भी जरूरत है. हर किसी की जरूरत है. एजुकेशन बच्चों के लिए अनिवार्य है. 15 साल से 16 साल तक बिना स्किल के बच्चे बड़े हो रहे हैं. गांव के स्कूल जाओ, 8वीं का बच्चा ये नहीं जोड़ सकता है, 2 प्लास 2 , 4 होता है.
"पलायन सिस्टम की विफलता"
इसके अवाला उन्होंने युवाओं के पलायन के मुद्दे पर भी बात की. सद्गुरु ने कहा कि बिहार में आगे बढ़ने की चाह रखने वाली युवा आबादी है और अगर उन्हें राज्य से बाहर जाना पड़ता है, तो यह सिस्टम की विफलता है.
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