जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के बाद देशभर के स्कूलों से कई वीडियो सामने आए, कहीं बच्चों ने कम टीचर होने के चलते प्रदर्शन किया तो कहीं मूलभूत सुविधाओं की कमी को उजागर किया. इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका ने भी इसे लेकर नया मोर्चा खोल दिया है, उनकी तरफ से देशभर के स्कूलों के ऑडिट का ऐलान किया गया है. ऐसे में राजस्थान सरकार की तरफ से एक आदेश जारी हुआ है, जिसमें कहा गया है कि बाहरी लोगों को स्कूल में एंट्री नहीं दी जाएगी और फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी पर भी बैन लगा दिया. इसीलिए आज हम आपके सामने वो आंकड़े पेश करेंगे, जो राजस्थान के स्कूलों की असली हकीकत बयां करते हैं, ये आंकड़े केंद्र सरकार की UDISE+2025-26 रिपोर्ट से हैं, जिसे कुछ हफ्ते पहले ही जारी किया गया था.
एक टीचर के भरोसे चल रहे हजारों स्कूल
शिक्षा मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट में देशभर के ऐसे स्कूलों का जिक्र किया गया था, जहां सिर्फ एक टीचर के भरोसे बच्चों की क्लास चल रही है. राजस्थान का नाम भी इसमें शामिल था और यहां कुल 7200 ऐसे स्कूल हैं, जहां पर पढ़ाने के लिए सिर्फ एक ही टीचर मौजूद है. इन तमाम स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 1 लाख 78 हजार से ज्यादा है. इसके अलावा 140 स्कूल ऐसे भी हैं, जहां एक भी छात्र नहीं है, लेकिन इन स्कूलों में 189 शिक्षकों की तैनाती की गई है.
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कई स्कूलों में नहीं है बिजली
भले ही देशभर में स्मार्ट क्लासेस और कंप्यूटर से पढ़ाई की बात हो रही है, लेकिन राजस्थान में आज भी ऐसे कई स्कूल हैं, जहां बिजली ही नहीं पहुंची है. UDISE+ रिपोर्ट में बताया गया कि राज्य के कुल 69 हजार 983 सरकारी स्कूलों में से 63 हजार 117 में ही बिजली की व्यवस्था है. यानी करीब 6 हजार से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं, जहां बिजली ही नहीं है. इसके अलावा 1400 से ज्यादा स्कूलों में आज भी पीने के साफ पानी की व्यवस्था नहीं पहुंच पाई है. प्रदेश के हजारों स्कूलों में आज भी बच्चे कुएं या फिर हैंडपंप का पानी पी रहे हैं.
डिजिटल इंडिया की तरफ देश जरूर बढ़ रहा है, लेकिन देश के भविष्य को ये टेक्नोलॉजी ही नसीब नहीं हो पा रही है. राजस्थान के 40 हजार 692 सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर ही नहीं है, वहीं 24 हजार 439 स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा नहीं है. ये बात भी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में ही बताई गई है.
छात्राओं के लिए टॉयलेट्स की कमी
राजस्थान के हजारों स्कूल ऐसे भी हैं, यहां लड़के और लड़कियों के लिए टॉयलेट की व्यवस्था भी नहीं है. रिपोर्ट में बताया गया था कि राज्य के करीब 9 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए टॉयलेट की सुविधा नहीं है. ऐसे स्कूलों की संख्या कुल 11.7 प्रतिशत है. ड्रॉपआउट रेट की बात करें तो राजस्थान में 8वीं के बाद सबसे ज्यादा छात्र स्कूल छोड़ देते हैं. प्राइमरी से शुरू होकर माध्यमिक स्तर पर ये 7.5% तक पहुंच जाता है.
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