QS World Rankings : जब भी हम किसी कॉलेज या फिर यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने के बारे में सोचते हैं तो फिर हम सबसे पहले उसकी रैंकिंग चेक करते हैं. इस आधार पर हम तय करते हैं कौन से कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करना है. लेकिन क्या सिर्फ रैंकिंग के बेसिस पर किसी इंस्टीट्यूट का सिलेक्शन करना सही है? इसको लेकर QS (Quacquarelli Symonds) की CEO जेसिका टर्नर का मानना है कि स्टूडेंट्स को केवल रैंकिंग नंबर देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए, बल्कि कई और पहलू भी होते हैं जिसको ध्यान में रखना चाहिए. तो चलिए आगे आर्टिकल में जानते हैं रैंकिंग के अलावा और किन बातों को ध्यान में रखकर इंस्टीट्यूट का सिलेक्ट करना चाहिए...
जिस सब्जेक्ट की पढ़ाई करनी है, उसकी स्पेशलाइज्ड खोजेंटर्नर का कहना है कि स्टूडेंट्स को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि वे किस सब्जेक्ट में पढ़ाई करना चाहते हैं. इसके बाद यह पता लगाना चाहिए कि कौन सी यूनिवर्सिटी उस सब्जेक्ट में अपनी विशेष पहचान रखती है और उसकी मजबूती का कारण क्या है.
उदाहरण के तौर पर, कोई यूनिवर्सिटी ओवरऑल रैंकिंग में बहुत ऊपर न हो, लेकिन किसी खास सब्जेक्ट जैसे इंजीनियरिंग, बिजनेस, मेडिसिन या सोशल साइंस के लिए जानी जाती है. इस तरह का आपका सिलेक्शन आपके करियर के लिए बेस्ट साबित हो सकता है.
रिसर्च और एम्प्लॉयर रेपुटेशन को भी समझेंयूनिवर्सिटी चुनते समय रिसर्च फैसिलिटी और एम्प्लॉयर रेपुटेशन जैसे पहलुओं का भी एनालिसिस करना चाहिए. छात्रों को यह समझना चाहिए कि जिस यूनिवर्सिटी का आप सिलेक्शन कर रहे हैं एम्प्लॉयर रेपुटेशन उसकी कैसी है. वहां पढ़ने के बाद करियर के अवसर कितने मजबूत हो सकते हैं.
रैंकिंग के पीछे छिपे डेटा को समझना है जरूरीQS CEO के मुताबिक, रैंकिंग के पीछे मौजूद डेटा किसी यूनिवर्सिटी की रियल प्रोफाइल को समझने में मदद करता है. इससे यह पता चलता है कि संस्थान की इमेज कैसी है, उसकी प्रगति की दिशा क्या है और भविष्य में उसके विकास की संभावनाएं कितनी हैं.
इन बातों को ध्यान में रखकर आप सही यूनिवर्सिटी का सिलेक्शन कर सकते हैं.
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