Punjab School Education: एक जमाना था जब सरकारी स्कूल का नाम सुनते ही दिमाग में टूटी हुई दीवारें, बिना पंखे के कमरे और बदहाल व्यवस्था की तस्वीर सामने आती थी. पंजाब के सरकारी स्कूलों का भी कुछ ऐसा ही हाल था. साल 2016 से 2020 के बीच राज्य की शिक्षा व्यवस्था लगातार नीचे गिर रही थी, लेकिन आज कहानी पूरी तरह बदल चुकी है. नीति आयोग (NITI Aayog) की स्कूल शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 में पंजाब ने दिल्ली, केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को पीछे छोड़ते हुए स्कूल एजुकेशन में पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है. आइए जानते हैं ये कैसे मुमकिन हुआ.
पंजाब का एजुकेशन सिस्टम कहां से कहां पहुंचा
कुछ साल पहले तक पंजाब के स्कूलों की हालत चिंताजनक थी. सरकारी आंकड़ों (Performance Grading Index) के मुताबिक, 2016-17 में पंजाब देश में 22वें नंबर पर था. 2018-19 में रैंकिंग और नीचे गिरी और 2020 में तो राज्य फिसलकर 27वें पायदान पर पहुंच गया. हालत ये थी कि स्कूलों में न तो ढंग के टॉयलेट थे, न बच्चों के बैठने के लिए डेस्क. माता-पिता मजबूरी में अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजते थे, क्योंकि उनके पास प्राइवेट स्कूलों की भारी-भरकम फीस भरने के पैसे नहीं थे.
पंजाब के स्कूलों में आखिर क्या बदला
- स्मार्ट और मॉडर्न क्लासरूम की शुरुआत
- ब्लैकबोर्ड की जगह मॉडर्न कंप्यूटर और स्मार्ट टूल्स का इस्तेमाल
- बेहतर फर्नीचर और सुविधाएं
- क्वालिफाइड और मोटिवेटेड टीचर्स पर फोकस, शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था
- बच्चों को रटने की बजाय सीखाने पर जोर
- इंग्लिश और कॉम्पटेटिव एग्जाम की तैयारी पर फोकस
- पंजाब के सरकारी स्कूलों के बच्चे अब न सिर्फ बोर्ड परीक्षाओं में टॉप कर रहे हैं, बल्कि JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं भी पास कर रहे हैं.
19 हजार से ज्यादा स्कूलों में मनाया गया जश्न
पंजाब को नंबर-1 रैंक मिलने के बाद राज्य सरकार ने 'सिखिया दा महा जश्न' कार्यक्रम आयोजित किया. मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में 19,000 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में एक साथ मेगा पैरेंट-टीचर मीटिंग (PTM) आयोजित की गई. इस दौरान लाखों अभिभावकों ने स्कूलों में पहुंचकर बच्चों की पढ़ाई और फ्यूचर को लेकर शिक्षकों से चर्चा की. शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के अनुसार, इस कार्यक्रम में 20 लाख से ज्यादा पैरेंट्स शामिल हुए. कार्यक्रम का मकसद यह सुनिश्चित करना भी था कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों की पढ़ाई जारी रहे. अभिभावकों को बताया गया कि वे घर पर बच्चों की पढ़ाई में कैसे मदद कर सकते हैं. इस मौके पर कई छात्रों, टीचर्स और स्टाफ का सम्मान भी किया गया.
पंजाब की ये उपलब्धि क्यों है खास
पंजाब की यह उपलब्धि इसलिए भी अहम है, क्योंकि इससे सरकारी स्कूलों की ओर हर किसी का ध्यान आएगा. वे प्राइवेट स्कूलों को टक्कर दे सकते हैं. एजुकेशन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि पंजाब का यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है. बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रेंड टीचर्स और बच्चों की सीखने की क्षमता पर फोकस जैसी स्ट्रैटजी दूसरे राज्यों में भी लागू की जा सकती हैं.
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