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NEET विवाद और CBSE मार्किंग सिस्टम पर हंगामा: संसदीय पैनल ने मंत्रालयों और NTA को किया तलब

NEET-UG विवाद और CBSE डिजिटल मार्किंग प्रणाली पर मचे बवाल के बीच संसदीय पैनल ने NTA, CBSE और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को तलब किया है.

NEET विवाद और CBSE मार्किंग सिस्टम पर हंगामा: संसदीय पैनल ने मंत्रालयों और NTA को किया तलब
उदाहरण के लिए, NEET का मामला ही ले लीजिए.''

Digvijaya Singh parliamentary panel : देश की दो सबसे बड़ी शिक्षा व्यवस्थाओं NEET-UG परीक्षा और CBSE बोर्ड पर इस समय सवालों के घेरे में हैं. एक तरफ जहां NEET-UG 2026 परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के आरोप लग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ CBSE की नई 'डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली' (On-Screen Marking - OSM) को लेकर छात्रों और अभिभावकों में भारी गुस्सा है. इस बढ़ते विवाद के बीच, संसद की एक ताकतवर समिति ने कड़ा रुख अपनाया है.

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली 31-सदस्यीय संसदीय स्थायी समिति ने अगले हफ्ते शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और CBSE के शीर्ष अधिकारियों को 1 और 2 जून को तलब किया है. 

CBT, OSM जैसे मुद्दों पर होगी चर्चा

पैनल 1 जून को उच्च शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य मंत्रालय और NTA के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ "पेन-एंड-पेपर परीक्षण बनाम कंप्यूटर-आधारित परीक्षण (CBT) के उपयोग" और NEET तथा NTA से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करेगा.

2 जून को, पैनल अपना ध्यान स्कूली शिक्षा के मुद्दों पर केंद्रित करेगा और स्कूली शिक्षा सचिव संजय कुमार तथा CBSE अध्यक्ष राहुल सिंह से मुलाकात करेगा. इस दौरान, कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) के उपयोग और कक्षा 9 तथा 10 में 3 लैग्वेज फॉर्मूला के कार्यान्वयन से संबंधित चिंताओं की समीक्षा की जाएगी.

क्या है पूरा मामला

यह कदम छात्रों और अभिभावकों की उन शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिनमें CBSE के रिजल्ट के बाद सेवा पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ियों और नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के तहत उम्मीद से कम अंकों को लेकर चिंताएं व्यक्त की गई थीं.

13 मई को CBSE द्वारा कक्षा 12 के परिणाम घोषित किए जाने के बाद ये चिंताएं और बढ़ गईं. क्योंकि इस बार कुल पासिंग पर्सेंटेज पिछले साल के 88.39 प्रतिशत से घटकर 85.20 प्रतिशत पर आ गया, जो 2019 के बाद से सबसे कम है.

21 मई को भी बुलाई थी बैठक

आपको बता दें कि ये बैठकें कथित NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद और केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परीक्षा सुधारों की पृष्ठभूमि में हो रही हैं. पैनल ने इससे पहले 21 मई को बैठक की थी, जिसमें कथित अनियमितताओं की चल रही जांच की समीक्षा की गई थी और NEET-UG 2024 विवाद के बाद गठित राधाकृष्णन समिति द्वारा की गई सिफारिशों के कार्यान्वयन की जांच की गई थी.

NEET-UG की उम्र सीमा पर भी हुई थी चर्चा

उस मीटिंग के दौरान, NTA ने कमेटी को बताया कि वह NEET-UG उम्मीदवारों के लिए ऊपरी उम्र सीमा तय करने और परीक्षा देने के मौकों की संख्या सीमित करने पर विचार कर रहा है. यह एक बड़ा नीतिगत बदलाव होगा, क्योंकि अभी इस परीक्षा में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है. अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि एजेंसी अगले साल से धीरे-धीरे कंप्यूटर-आधारित परीक्षा प्रणाली (CBT) की ओर बढ़ने की योजना बना रही है.

पैनल को जानकारी देने वाले अधिकारियों के मुताबिक, NTA को 7 मई की देर रात "कथित गड़बड़ियों" के बारे में इनपुट मिले थे. अगले ही दिन उसने यह मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया और 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी. दोबारा परीक्षा 21 जून को तय की गई है.

यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के प्रतिनिधियों और भारतीय वायु सेना के पूर्व ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. (मेजर) गुलशन गर्ग को भी कमेटी के सामने अपने विचार रखने के लिए बुलाया गया है.

IIT मद्रास और IIT कानपुर OSM की गड़बड़ियां की करेंगे जांच

CBSE पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों की जांच के लिए, IIT मद्रास और IIT कानपुर के चार सदस्यों वाली एक विशेषज्ञ टीम को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह CBSE को पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया और OSM प्रणाली से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने में मदद करे.

संसदीय समीक्षा में CBSE के उस हालिया सर्कुलर की भी जांच की जाएगी, जिसमें 1 जुलाई से 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए थ्री लैंग्वेज की पढ़ाई अनिवार्य की गई है. इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए. यह नीति उस योजना का ही विस्तार है, जिसे पहले ही 6वीं कक्षा के छात्रों के लिए अनिवार्य किया जा चुका है.

हालांकि CBSE ने बाद में यह स्पष्ट किया कि "तीसरी भाषा की शर्त पूरी न करने पर किसी भी छात्र को 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा," फिर भी इस कदम से स्कूलों और प्रशासकों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई.

''शिक्षा मंत्रालय जिस तरह से काम कर रहा है, वह बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं है''

केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए श्री सिंह ने कहा, "शिक्षा मंत्रालय जिस तरह से काम कर रहा है, वह बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं है. उदाहरण के लिए, NEET का मामला ही ले लीजिए. यह बहुत अजीब बात है कि पूरा देश कह रहा है कि पेपर लीक हुआ था, लेकिन NTA कह रहा है कि कोई लीक नहीं हुआ. यह एक अजीब स्थिति है."

उन्होंने आगे कहा, "हमने सुना है कि वे अभी भी यही कह रहे हैं कि कोई लीक नहीं हुआ था. तो फिर हुआ क्या? वे दोबारा परीक्षा क्यों करवा रहे हैं? अब, OSM का इस्तेमाल 2014 में एक बार किया गया था और तब इसे अव्यावहारिक पाया गया था. 2017 में, मुंबई विश्वविद्यालय ने भी इसे लागू किया था और उसे भी यह अव्यावहारिक लगा था. तो जब यह पहले ही दो बार फेल हो चुका है, तो आप पूरे देश में CBSE के छात्रों के साथ प्रयोग क्यों कर रहे हैं?"

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