NEET-UG री-एग्जाम 21 जून को होने वाला है और उससे पहले दिल्ली की एक अदालत के फैसले ने नई बहस छेड़ दी है. मामला उस छात्र से जुड़ा है जिसे NEET पेपर लीक केस में गिरफ्तार किया गया था. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपी छात्र यश यादव को री-NEET परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी है. कोर्ट के इस फैसले के बाद कई स्टूडेंट्स और पैरेंट्स सवाल उठा रहे हैं कि क्या ये फैसला सभी उम्मीदवारों के लिए पूरी तरह निष्पक्ष है. दरअसल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी आरोपी को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक उसके खिलाफ आरोप साबित न हो जाएं.
जेल में रहकर कर रहा है पढ़ाई
अदालत ने शिक्षा के अधिकार को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि सिर्फ जांच चलने के आधार पर किसी छात्र को परीक्षा देने से नहीं रोका जा सकता. हालांकि कोर्ट ने यश यादव को पूरी आजादी नहीं दी है. आदेश के मुताबिक उसे सुरक्षा और निगरानी के बीच परीक्षा केंद्र तक ले जाया जाएगा और वहीं से वापस जेल लाया जाएगा. अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक इससे पहले कोर्ट ने यश यादव को जेल में पढ़ाई का सामान उपलब्ध कराने की भी अनुमति दी थी. चूंकि री-NEET परीक्षा नजदीक थी, इसलिए अदालत ने उसकी तैयारी के अधिकार को भी ध्यान में रखा.
कानूनी पक्ष क्या कहता है
कानूनी एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारतीय कानून में किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी और दोष का फैसला अदालत में सुनवाई के बाद ही होता है. अगर कोई नियम किसी आरोपी को परीक्षा देने से नहीं रोकता और जांच एजेंसियां ये साबित नहीं कर पातीं कि परीक्षा देने से जांच प्रभावित होगी, तो अदालतें आमतौर पर कोशिश करती हैं कि किसी छात्र की पढ़ाई और भविष्य पर बेवजह असर न पड़े.
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छात्रों के मन में क्यों उठ रहे सवाल
कानूनी तौर पर फैसला सही माना जा सकता है, लेकिन कई छात्रों की भावनाएं इससे अलग हैं. एक परीक्षार्थी ने कहा, 'कानूनी रूप से मैं समझता हूं कि कोर्ट ने उसे परीक्षा देने की अनुमति क्यों दी. लेकिन भावनात्मक रूप से यह गलत लगता है. हम दोबारा परीक्षा इसलिए दे रहे हैं क्योंकि गड़बड़ी के आरोप लगे थे.' एक अन्य छात्र ने कहा, 'अगर आरोप इतने गंभीर हैं कि गिरफ्तारी हो चुकी है, तो सच सामने आने तक आरोपी को उसी परीक्षा में शामिल नहीं होना चाहिए. हमसे फिर सिस्टम पर भरोसा करने को कहा जा रहा है और ऐसे फैसले कई छात्रों के लिए इसे मुश्किल बना देते हैं.'
क्यों महत्वपूर्ण है ये मामला
ये मामला सिर्फ एक छात्र का नहीं है. आने वाले समय में परीक्षा से जुड़े दूसरे मामलों में भी इस फैसले का उदाहरण दिया जा सकता है. साथ ही ये भी साफ करता है कि पेपर लीक जैसे विवादों के बाद छात्रों का भरोसा वापस जीतना सिस्टम के लिए आसान नहीं है. 21 जून को परीक्षा देने जा रहे लाखों छात्रों की नजर अब सिर्फ अपने रिजल्ट और एडमिशन पर नहीं है. वो ये भी देख रहे हैं कि इस मामले में सभी छात्रों के साथ न्याय होता है या नहीं.
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