विज्ञापन

NEET-UG 2026 Paper Leak Case: 'अगर मान ली जाती राधाकृष्णन कमेटी की बात, तो न होता यह हाल' - पैनल मेंबर का खुलासा

NEET-UG 2026 Paper Leak Controversy : NDTV को दिए एक खास इंटरव्यू में पैनल मेंबर ने साफ कहा कि अगर कमेटी की सिफारिशों को पूरी तरह लागू कर दिया जाता, तो आज देश के लाखों स्टूडेंट्स को इस मानसिक तनाव से नहीं गुजरना पड़ता.

NEET-UG 2026 Paper Leak Case: 'अगर मान ली जाती राधाकृष्णन कमेटी की बात, तो न होता यह हाल' - पैनल मेंबर का खुलासा
22 लाख से ज्यादा छात्रों के लिए एक ही शिफ्ट में पेन-पेपर मोड पर बिना किसी गड़बड़ी के परीक्षा कराना NTA के लिए टेढ़ी खीर साबित हो चुका है.

NEET-UG 2026 Paper Leak Case: देश के लाखों मेडिकल स्टूडेंट्स के भविष्य से जुड़ा NEET-UG एग्जाम एक बार फिर विवादों के घेरे में है.  साल 2024 में हुए भारी बवाल के बाद उम्मीद थी कि व्यवस्था सुधरेगी, लेकिन 2026 में "गेस पेपर्स" के नाम पर हुए पेपर लीक ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की साख पर एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है. अब इस पूरे मामले पर इसरो (ISRO) के पूर्व चीफ डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली कमेटी के सदस्य पंकज बंसल ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. 

NDTV को दिए एक खास इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि अगर कमेटी की सिफारिशों को पूरी तरह लागू कर दिया जाता, तो आज देश के लाखों स्टूडेंट्स को इस मानसिक तनाव से नहीं गुजरना पड़ता.

95% समस्याओं का हल है कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT)

पंकज बंसल का मानना है कि NEET परीक्षा में गड़बड़ी की सबसे बड़ी वजह इसका पुराना 'पेन-पेपर' फॉर्मेट है. उन्होंने कहा, "मौजूदा सिस्टम में सबसे बड़ी कमजोरी फिजिकल पेपर्स को संभालने, उन्हें प्रिंट करने और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने (ट्रांसपोर्टेशन) में है. जब तक कागज का इस्तेमाल होगा, तब तक लीक का खतरा बना रहेगा. अगर परीक्षा को कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) फॉर्मेट में बदल दिया जाए, तो 95% समस्याएं अपने आप खत्म हो जाएंगी."

गनीमत यह है कि सरकार को अब जाकर यह बात समझ आई है. लगातार बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि अगले साल से NEET-UG परीक्षा पूरी तरह से ऑनलाइन यानी कंप्यूटर-बेस्ड (CBT) फॉर्मेट में आयोजित की जाएगी.

'एग्जाम माफिया' कैसे फल फूल रहे हैं

आखिर हर बार सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद पेपर लीक कैसे हो जाता है? बंसल ने इसके पीछे की कड़वी सच्चाई को उजागर किया है. उनके मुताबिक, एग्जाम माफिया किसी एक चूक की वजह से नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर फल-फूल रहा है.

प्रिंटिंग प्रेस से लेकर परीक्षा केंद्र तक

पेपर छपने से लेकर, उसके ट्रांसपोर्टेशन और फिर सेंटर पर बॉक्स खोले जाने तक, सुरक्षा की कड़ियां बहुत कमजोर हैं.

इंसानी दखल 

जितने ज्यादा हाथों से होकर पेपर गुजरता है, लीक होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है.

2026 में भी यही हुआ, जहां परीक्षा से ठीक पहले "गेस पेपर्स" की आड़ में असली सवाल बांट दिए गए. इसके बाद सरकार को डैमेज कंट्रोल के लिए आनन-फानन में प्रभावित सेंटर्स पर दोबारा परीक्षा कराने का आदेश देना पड़ा और मामला सीबीआई (CBI) को सौंप दिया गया.

6 महीने की मेहनत और 37,000 सुझाव: क्या सब बेकार गए?

साल 2024 के  बाद जब सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई थी, तब सरकार ने राधाकृष्णन कमेटी का गठन किया था. पंकज बंसल ने बताया कि इस पैनल ने देश के कोने-कोने में जाकर छात्रों, अभिभावकों और एक्सपर्ट्स से मुलाकात की थी.

सरकारी पोर्टल के जरिए करीब 37,000 सुझाव मिले, जिन्हें खंगालने के बाद 185 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिसमें 95 ठोस सिफारिशें थीं.

कमेटी की मुख्य सिफारिशें क्या थीं?

NTA का पुनर्गठन हो

एजेंसी के अंदर अलग-अलग कामों के लिए डेडिकेटेड डिपार्टमेंट (Dedicated Departments) होने चाहिए.

सख्त निगरानी

परीक्षा कराने वाली बाहरी आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर कड़ी नजर रखी जाए.

सीक्रेट प्रोटोकॉल

पेपर की प्रिंटिंग और स्टोरेज के लिए 'कन्फेडेंशियल ऑपरेशन्स' के सख्त नियम हों.

लोकल कोऑर्डिनेशन

स्थानीय पुलिस, प्रशासन और यूनिवर्सिटीज के बीच मजबूत तालमेल हो.

"हम निराश हैं..." 

जब बंसल से पूछा गया कि क्या 2026 की परीक्षा से पहले इन 95 सिफारिशों को लागू किया गया था? तो उन्होंने जवाब दिया, "मुझे पक्का नहीं पता कि सरकार ने इनमें से कितनी सिफारिशें पूरी तरह लागू कीं. लेकिन हां, इस नए लीक से हम बेहद निराश हैं. वह हमारी 6 महीने की कड़ी मेहनत थी."

छात्रों, विपक्षी दलों और शिक्षाविदों का भी यही गुस्सा है कि जब 2024 में ही समस्या का पता चल चुका था और इलाज भी सामने था, तो फिर 2026 में वही लापरवाही क्यों हुई?

यह भी पढ़ें- NEET परीक्षा देने वाले छात्र ने किया सुसाइड, पिता ने कहा- पेपर शानदार हुआ था... 650 नंबर आने की थी उम्मीद

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com