NEET पेपर लीक के बाद से ही तमाम बड़ी परीक्षाओं को आयोजित करवाने वाली एजेंसी NTA सवालों के घेरे में थी. छात्रों के प्रदर्शन और भारी विरोध के बीच सरकार की तरफ से बताया गया कि एनटीए से 40 से ज्यादा लोगों को निकाल दिया गया है, जिसके बाद नई भर्तियों का नोटिफिकेशन भी जारी किया गया. हालांकि भारत की परीक्षा प्रणाली में जिस व्यापक सुधार का वादा किया गया था, वह अभी भी पूरा होने से काफी दूर है. के राधाकृष्णन कमेटी की सभी 101 सिफारिशों को स्वीकार करने के बावजूद, सरकार ने अब तक महज 57 को ही पूरी तरह लागू किया है, जिससे कई जरूरी ढांचागत सुधार अधूरे रह गए हैं.
कई सिफारिशों पर नहीं हुआ काम
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में हाल ही में हुई नियुक्तियों और संगठनात्मक बदलावों से उन संस्थागत सुधारों को गति मिली है, जो काफी हद तक केवल कागजों पर ही रह गए थे. हालांकि समिति की तरफ से रिपोर्ट सौंपे जाने के तुरंत बाद परीक्षा सुरक्षा उपायों को लागू कर दिया गया था, लेकिन कथित पेपर लीक को लेकर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद एजेंसी की आंतरिक क्षमता को मजबूत करने वाले व्यापक बदलावों में तेजी आई है.
इन चीजों पर हो रहा काम
जिन तीन जरूरी चीजों पर काम शुरू हुआ है, उनमें एनटीए का री-स्ट्रक्चर, एक्सपर्ट लीडरशिप के जरिए एजेंसी को मजबूत करना और स्टाफ की कमी को पूरा करना है. इसके अलावा मूल्यांकन के तरीकों को आधुनिक बनाने के लिए साइकोमीट्रिक एक्सपर्टीज का निर्माण करना भी इसमें शामिल है.
पिछले हफ्ते, एनटीए ने 16 नए स्थायी पदों की घोषणा की और साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक, मूल्यांकन अनुसंधान और टेस्ट-सेंटर संचालन में वरिष्ठ नेतृत्व पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी किए. यूपीएससी के प्रतिभा सेतु पोर्टल के माध्यम से युवा पेशेवरों की भर्ती भी शुरू की गई. एजेंसी का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करते हुए आउटसोर्स कर्मचारियों पर निर्भरता को कम करना है.
अब भी कर्मचारियों की कमी
भर्ती नोटिफिकेशन के बावजूद कर्मचारियों की कमी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है. सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि एनटीए के 39 स्वीकृत स्थायी पदों में से वर्तमान में केवल 24 पद ही भरे हुए हैं. एजेंसी फिलहाल 15 बड़ी राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने के लिए 73 कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों और 124 आउटसोर्स कर्मियों पर निर्भर है.
कमेटी के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर एनडीटीवी को बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों पर एनटीए की निर्भरता समिति की बड़ी चिंताओं में से एक थी. सदस्य ने कहा, "एजेंसी को केवल कॉन्ट्रैक्ट पर निर्भर रहने के बजाय दीर्घकालिक संस्थागत क्षमता बनाने के लिए साइकोमेट्रिक्स, मूल्यांकन डिजाइन, साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक और टेस्ट-सेंटर संचालन में स्थायी विशेषज्ञता की जरूरत है."
एग्जाम की सिक्योरिटी पर दिया गया ध्यान
कमेटी की जिन सिफारिशों को पहले लागू किया गया, उनमें परीक्षा की सुरक्षा का जिक्र था. लागू की जाने वाली सिफारिशों का पहला सेट जेईई (मेन) 2025 से पहले परीक्षा सुरक्षा को कड़ा करने पर केंद्रित था. इनमें आधार-आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन, तलाशी, बायो-ब्रेक के बाद दोबारा बायोमेट्रिक जांच और परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों की सख्त सत्यापन जैसी चीजें शामिल थीं.
इन सिफारिशों को नहीं किया गया लागू
- कई सेशन में बड़ी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करना
- नीट-यूजी के लिए मल्टी स्टेज फॉर्मेट पेश करना
- उम्मीदवारों को कई मौके देकर प्रवेश परीक्षाओं के भारी तनाव को कम करना
- नीट-यूजी को कंप्यूटर-आधारित और अलग-अलग स्तर पर कराना
- 'डिजी यात्रा' की तर्ज पर प्रस्तावित डिजी-एग्जाम पहचान सत्यापन प्रणाली
- प्रश्नपत्रों का हाइब्रिड और कंप्यूटर-बेस्ड ट्रांसमिशन
शॉर्ट टर्म सॉल्यूशन पर ज्यादा फोकस
सात सदस्यीय समिति ने अपनी सिफारिशों को दो चरणों में बांटा था. इसमें 60 शॉर्ट टर्म और 41 लॉन्ग टर्म ढांचागत सुधारों का जिक्र था. हालांकि ज्यादा काम शॉर्ट टर्म सुधारों पर किया गया. 60 में से 46 को पूरी तरह से लागू किया जा चुका है, तीन को आंशिक रूप से लागू किया गया है, दो लागू होने की प्रक्रिया में हैं, तीन की घोषणा की जा चुकी है और छह लंबित हैं. सबसे बड़े बदलावों में 2025 से सीयूईटी (CUET) विषयों को 63 से घटाकर 37 करना शामिल था.
दीर्घकालिक सुधारों पर काम काफी धीमा है. इसकी 41 सिफारिशों में से केवल 11 को ही पूरी तरह से लागू किया गया है, जबकि सात को आंशिक रूप से लागू किया गया है. एक सिफारिश लागू होने की प्रक्रिया में है, एक की घोषणा की गई है और 21 लंबित हैं.
नीट लीक के बाद बनी थी कमेटी
पूर्व इसरो अध्यक्ष के राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति का गठन जून 2024 में नीट-यूजी 2024 में अनियमितताओं के आरोपों के बाद किया गया था. इसने उसी साल अक्टूबर में अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें मजबूत शासन, आउटसोर्स किए गए लोगों की सख्त निगरानी, राज्यों के साथ बेहतर समन्वय और पेन-एंड-पेपर और कंप्यूटर-आधारित दोनों परीक्षाओं के लिए तकनीक-आधारित सुरक्षा उपायों के माध्यम से एनटीए के व्यापक कायाकल्प की सिफारिश की गई थी.
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