NEET Choice Filling Mistakes: नीट री-एग्जाम के बाद फाइनल रिजल्ट 16 जुलाई 2026 को जारी हो चुका है और अब बारी काउंसलिंग की है. मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) जुलाई के आखिरी हफ्ते में ऑफिशियल शेड्यूल जारी करने वाली है. रजिस्ट्रेशन-च्वॉइस फिलिंग का प्रोसेस जुलाई के आखिर से अगस्त के बीच शुरू हो सकता है. ऐसे में लाखों स्टूडेंट्स और पेरेंट्स काउंसलिंग और एडमिशन की तैयारी में जुटे हैं. कई बार अच्छे स्कोर के बावजूद अच्छे कॉलेज में एडमिशन नहीं मिल पाता है, क्योंकि काउंसलिंग के समय की गई छोटी-छोटी गलतियां मनपसंद कॉलेज से आपको दूर कर सकती हैं या फिर खराब सीट से ही समझौता करना पड़ता है. अगर आप भी नीट काउंसलिंग में शामिल होने जा रहे हैं, तो जानिए च्वॉइस फिलिंग में कौन-सी 5 गलतियां नहीं करनी चाहिए.
1. कम कॉलेज सेलेक्ट करना
बहुत से स्टूडेंट सोचते हैं कि सिर्फ 10-15 कॉलेज चुन लेंगे तो काम चल जाएगा, लेकिन सीट अलॉटमेंट पूरी तरह रैंक, प्रेफरेंस और सीट अवेलेबिलिटी पर डिपेंड करता है. जितनी ज्यादा च्वॉइस भरेंगे, अगले राउंड में सीट मिलने के चांस उतने ज्यादा रहेंगे. कम च्वॉइस भरने का मतलब खुद अपने हाथों से मौका कम करना है. ऐसे में अपनी रैंक के हिसाब से कम से कम 50-100 कॉलेज की लिस्ट जरूर बनाएं, भले ही सबमें एडमिशन का मन न हो.
2. सिर्फ टॉप कॉलेज को प्रायोरिटी देना
हर कोई AIIMS या टॉप गवर्नमेंट कॉलेज चाहता है, लेकिन सिर्फ बड़े नामों पर फोकस करके बाकी अच्छे कॉलेज छोड़ देना भारी पड़ सकता है. कई बार सेकंड टियर के कॉलेज भी फैकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर में कमाल के होते हैं. ऐसे में ड्रीम कॉलेज को टॉप पर रखें, लेकिन साथ ही रियलिस्टिक और सेफ ऑप्शन भी लिस्ट में जरूर जोड़ें.
3. पिछले साल के कटऑफ को इग्नोर करना
हर साल कटऑफ बदलता है. ऐसे में बिना डेटा देखे च्वॉइस भरना जोखिम भरा हो सकता है. बिना रिसर्च के भरी गई लिस्ट अक्सर गलत जगह ले जाती है. इसलिए पिछले 2-3 साल के कटऑफ ट्रेंड, सीट मैट्रिक्स और कॉलेज रैंकिंग को ध्यान से चेक करने के बाद ही लिस्ट फाइनल करें.
4. लास्ट मोमेंट पर च्वॉइस लॉक करना
टेक्निकल प्रॉब्लम्स, सर्वर स्लो होना, पेमेंट फेल होना... ये सब आखिरी घंटों में आम बात होती हैं. इस वजह से कई स्टूडेंट अपनी सही च्वॉइस लॉक ही नहीं कर पाते हैं. इसलिए डेडलाइन से कम से कम एक दिन पहले ही अपनी फाइनल लिस्ट लॉक कर दें, आखिरी वक्त का इंतजार बिल्कुल न करें.
5. फीस स्ट्रक्चर और बॉन्ड की शर्तें न पढ़ना
कई बार स्टूडेंट सिर्फ कॉलेज का नाम देखकर च्वॉइस भर देते हैं, लेकिन फीस, बॉन्ड पॉलिसी और एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को अच्छे से नहीं पढ़ते हैं. जिसकी वजह से बाद में सीट अलॉट होने पर पता चलता है कि बजट या शर्तें मैच ही नहीं कर रही हैं. इसलिए हर कॉलेज की फीस डिटेल और बॉन्ड कंडीशन पहले से नोट कर लें, ताकि सीट मिलने के बाद कोई सरप्राइज न मिले.
ये भी पढ़ें - IIT मद्रास ने जारी किया GATE 2027 का शेड्यूल, जानें परीक्षा की तारीखें और बड़े बदलाव
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं