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भारत के इस राज्य में एक या दो नहीं, तीन बार होती हैं बोर्ड परीक्षाएं, जान लीजिए वजह

कर्नाटक में अब 10वीं और 12वीं क्लास के बोर्ड एग्जाम्स एक ही अकेडमिक ईयर में तीन बार आयोजित कराए जाते हैं. सबसे खास बात यह है कि फाइनल रिजल्ट में उसी परीक्षा के मार्क्स जोड़े जाएंगे, जिसमें छात्र का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा हो.

भारत के इस राज्य में एक या दो नहीं, तीन बार होती हैं बोर्ड परीक्षाएं, जान लीजिए वजह
न इस नए सिस्टम में ये कॉन्सेप्ट लगभग खत्म हो गया है.

Board Exam 2026 : बोर्ड एग्जाम का नाम सुनते ही ज्यादातर छात्रों के मन में टेंशन, प्रेशर और रातों की नींद उड़ जाने जैसी चीजें सामने आ जाती हैं. लेकिन अब तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है. एजुकेशन सिस्टम में ऐसे बदलाव आ रहे हैं, जो छात्रों को डर से निकालकर मौके देने की तरफ ले जा रहे हैं. खास बात ये है कि एक राज्य ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है, जहां बोर्ड एग्जाम एक या दो नहीं, बल्कि तीन बार होते हैं. ये सुनने में भले अलग लगे, लेकिन इसके पीछे का आइडिया काफी दिलचस्प और छात्रों के लिए राहत भरा है.

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क्या है कर्नाटक का नया मॉडल

कर्नाटक ने 10वीं और 12वीं के बोर्ड एग्जाम के लिए एक ही अकैडमिक ईयर में तीन मौके देने का सिस्टम लागू किया है. यानी छात्र चाहें तो एक बार एग्जाम दें, या फिर तीनों बार कोशिश कर सकते हैं. इस व्यवस्था का मकसद ये है कि हर छात्र को खुद को सुधारने का पूरा मौका मिले.

सबसे अच्छा स्कोर ही होगा फाइनल

इस मॉडल की सबसे खास बात ये है कि छात्र के तीनों प्रयासों में से सबसे बेहतर नंबर ही उसकी मार्कशीट में जोड़े जाएंगे. जैसे अगर किसी ने पहली बार 60 प्रतिशत, दूसरी बार 75 प्रतिशत और तीसरी बार 65 प्रतिशत लाए, तो फाइनल रिजल्ट में 75 प्रतिशत ही गिने जाएंगे. इससे छात्रों पर “एक ही मौके में सब कुछ साबित करने” का दबाव कम हो जाता है.

सप्लीमेंट्री का झंझट लगभग खत्म

पहले जो छात्र पास नहीं हो पाते थे, उन्हें सप्लीमेंट्री एग्जाम देना पड़ता था, जो अलग से तनाव लेकर आता था. लेकिन इस नए सिस्टम में ये कॉन्सेप्ट लगभग खत्म हो गया है. अब हर प्रयास उसी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिससे छात्र बिना डर के अपने नंबर सुधार सकते हैं.

एक्सपर्ट्स क्यों बता रहे हैं गेम चेंजर 

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ये बदलाव “फेलियर बेस्ड सिस्टम” से “अवसर बेस्ड सिस्टम” की तरफ एक बड़ा कदम है. इससे छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे बेहतर तरीके से अपनी तैयारी कर पाएंगे. कर्नाटक का ये मॉडल आने वाले समय में दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है.
 


 

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