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JoSAA काउंसलिंग में ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी, ऐसे मिलेगी मनचाही सीट

JoSAA Counselling 2026 : JoSAA Counselling 2026 में सही चॉइस फिलिंग बेहद जरूरी है. कम विकल्प भरना, कट-ऑफ नजरअंदाज करना, चॉइस लॉक न करना और Freeze, Float, Slide को न समझना छात्रों को भारी पड़ सकता है.

JoSAA काउंसलिंग में ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी, ऐसे मिलेगी मनचाही सीट
JoSAA काउंसलिंग में छात्र जरूर रखें इन बातों का ख्याल

JoSAA Counselling 2026: JEE Main और JEE Advanced को क्वालीफाई करने के बाद अब छात्रों के सामने सबसे महत्वपूर्ण चरण JoSAA Counselling 2026 का है. इसके लिए 2 जून से रजिस्ट्रेशन और चॉइस फिलिंग का प्रोसेस शुरू हो चुका है. इस दौरान चॉइस भरने की आखिरी तारीख 11 जून है. वहीं, पहला मॉक सीट अलॉटमेंट 8 जून और दूसरा 10 जून को जारी होगा, जबकि पहले राउंड का सीट अलॉटमेंट रिजल्ट 13 जून को घोषित किया जाएगा. ऐसे में सही कॉलेज और ब्रांच चुनना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है काउंसलिंग के दौरान होने वाली आम गलतियों से बचना. यहां कुछ आम गलतियां बताई गई हैं, जिन्हें रजिस्ट्रेशन के दौरान अक्सर छात्र कर देते हैं - 

कम ऑप्शंस भरना पड़ सकता है महंगा

कई छात्र केवल कुछ चुनिंदा कॉलेजों और ब्रांचों को ही अपनी चॉइस में शामिल करते हैं. इससे सीट मिलने की संभावना कम हो सकती है. एक्सपर्ट्स की सलाह है कि ड्रीम, टारगेट और सेफ सभी तरह के ऑप्शंस को शामिल करें, ताकि सीट अलॉटमेंट के ज्यादा अवसर मिल सकें.

सिर्फ कॉलेज के नाम पर न लें फैसला

छात्र अक्सर बड़े IIT संस्थान के नाम पर ऐसी ब्रांच चुन लेते हैं, जिसमें उनकी रुचि नहीं होती. याद रखें कि अगले चार साल उसी सब्जेक्ट की पढ़ाई करनी होगी. इसलिए कॉलेज और ब्रांच दोनों के बीच बैलेंस बनाना जरूरी है.

कट-ऑफ डेटा को नजरअंदाज करना बड़ी भूल

पिछले सालों के ओपनिंग और क्लोजिंग रैंक छात्रों को सही ऑप्शन चुनने में मदद करते हैं. हालांकि हर साल कट-ऑफ बदलती है, लेकिन पुराने आंकड़े एक बेहतर अनुमान देने का काम करते हैं.

मॉक सीट अलॉटमेंट का जरूर करें इस्तेमाल

JoSAA दो बार मॉक सीट अलॉटमेंट जारी करता है ताकि छात्र अपनी संभावनाओं का आकलन कर सकें. कई उम्मीदवार इसे गंभीरता से नहीं लेते, जबकि यह चॉइस लिस्ट में जरूरी बदलाव करने का बेहतरीन मौका होता है.

पसंद के अनुसार ही करें ऑप्शंस की रैंकिंग

कुछ छात्रों को लगता है कि आसान ऑप्शंस को ऊपर रखने से सीट मिलने की संभावना बढ़ जाएगी. जबकि JoSAA सिस्टम हमेशा आपकी सबसे ऊंची पसंद को पहले चेक करता है. इसलिए ऑप्शंस को उसी सीक्वेंस में रखें, जैसा आप चाहते हैं.

दोस्तों को फॉलो न करें 

हर छात्र की रैंक, रुचि, लोकेशन और करियर प्लान अलग होता है. इसलिए केवल दोस्तों की पसंद देखकर कॉलेज या ब्रांच चुनना नुकसानदायक साबित हो सकता है.

चॉइस लॉक करना न भूलें

कई बार छात्र यह मान लेते हैं कि उनकी चॉइस अपने आप फाइनल हो जाएगी. आखिरी तारीख से पहले ऑप्शंस को लॉक करना और उसकी कॉपी सेव रखना बेहद जरूरी है.

फ्रीज, फ्लोट और स्लाइड को समझना जरूरी

सीट मिलने के बाद छात्रों को फ्रीज, फ्लोट और स्लाइड का ऑप्शन मिलता है. इनके मतलब इस प्रकार हैं - 

फ्रीज : मिली हुई सीट स्वीकार कर आगे के प्रोसेस से बाहर हो जाना.

फ्लोट : मिली हुई सीट सीट रखते हुए बेहतर संस्थान मिलने की संभावना बनाए रखना.

स्लाइड : उसी संस्थान में बेहतर ब्रांच मिलने का इंतजार करना.

अंतिम समय तक इंतजार न करें

तकनीकी दिक्कतों या इंटरनेट समस्याओं से बचने के लिए चॉइस फिलिंग आखिरी समय तक टालना सही नहीं है. इसलिए समय रहते प्रोसेस पूरा करें और अपनी पसंद को दोबारा चेक कर लें.

सही रणनीति ही दिलाएगी मनपसंद सीट

JoSAA काउंसलिंग केवल फॉर्म भरने का प्रोसेस नहीं, बल्कि आपके इंजीनियरिंग करियर की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण चरण है. थोड़ी सी सावधानी और सही योजना आपको मनपसंद कॉलेज और ब्रांच दिलाने में मदद कर सकती है.

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