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JEE टॉप-50 में आधे छात्र अकेले कोटा से, डिप्रेशन के डर को पछाड़ कोटा-सीकर ने की 'ग्रैंड वापसी'

जेईई रिजल्ट में कोटा और सीकर के छात्रों ने लहराया परचम. AIR 1 शुभम कुमार और AIR 3 जतिन चाहर की सफलता के साथ कोटा ने की धमाकेदार वापसी. जानिए कैसे बदला यहां का माहौल

JEE टॉप-50 में आधे छात्र अकेले कोटा से, डिप्रेशन के डर को पछाड़ कोटा-सीकर ने की 'ग्रैंड वापसी'
JEE Results: डिप्रेशन के डर को पछाड़ कोटा-सीकर ने की 'ग्रैंड वापसी', टॉप-50 में आधे छात्र अकेले कोटा से.

जैसे ही जेईई के नतीजे घोषित हुए और टॉपर्स मंच पर आने लगे, कोटा तालियों, जयकारों और जश्न के शोर से गूंज उठा. कोटा के प्रमुख कोचिंग संस्थान एलन करियर इंस्टीट्यूट में इस मौके के लिए पहले से ही एक भव्य समारोह की तैयारी की गई थी. मंच पर सफल छात्र थे, उनके शिक्षक थे, उनके माता-पिता थे. ऊपर से कॉन्फेटी की बारिश हो रही थी और संस्थान के अधिकारी पूरे आयोजन को किसी मेगा इवेंट की तरह संचालित कर रहे थे. हाथों में माइक लिए वे लगातार और जोरदार तालियों और जयकारों की अपील कर रहे थे.

कार्यक्रम देख रहे दूसरे छात्र, जो खुद भी जेईई अभ्यर्थी हैं, उत्साह से झूम रहे थे. और कोटा से जाने वाला संदेश बिल्कुल साफ था देश के कोचिंग मानचित्र पर कोटा की वापसी हो चुकी है. एलन करियर इंस्टीट्यूट के सीईओ नितिन कुकरेजा बताते हैं कि इस साल देश के जेईई टॉप-10 में शामिल 6 छात्रों ने एलन से कोचिंग ली है. इनमें से पांच छात्र कोटा से हैं और एक सीकर से.

हर साल करीब डेढ़ लाख छात्र आते हैं पढ़ने

"यह सिर्फ टॉपर्स की कहानी नहीं है," वे कहते हैं. "देश के टॉप-50 छात्रों में 24 कोटा से हैं. दरअसल पिछले तीन वर्षों से जेईई का ऑल इंडिया टॉपर कोटा से ही निकल रहा है." और कोटा के लिए, जिसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक कोचिंग उद्योग पर टिकी हुई है, यह जश्न का एक और कारण है. हर साल करीब डेढ़ लाख छात्र यहां पढ़ने आते हैं और उनमें से कई चार-पांच साल तक इसी शहर में रहते हैं.

लेकिन पिछले दो वर्षों में कोटा ने दाखिलों में 25 से 30 प्रतिशत तक की गिरावट देखी थी. कोविड के सालों और ऑनलाइन कोचिंग के बढ़ते चलन ने बड़ी संख्या में छात्रों को घर पर ही रोक लिया था. छात्र आत्महत्याओं की घटनाएं और मीडिया में उनकी व्यापक चर्चा ने भी कोटा के कोचिंग हब को लेकर डर और चिंता का माहौल बनाया.

24 घंटे साइकोलॉोजिस्ट हैं उपलब्ध

कोचिंग उद्योग से जुड़े एक सूत्र कहते हैं, "कोटा को लेकर बनी नकारात्मक छवि का असर यहां के कोचिंग कारोबार पर पड़ा. लेकिन इसके बाद शहर ने सुधार के लिए गंभीर कदम उठाए. पिछले तीन वर्षों में छात्र कल्याण पर खास ध्यान दिया गया है. यहां एक वेल-बीइंग इंस्टीट्यूट बनाया गया है जहां 70 से अधिक मनोवैज्ञानिक चौबीसों घंटे उपलब्ध रहते हैं. हेल्पलाइन हैं, 'नो एग्जाम डे' हैं, 'फन डे' हैं. हॉस्टल संचालकों, मेस चलाने वालों और ऑटो चालकों तक को 'गेटकीपर ट्रेनिंग' दी गई है ताकि वे छात्रों की परेशानियों को पहचान सकें और उनकी मदद कर सकें."

टॉपर शुभम ने एलन से की है पढ़ाई

लेकिन इस साल 25 मार्च के बाद से तस्वीर बदलनी शुरू हुई. नितिन कुकरेजा के मुताबिक पिछले साल की तुलना में दाखिलों में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और जेईई के इस साल के परिणामों के बाद इसमें और तेजी आने की उम्मीद है. "इस साल का रिजल्ट असाधारण है," वे कहते हैं. "ऑल इंडिया रैंक-1 शुभम कुमार और रैंक-2 कबीर चिल्लर दोनों एलन के छात्र रहे हैं. शुभम बिहार से हैं जबकि कबीर गुरुग्राम से."

ऑल इंडिया रैंक-3 हासिल करने वाले जतिन चाहर ने सीकर स्थित एलन केंद्र से पढ़ाई की है. वहीं टॉप-10 में शामिल अर्नव गौतम, कनिष्क जैन और आरोही देशपांडे जैसे छात्रों ने भी कोटा में रहकर जेईई की तैयारी की.

कोटा की सफलता सिर्फ इतनी नहीं है कि यहां से टॉपर्स निकलते हैं. इसकी एक बड़ी उपलब्धि यह भी है कि इसने जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं को छोटे शहरों और कस्बों के बच्चों की पहुंच में ला दिया है.

इस साल के टॉपर शुभम कुमार बिहार के छोटे शहर गया से आते हैं. कोटा की लोकप्रियता की एक वजह यह भी है कि यह हर आर्थिक वर्ग के छात्रों को अपने भीतर जगह देता है. निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के बच्चों के लिए भी यहां अवसर हैं और यही कारण है कि देशभर से छात्र यहां खिंचे चले आते हैं.

ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन

ऑनलाइन कोचिंग ने भी कुछ समय के लिए कोटा की चमक को फीका किया था. बहुत से अभिभावकों को लगने लगा था कि बच्चों को घर के सुरक्षित माहौल में रखकर ऑनलाइन पढ़ाई कराना ही बेहतर विकल्प है. लेकिन हालिया नतीजों ने एक बार फिर दिखाया है कि ऑफलाइन क्लासरूम और कोटा-सीकर जैसा शैक्षणिक माहौल छात्रों को बेहतर एकाग्रता और प्रतिस्पर्धा का वातावरण देता है.

एक कोचिंग संस्थान के मार्केटिंग विभाग से जुड़े नितेश कहते हैं, "नतीजे खुद अपनी कहानी कहते हैं. जिन संस्थानों के पास मजबूत फैकल्टी है और ऑफलाइन शिक्षा में मजबूत पकड़ है, वही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं."

कोटा स्टूडेंट्स हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन कहते हैं, "मार्च से ही हम देख रहे हैं कि छात्रों की संख्या फिर बढ़ने लगी है. पहले कई कोचिंग संस्थानों ने छोटे शहरों में अपने सब-सेंटर खोल दिए थे, जिससे कोटा आने वाले छात्रों की संख्या प्रभावित हुई. लेकिन अब बहुत से छात्रों को समझ में आने लगा है कि पढ़ाई का माहौल कोटा में ही मिलता है. 

यहां पढ़ाई के अलावा कुछ और नहीं है. चयन यहीं होते हैं. वास्तव में सफलता की 30 से 35 प्रतिशत कहानियां कोटा से जुड़ी हुई हैं. इस साल शहर में छात्रों की संख्या फिर डेढ़ लाख तक पहुंचने की उम्मीद है."

वे मुस्कुराते हुए आगे कहते हैं, "कोटा का माहौल ही कुछ ऐसा है कि यहां एक ऑटो चालक भी आपको बता देगा कि किस विषय का सबसे अच्छा शिक्षक कौन है. वह आपकी जरूरत के हिसाब से अच्छा कोचिंग संस्थान और अच्छा हॉस्टल भी सुझा देगा. यही कोटा की पहचान है."

कोटा को टक्कर दे रहा है सीकर

लेकिन अगर कोटा अपनी पुरानी चमक वापस पाने की कोशिश कर रहा है, तो राजस्थान में धीरे-धीरे उभर रहा दूसरा कोचिंग शहर सीकर भी इन दिनों जश्न मना रहा है. बीएसएफ कर्मी दिनेश चाहर के बेटे जतिन चाहर ने ऑल इंडिया रैंक-3 हासिल की है और सीकर में इन दिनों जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह जतिन चाहर का ही है. स्थानीय विधायक गोविंद सिंह डोटासरा से लेकर कोचिंग संस्थानों और शिक्षकों तक, बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. जतिन के घर पर लगातार लोगों का आना-जाना बना हुआ है. 

जतिन के पिता दिनेश चाहर बताते हैं, "फौज और अर्धसैनिक बलों की नौकरी में लगातार तबादले होते रहते हैं. हमारा गांव झुंझुनूं जिले में सीकर के पास गोठ है.हमने सोचा कि बेटे को आईआईटी की तैयारी सीकर में ही कराई जाए. देश के सबसे बड़े कोचिंग संस्थानों की शाखाएं यहां मौजूद हैं, फिर कोटा जाने की क्या जरूरत थी? और सीकर एक छोटा शहर है जहां अपनापन है. इसलिए मुझे अपनी पत्नी और बेटे को यहां छोड़ने में कभी चिंता नहीं हुई, भले ही मेरी पोस्टिंग कहीं और रही हो."

जतिन का सपना आईआईटी बॉम्बे में पढ़ना

अब जतिन का सपना आईआईटी बॉम्बे में दाखिला लेकर कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करना है. सीकर की फैकल्टी के बारे में वे कहते हैं, "बहुत बढ़िया है. यहां शिक्षक हर शंका का समाधान करते हैं और छात्रों पर व्यक्तिगत ध्यान देते हैं." कोटा की तुलना में सीकर अभी छोटा है. उसमें छोटे शहर का आकर्षण अब भी बरकरार है. लेकिन जैसे-जैसे वह राजस्थान के अगले बड़े कोचिंग हब के रूप में उभर रहा है, जतिन चाहर की सफलता उससे बेहतर विज्ञापन शायद कोई नहीं हो सकता.

जयपुर और बीकानेर के बीच बसे इस शहर की ओर जाने वाली सड़कों पर कोचिंग संस्थानों के बड़े-बड़े होर्डिंग लगे हैं, जो सपनों का वादा करते हैं और दाखिलों के लिए आकर्षित करते हैं. लेकिन उन तमाम विज्ञापनों से कहीं ज्यादा असरदार है जतिन चाहर की ऑल इंडिया रैंक-3.

उनका परिणाम खुद अपनी कहानी कहता है.

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