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नीट में कम रैंक पर विदेश से MBBS करना सही या देश में ही ड्रॉप लेना बेहतर? समझें नफा-नुकसान

NEET UG का रिजल्ट आने के बाद कई छात्रों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अगर रैंक उम्मीद के मुताबिक नहीं आई, तो क्या विदेश जाकर MBBS करना चाहिए या एक साल ड्रॉप लेकर दोबारा NEET की तैयारी करनी चाहिए?

नीट में कम रैंक पर विदेश से MBBS करना सही या देश में ही ड्रॉप लेना बेहतर? समझें नफा-नुकसान

NEET UG का रिजल्ट आने के बाद कई छात्रों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अगर रैंक उम्मीद के मुताबिक नहीं आई, तो क्या विदेश जाकर MBBS करना चाहिए या एक साल ड्रॉप लेकर दोबारा NEET की तैयारी करनी चाहिए? दोनों विकल्पों के अपने-अपने फायदे और चुनौतियां हैं. सही फैसला आपकी रैंक, बजट, तैयारी की क्षमता और करियर के लक्ष्य पर निर्भर करता है. 

जानें दोनों विकल्पों के फायदे और नुकसान

विकल्प 1: एक साल ड्रॉप लेकर दोबारा NEET की तैयारी

अगर आपको लगता है कि थोड़ी और मेहनत से बेहतर स्कोर हासिल किया जा सकता है, तो ड्रॉप लेना एक अच्छा विकल्प हो सकता है. 

ड्रॉप लेने के फायदे
- अच्छी तैयारी के साथ अगले प्रयास में बेहतर रैंक आने पर सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल सकता है, जहां फीस अपेक्षाकृत काफी कम होती है. 

- भारत में ही पढ़ाई करने का अवसर मिलता है और भारतीय मेडिकल सिस्टम को शुरुआत से समझने का फायदा मिलता है. 

- सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS की कुल फीस निजी कॉलेजों और अधिकांश विदेशी विकल्पों की तुलना में काफी कम होती है. 

ड्रॉप लेने के नुकसान
- एक साल का समय अतिरिक्त लग सकता है. 
- सफलता की कोई गारंटी नहीं होती. 
- मानसिक दबाव और प्रतियोगिता का सामना करना पड़ सकता है. 
- लगातार अनुशासन और नियमित पढ़ाई जरूरी होती है. 

विकल्प 2: विदेश से MBBS

हर साल हजारों भारतीय छात्र रूस, जॉर्जिया, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, नेपाल और अन्य देशों के मेडिकल विश्वविद्यालयों में MBBS के लिए प्रवेश लेते हैं. 

विदेश से MBBS के फायदे
- कई देशों के विश्वविद्यालयों में NEET क्वालिफाई करने वाले भारतीय छात्रों को प्रवेश मिल जाता है. हालांकि प्रवेश की शर्तें विश्वविद्यालय और देश के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं. 

- कुछ विदेशी विश्वविद्यालयों में कुल खर्च भारत के कई निजी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में कम हो सकता है. हालांकि इसमें ट्यूशन फीस के अलावा हॉस्टल, भोजन, यात्रा, बीमा और अन्य खर्च भी शामिल करने चाहिए. 

- विदेश में पढ़ाई करने से नई संस्कृति, भाषा और अलग स्वास्थ्य व्यवस्था को समझने का अवसर मिलता है. 

विदेश से MBBS के नुकसान
- विदेश से MBBS करने के बाद भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के नियमों के अनुसार आवश्यक लाइसेंसिंग प्रक्रिया पूरी करनी होती है. 

- कुछ देशों में शुरुआती पढ़ाई अंग्रेजी में होती है, लेकिन क्लिनिकल ट्रेनिंग के दौरान स्थानीय भाषा सीखना आवश्यक हो सकता है ताकि मरीजों से संवाद किया जा सके. 

- लंबे समय तक परिवार से दूर रहने, नई संस्कृति में ढलने और मानसिक रूप से मजबूत रहने की जरूरत होती है. 

- विदेश जाने से पहले केवल फीस नहीं, बल्कि वीजा, यात्रा, मेडिकल इंश्योरेंस, रहने और अन्य दैनिक खर्चों का भी सही आकलन करना जरूरी है. 

क्‍या करना बेहतर है? 

NEET में कम रैंक आना मेडिकल करियर का अंत नहीं है. ड्रॉप लेना उन छात्रों के लिए बेहतर हो सकता है जिन्हें भरोसा है कि वे अगले प्रयास में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. वहीं, विदेश से MBBS उन छात्रों के लिए एक विकल्प हो सकता है जो उचित शोध, मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय और भविष्य की लाइसेंसिंग आवश्यकताओं को समझते हुए आगे बढ़ना चाहते हैं. 

फैसला लेने से पहले किसी भी विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से पूर्व उसकी NMC पात्रता, पढ़ाई की गुणवत्ता, कुल खर्च, इंटर्नशिप व्यवस्था और भारत में प्रैक्टिस से जुड़े नियमों की अच्छी तरह जांच करना बेहद जरूरी है.

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